यूपी पंचायत चुनाव मई-जून में न हो पाने का संकेत सरकार की ओर से भी मिलने लगा है.पंचायती राज मंत्री और सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने कहा है कि अगर वक्त पर पंचायत चुनाव नहीं हो पाता है तो हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार प्रशासकों की नियुक्ति होगी या फिर पंचायतों का कार्यकाल आगे बढ़ाने पर फैसला होगा. इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश का पालन किया जाएगा. इससे उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधान चुनाव, जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत चुनाव आगे खिसकने की संभावना पढ़ गई है.
यूपी पंचायत चुनाव की तारीख पर सवाल
राजभर ने कहा कि यूपी पंचायत चुनाव का केस अभी इलाहाबाद हाईकोर्ट में चल रहा है, जहां चुनाव समय पर कराने की मांग की गई है. हालांकि अभी तक पंचायतों की मतदाता सूची तैयार न होने से ही संशय है. पंचायत चुनाव की मतदाता सूची ही 10 जून को सामने आएगी. वहीं पिछड़ा वर्ग आयोग गठित न होने से आरक्षण का मसला भी अटका है. बीडीसी, ब्लॉक प्रमुख, जिला पंचायत सदस्य और जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में भी इस कारण देरी हो सकती है.
पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट का आदेश मानेगी सरकार
राजभर ने कहा कि अगर अदालत चुनाव कराने का आदेश देती है तो सरकार तैयार हैं. लेकिन चुनाव न होने की हालत में मौजूदा प्रधानों और ग्राम पंचायत सदस्यों का ही कार्यकाल बढ़ाने का प्रस्ताव यूपी सरकार के समक्ष रखा जाएगा और पारित कराया जाएगा. मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और राजस्थान में भी ऐसे ही कार्यकाल बढ़ाकर चुनाव टलने की स्थिति से निपटा गया है.
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ग्राम प्रधानों के 50 हजार से ज्यादा पद
यूपी में ग्राम प्रधानों के 50 हजार से भी ज्यादा पद हैं. वहीं पिछले पांच सालों में तमाम इलाके नगरीय सीमा में शामिल होने के कारण पंचायतों की संख्या में बदलाव भी हो सकता है. ग्राम प्रधान और क्षेत्र पंचायत प्रमुखों के संगठनों की मांग है कि अगर चुनाव समय पर नहीं कराए जाएं तो प्रशासक के तौर पर अधिकारी बैठाने की बजाय मौजूदा प्रधानों और ब्लॉक प्रमुखों का कार्यकाल ही बढ़ाया जाए, ताकि उनके हितों को नुकसान न पहुंचे.
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राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पंचायत चुनाव चूंकि पार्टी सिंबल पर नहीं लड़े जाते, लिहाजा इसमें गुटबाजी, रंजिश और जोड़तोड़, बगावत की पूरी आशंका रहती है. ऐसे में सरकारें नहीं चाहतीं कि विधानसभा चुनाव के पहले पंचायत चुनाव कराए जाएं. संगठन और मजबूत कैडर वाली पार्टी को इससे ज्यादा नुकसान का खतरा रहता है.
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