UP Politics: भगवान राम की जन्मभूमि पर 500 सालों के संघर्ष के बाद जब राम मंदिर (Ram Mandir) बना तो ऐसा लगा जैसे रामलला का नाम अब सिर्फ आस्था के लिए लिया जाएगा, राम के नाम की राजनीति अब शायद ना हो, लेकिन ऐसा नहीं है. यूपी की राजनीति में गाहे बगाहे राम का नाम आ ही जाता है. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) में अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर भगवान राम की मूर्ति की तस्वीर साझा की तो कोई उसका स्वागत कर रहा तो कोई उसके नाम पर टीका टिप्पणी.
हुआ दरअसल यूं कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राम की मूर्ति की एक तस्वीर एक्स पर पोस्ट की. ये मूर्ति उनके गृह जनपद इटावा (Etawah) में बन रहे केदारेश्वर मंदिर (Kedareshwar Mandir) में लगाई जाएगी. केदारेश्वर मंदिर का निर्माण अखिलेश यादव ही करा रहे हैं. केदारेश्वर यानी भगवान केदारनाथ के नाम का मंदिर. अखिलेश यादव जोर-शोर से इस मंदिर के निर्माण के काम को आगे बढ़ा रहे हैं. इस पोस्ट के जरिए उन्होंने बता दिया कि उनके मंदिर में सिर्फ भोलेनाथ नहीं, बल्कि भगवान राम भी विराजमान होंगे.
अयोध्या में रामलला के दर्शन पर हमेशा टाल जाते हैं सवाल
अखिलेश यादव पर निशाना साधे जाने की वजह अयोध्या के राम मंदिर की वजह है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बने राम मंदिर में दर्शन करने अखिलेश यादव आज तक नहीं गए. इस मामले पर सवाल करने पर हमेशा वो अपनी आस्था भगवान में जताते हुए सवाल को टाल जाते हैं. हाल ही में एक इंटरव्यू में जब अखिलेश यादव से राम मंदिर जाने का सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि जब उनके केदारेश्वर मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा हो जाएगी, वो तब अयोध्या जाकर रामलला के दर्शन करेंगे.
सपाइयों के दामन पर रामभक्तों के खून के छींटे- केशव मौर्या
भारतीय जनता पार्टी (BJP) राम मंदिर के सवाल पर अखिलेश यादव को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ती. अखिलेश यादव के राम की अभिराम मूर्ति की तस्वीर पोस्ट करते ही यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने उन पर तंज कर दिया. केशव मौर्य (Keshav Maurya) लिखते हैं कि भाजपा के भय से पहले मंदिर बनवाना और अब प्रभु श्रीरामलला की मूर्ति लगवाने की चर्चा करना, यह समाजवादी पार्टी की ‘अवसरवादी' राजनीति का नया चेहरा है. विडंबना यह है कि जिस सपा और सपाइयों के दामन पर रामभक्तों के खून के छींटे लगे हों, वे आज रामभक्ति का स्वांग रच रहे हैं.
'श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर बनी ईदगाह की बात करें अखिलेश'
केशव मौर्य यहीं नहीं रुके. राम की मूर्ति के नाम पर वो सीधे मथुरा चले गए. उन्होंने अखिलेश यादव से कहा कि अगर अखिलेश वास्तव में आस्था का सम्मान करते और उनकी नीयत सही होती तो श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर बनी ईदगाह को हटाकर भव्य मंदिर निर्माण की बात करते और बाबरी समर्थकों के खिलाफ भी आवाज उठाते. दुविधा में फंसे सपा बहादुर और उनकी सपा न तो रामभक्तों का विश्वास पाएगी और न ही अपना कथित ‘वोट बैंक' बचा पाएगी. 2027 में इनको न तो हिंदू मिलेगा और न मुसलमान, मिलेगा तो केवल सैफई में स्थान.
विधानसभा चुनाव में बनाना चाहते हैं सॉफ्ट हिंदुत्व की छवि
उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव (UP Vidhan Sabha Chunav 2027) होने हैं. बीजेपी हिंदुत्व और विकास के एजेंडे को लेकर आगे बढ़ रही है तो वहीं समाजवादी पार्टी पीडीए के साथ सॉफ्ट हिंदुत्व की लाइन को आगे बढ़ा रही है. अखिलेश यादव पिछड़े दलित और अल्पसंख्यक को साथ लेने की बात कह रहे हैं, लेकिन उन्हें पता है कि बीजेपी के हिंदुत्व को काटने के लिए उन्हें अपनी छवि कुछ बदलनी होगी. बीजेपी ने उन पर तुष्टिकरण का जो आरोप लगाया है, उससे निजात पाने के लिए अखिलेश यादव को सॉफ्ट हिंदुत्व का रास्ता ही एकमात्र विकल्प है.
केदारनाथ की तरह मंदिर, इस साल कर देंगे प्राण प्रतिष्ठा
इटावा जिले में बन रहा केदारेश्वर मंदिर अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट्स में से एक है. केदारनाथ मंदिर की तरह दिखने वाले इस मंदिर के निर्माण की शुरुआत में केदारनाथ के पांडा पुरोहितों ने इसका विरोध किया था. हालांकि, वो विरोध का मामला ठंडा पड़ गया और मंदिर बन कर लगभग तैयार हो चुका है. माना जा रहा है कि अखिलेश यादव साल के आखिर तक इस मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन कर अपने सॉफ्ट हिंदुत्व को चुनाव के पहले विस्तार देने की कोशिश कर सकते हैं. देखना होगा, अखिलेश यादव के “राम” क्या उनकी वैतरणी पार लगाएंगे.
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