- हम हर घर नल जल योजना को आगे बढ़ा रहे हैं, कोई टोटी चोरी कर ले रहा है... योगी ने शुक्रवार को यह बयान दिया.
- उनका यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. उनके इस बयान को राजनीतिक कटाक्ष के रूप में देखा जा रहा है.
- हालांकि योगी आदित्यनाथ ने किसी का नाम नहीं लिया.
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर विश्व बैंक समर्थित 2,741 करोड़ रुपये की लागत वाली परियोजना की शुरुआत की. इस परियोजना का शुरू करने के बाद कार्यक्रम को संबोधित हुए योगी आदित्यनाथ सियासी चुटकी भी लेते नजर आए. उन्होंने कहा, "हम हर घर नल जल योजना को आगे बढ़ा रहे हैं, कोई टोटी चोरी कर ले रहा है. कोई टोटी खुला छोड़ दे रहा है." यह बयान देते हुए योगी मंद-मंद मुस्कुराते भी नजर आए. योगी का बयान राजनीतिक कटाक्ष के रूप में देखा जा रहा है. लोग इसे सपा नेता अखिलेश यादव पर लगे टोटी चोरी के आरोप से जोड़कर देख रहे हैं. हालांकि योगी ने अपने बयान में किसी का नाम नहीं लिया.
लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में बोले सीएम -
— Anamika Singh kaali (@Anamika4S) June 5, 2026
हमने हर घर नल योजना को आगे बढ़ाया तो कोई टोटी चोरी कर ले रहा है … pic.twitter.com/K72ycuR2jU
उत्तर प्रदेश स्वच्छ वायु प्रबंधन परियोजना की शुरुआत
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को कहा कि पर्यावरण की उपेक्षा की कीमत आज पूरी मानवता चुका रही है.
योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को विश्व पर्यावरण दिवस-2026 के अवसर पर विश्व बैंक समर्थित 2,741 करोड़ रुपये की लागत वाली भारत की पहली एयरशेड आधारित ''उत्तर प्रदेश स्वच्छ वायु प्रबंधन परियोजना'' की शुरुआत करने के बाद समारोह को संबोधित कर रहे थे.
एक पेड़ मां के नाम महाभियान के लोगो का अनावरण
इस मौके पर विश्व बैंक के साथ एक समझौता ज्ञापन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष अधिकारियों ने हस्ताक्षर किए. साथ ही योगी ने प्रदेश में 35 करोड़ पौधरोपण लक्ष्य के अंतर्गत ‘एक पेड़ मां के नाम' वृक्षारोपण महाअभियान-2026 के लोगो और अन्य श्रृंखला का अनावरण किया.
'पर्यावरण की उपेक्षा की कीमत चुका रही मानवता'
समारोह को संबोधित करते हुए योगी ने कहा ''आज का दिन हम सबके लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि सामान्य बोलचाल की भाषा में कहा जाता है कि ''जल है तो कल है, वन है तो जीवन है. एक दूसरे के साथ जीवन चक्र जुड़ा हुआ है, लेकिन उनकी (पर्यावरण की) हमने सर्वाधिक उपेक्षा भी की है और उस उपेक्षा की कीमत आज पूरी मानवता चुका रही है.''
मौसम चक्र में एक से डेढ़ महीने का हो गया अंतर
योगी ने कहा कि 40-45 या 50 वर्ष की उम्र का हर व्यक्ति यह महसूस करता है कि उसके जीवन के कालखंड में पर्यावरण के साथ हुए खिलवाड़ की कीमत को हम सब चुका रहे हैं. उन्होंने कहा कि सबने मौसम चक्र को बदलते हुए देखा होगा और आज से 25 वर्ष पहले मौसम का जो चक्र होता था, उसमें एक से डेढ़ महीने का अंतर आ गया है.
मौसम चक्र में बदलाव से खाद्यान्न पर संकट
मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर मौसम चक्र में अंतर आएगा तो सबसे अधिक प्रभावित किसान होगा और उसकी आमदनी पर असर पड़ेगा. ''हमें अतिवृष्टि, अनावृष्टि का सामना करना पड़ेगा. खाद्यान्न का संकट खड़ा हो सकता है और पूरी दुनिया उन चीजों से चिंतित भी है.'' उन्होंने जोर देकर कहा कि असमय घटने वाली प्राकृतिक आपदाएं एक चेतावनी भी हैं जिनसे बचने के लिए उपायों के प्रयास करना है. उप्र के वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अरुण कुमार ने भी समारोह को संबोधित किया.
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