- आज लखनऊ में गुलाम नबी आज़ाद और अखिलेश यादव की मुलाक़ात संभव
- सपा बोली, वह जिन सीटों पर पहले-दूसरे नंबर पर रही, उन पर उसका हक़ बनता है.
- कहा जा रहा है कि तालमेल होने पर शायद कुछ सीटें कांग्रेस को वापस मिल जाएं.
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नई दिल्ली/लखनऊ:
उत्तर प्रदेश में सपा और कांग्रेस के बीच गठजोड़ में पेंच फंस गया है. सपा के 209 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी होते ही गठबंधन खटाई में पड़ता दिख रहा है. इन सीटों में सात ऐसी सीटें हैं, जहां पिछली बार कांग्रेस जीती थीं.
सपा कह रही है कि जिन सीटों पर पिछले चुनावों में वो पहले-दूसरे नंबर पर रही, उन पर उसका हक़ बनता है और कांग्रेस बस 54 सीटों की हक़दार है. हालांकि कहा ये भी जा रहा है कि अगर तालमेल हो जाए तो शायद ये सीटें कांग्रेस को वापस मिल जाएं. माना जा रहा है कि आज लखनऊ में गुलाम नबी आज़ाद और अखिलेश यादव की मुलाक़ात हो सकती है, उसके बाद ही गठबंधन के सस्पेंस से परदा उठेगा.
दरअसल, उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन की संभावना पर उस समय संदेह के बादल मंडराने लगे जब प्रदेश के सत्तारूढ़ दल ने 209 विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशियों की सूची घोषित कर दी. कांग्रेस ने सपा के इस कदम को दुर्भाग्यपूर्ण बताया.
सपा के उम्मीदवारों की सूची जारी करने के बाद उप्र के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता तथा राज्य प्रभारी गुलाम नबी आजाद ने संकेत दिए कि चुनाव पूर्व गठबंधन की अब संभावना क्षीण है.
सपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष किरणमय नंदा ने लखनऊ में संवाददाताओं से कहा कि उनकी पार्टी का मुख्य मकसद आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा को हराना है. इसके लिए कांग्रेस से गठबंधन की कोशिश की गई, लेकिन उसकी तरफ से अभी तक कोई सकारात्मक जवाब नहीं आया है.
उन्होंने कहा कि कांग्रेस अगर भाजपा को परास्त होते देखना चाहती है तो उसे सपा के फार्मूले को मानना होगा. इस फार्मूले के तहत वर्ष 2012 में हुए पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस जिन सीटों पर पहले या दूसरे नंबर पर रही थी, और वे सीटें जिन पर सपा तीसरे, चौथे या पांचवें नंबर पर रही थी, वे कांग्रेस को दे दी जाएंगी.
नंदा ने कहा कि इस हिसाब से कांग्रेस को 54 सीटें ही मिलनी चाहिए, लेकिन अगर वह गंभीरता से बातचीत करे तो उसे 25-30 सीटें और दी जा सकती है. सपा कांग्रेस को अधिकतम 85 सीटें दे सकती है.
यह पूछे जाने पर कि क्या सपा द्वारा घोषित 191 सीटों में में कई वे सीटें हैं, जिन पर वर्ष 2012 के पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी जीते थे, उन्होंने कहा कि अगर गठबंधन होगा तो कांग्रेस जहां जीती है, वह सीट उसे दे दी जाएंगी. हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेठी और लखनऊ छावनी सीटें सपा अपने पर ही रखेगी.
सपा कह रही है कि जिन सीटों पर पिछले चुनावों में वो पहले-दूसरे नंबर पर रही, उन पर उसका हक़ बनता है और कांग्रेस बस 54 सीटों की हक़दार है. हालांकि कहा ये भी जा रहा है कि अगर तालमेल हो जाए तो शायद ये सीटें कांग्रेस को वापस मिल जाएं. माना जा रहा है कि आज लखनऊ में गुलाम नबी आज़ाद और अखिलेश यादव की मुलाक़ात हो सकती है, उसके बाद ही गठबंधन के सस्पेंस से परदा उठेगा.
दरअसल, उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन की संभावना पर उस समय संदेह के बादल मंडराने लगे जब प्रदेश के सत्तारूढ़ दल ने 209 विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशियों की सूची घोषित कर दी. कांग्रेस ने सपा के इस कदम को दुर्भाग्यपूर्ण बताया.
सपा के उम्मीदवारों की सूची जारी करने के बाद उप्र के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता तथा राज्य प्रभारी गुलाम नबी आजाद ने संकेत दिए कि चुनाव पूर्व गठबंधन की अब संभावना क्षीण है.
सपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष किरणमय नंदा ने लखनऊ में संवाददाताओं से कहा कि उनकी पार्टी का मुख्य मकसद आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा को हराना है. इसके लिए कांग्रेस से गठबंधन की कोशिश की गई, लेकिन उसकी तरफ से अभी तक कोई सकारात्मक जवाब नहीं आया है.
उन्होंने कहा कि कांग्रेस अगर भाजपा को परास्त होते देखना चाहती है तो उसे सपा के फार्मूले को मानना होगा. इस फार्मूले के तहत वर्ष 2012 में हुए पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस जिन सीटों पर पहले या दूसरे नंबर पर रही थी, और वे सीटें जिन पर सपा तीसरे, चौथे या पांचवें नंबर पर रही थी, वे कांग्रेस को दे दी जाएंगी.
नंदा ने कहा कि इस हिसाब से कांग्रेस को 54 सीटें ही मिलनी चाहिए, लेकिन अगर वह गंभीरता से बातचीत करे तो उसे 25-30 सीटें और दी जा सकती है. सपा कांग्रेस को अधिकतम 85 सीटें दे सकती है.
यह पूछे जाने पर कि क्या सपा द्वारा घोषित 191 सीटों में में कई वे सीटें हैं, जिन पर वर्ष 2012 के पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी जीते थे, उन्होंने कहा कि अगर गठबंधन होगा तो कांग्रेस जहां जीती है, वह सीट उसे दे दी जाएंगी. हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेठी और लखनऊ छावनी सीटें सपा अपने पर ही रखेगी.
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