जब मायावती पहली बार सीएम बनीं तो योगेश द्विवेदी बसपा से जुड़े.
नई दिल्ली:
राजनीति में चाय की चर्चा आने से तुरंत ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र अपने आप ही आ जाता है. अब कमोबेश वैसा ही मामला बसपा के मथुरा से प्रत्याशी योगेश द्विवेदी से जुड़ा है. योगेश द्विवेदी ने कभी चाय तो नहीं बेची लेकिन कभी कांशीराम और मायावती को उन्होंने चाय जरूर पिलाई थी. यह उस दौर की बात है जब वह एक होटल में वेटर थे. बेहद गरीबी में बचपन गुजारने वाले योगेश ने अपनी जिंदगी की शुरुआत 300 रुपये की नौकरी से की थी. उस दौरान परिवार को सहारा देने के लिए उन्होंने एक होटल में नौकरी शुरू कर दी.
उसी दौरान उनको सलाह दी गई कि यदि यही काम करना है तो होटल मैनेजमेंट की डिग्री ले लेनी चाहिए. उन्होंने दोस्तों से पैसे लेकर चंडीगढ़ से होटल मैनेजमेंट का कोर्स किया. वहां से मथुरा लौटने पर एक होटल में इंटरव्यू के लिए आवेदन किया लेकिन 700 रुपयों की वेटर की नौकरी ही ऑफर हुई. विकल्प नहीं होने के कारण उन्होंने उसे स्वीकार कर लिया.
उस होटल के मालिक बसपा से जुड़े थे. उसके बाद जब मायावती पहली बार मुख्यमंत्री बनीं तो वह कांशीराम के साथ उस होटल में आईं. योगेश के होटल मैनेजमेंट कोर्स की वजह से मालिक ने बसपा नेताओं को चाय-नाश्ता कराने की जिम्मेदारी उन्हीं को सौंपी. इस तरह वह पहली बार बसपा के शीर्ष नेतृत्व के संपर्क में आए.
उसी दौरान योगेश की मां वृंदावन से चेयरमैन के लिए निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में खड़ी हुईं और चुनाव भी जीतीं. वह तीन साल इस पद पर रहीं और बाद में बसपा में शामिल हो गई. इस तरह योगेश भी बसपा से जुड़ गए और उनकी लगन को देखते हुए मायावती ने मथुरा में उन्हें पार्टी का कोर्डिनेटर बना दिया.
2014 के लोकसभा चुनाव में भी वह बीजेपी की हेमामालिनी के खिलाफ बसपा की तरफ से चुनाव लड़ चुके हैं. उसमें हेमामालिनी की जीत हुई. अब पार्टी ने उनको यूपी विधानसभा चुनाव में उतारा है. एक वेटर के रूप में करियर शुरू करने वाले योगेश अब होटल और फैक्ट्री के मालिक हैं और करोड़पति प्रत्याशी हैं.
उसी दौरान उनको सलाह दी गई कि यदि यही काम करना है तो होटल मैनेजमेंट की डिग्री ले लेनी चाहिए. उन्होंने दोस्तों से पैसे लेकर चंडीगढ़ से होटल मैनेजमेंट का कोर्स किया. वहां से मथुरा लौटने पर एक होटल में इंटरव्यू के लिए आवेदन किया लेकिन 700 रुपयों की वेटर की नौकरी ही ऑफर हुई. विकल्प नहीं होने के कारण उन्होंने उसे स्वीकार कर लिया.
उस होटल के मालिक बसपा से जुड़े थे. उसके बाद जब मायावती पहली बार मुख्यमंत्री बनीं तो वह कांशीराम के साथ उस होटल में आईं. योगेश के होटल मैनेजमेंट कोर्स की वजह से मालिक ने बसपा नेताओं को चाय-नाश्ता कराने की जिम्मेदारी उन्हीं को सौंपी. इस तरह वह पहली बार बसपा के शीर्ष नेतृत्व के संपर्क में आए.
उसी दौरान योगेश की मां वृंदावन से चेयरमैन के लिए निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में खड़ी हुईं और चुनाव भी जीतीं. वह तीन साल इस पद पर रहीं और बाद में बसपा में शामिल हो गई. इस तरह योगेश भी बसपा से जुड़ गए और उनकी लगन को देखते हुए मायावती ने मथुरा में उन्हें पार्टी का कोर्डिनेटर बना दिया.
2014 के लोकसभा चुनाव में भी वह बीजेपी की हेमामालिनी के खिलाफ बसपा की तरफ से चुनाव लड़ चुके हैं. उसमें हेमामालिनी की जीत हुई. अब पार्टी ने उनको यूपी विधानसभा चुनाव में उतारा है. एक वेटर के रूप में करियर शुरू करने वाले योगेश अब होटल और फैक्ट्री के मालिक हैं और करोड़पति प्रत्याशी हैं.
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