- उत्तर प्रदेश के विनीत कुमार ने आर्थिक तंगी के बावजूद भारतीय सेना में मेडिकल कोर में चयन प्राप्त किया
- विनीत ने कड़ी ट्रेनिंग पूरी की और पहली बार सेना की वर्दी में गांव लौटकर पूरे इलाके में जश्न मनाया गया
- प्रधान ने विनीत के स्वागत के लिए भव्य जुलूस का आयोजन किया जिसमें गांव के सभी वर्गों के लोग शामिल हुए
Success Story: कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों और अपनों का साथ मिले, तो तंगहाली भी सफलता का रास्ता नहीं रोक सकती. ऐसा ही कुछ कर दिखाया है उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में मुगलसराय के पास के बखरा गांव के रहने वाले 19 वर्षीय विनीत कुमार ने. विनीत ने अपने परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति को आड़े नहीं आने दिया और अपनी कड़ी मेहनत के दम पर भारतीय सेना में जगह बना ली. ट्रेनिंग पूरी करने के बाद जब विनीत पहली बार सेना की वर्दी पहनकर अपने गांव पहुंचे, तो पूरे इलाके में जश्न का माहौल बन गया. ग्रामीणों ने विनीत का ऐसा ऐतिहासिक स्वागत किया कि हर आंख खुशी से नम हो गई.
आर्मी मेडिकल कोर में हुआ चयन, लखनऊ में ली ट्रेनिंग
NDTV से खास बातचीत में विनीत कुमार ने अपनी इस गौरवमयी यात्रा के बारे में बताया. विनीत का चयन भारतीय सेना की मेडिकल कोर में हुआ है. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 6 महीने की कड़ी और बुनियादी ट्रेनिंग पूरी करने के बाद, जब वे 6 जुलाई को पहली बार अपने पैतृक गांव बखरा पहुंचे, तो वहां का नजारा अद्भुत था. विनीत ने कहा, "मुझे यह देखकर बेहद खुशी हुई कि मेरी इस सफलता के जश्न में केवल मेरा परिवार ही नहीं, बल्कि पूरा गांव शामिल था. हर कोई मुझ पर गर्व कर रहा था."
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Success Story Vinit Kumar Indian Army Medical Core Mughalsarai Uttar Pradesh
Photo Credit: Vinit Kumar
डेढ़ किलोमीटर दूर से शुरू हुआ जुलूस, खुली गाड़ी में स्वागत
विनीत के गांव आगमन को यादगार बनाने के लिए ग्रामीणों ने पलक-पावड़े बिछा दिए थे. उनके घर पहुंचने से करीब डेढ़ किलोमीटर पहले ही 'बजरंग नगर' के पास भारी संख्या में लोग उनके स्वागत के लिए इकट्ठा हो गए थे. वहां विनीत को फूल-मालाओं से लाद दिया गया. इसके बाद उन्हें एक सनरूफ वाली एसयूवी गाड़ी में सवार किया गया.
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इस भव्य जुलूस और स्वागत समारोह का पूरा इंतजाम गांव के प्रधान सतीश सिंह पटेल ने किया था, लेकिन इसमें जाति-पाति का भेद भूलकर गांव के हर तबके के लोग शामिल हुए. गांव के युवाओं की टोली देशभक्ति गीतों और डीजे की धुन पर जमकर थिरकती नजर आई.

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सफलता के पीछे चचेरे भाई और दोस्तों का रहा बड़ा हाथ
विनीत कुमार ने अपनी इस कामयाबी का श्रेय अपने परिवार, दोस्तों और शुभचिंतकों को दिया है. उन्होंने बताया, "मेरी इस सक्सेस स्टोरी में सबसे बड़ी भूमिका मेरे चचेरे भाई प्रवीण कुमार, ग्राम प्रधान के छोटे भाई लव कुमार पटेल और मेरे दोस्त विशाल पटेल की रही है."

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लव कुमार और विशाल ने जहां कदम-कदम पर एक सच्चे दोस्त की तरह विनीत का हौसला बढ़ाया और उन्हें प्रेरित किया, वहीं ताऊजी के बेटे प्रवीण कुमार ने विनीत के भीतर छिपी काबिलियत को पहचाना. विनीत के पास आगे की तैयारी के लिए पैसे नहीं थे, ऐसे में भाई प्रवीण ने अपने खर्च पर विनीत का दाखिला 'फोर्स एकेडमी, इंदौर' में करवाया. इंदौर में की गई 6 महीने की कड़ी तैयारी का ही नतीजा था कि विनीत का पहली बार में ही भारतीय सेना में चयन हो गया.

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पिता बुक स्टोर पर कर्मचारी, मां आंगनबाड़ी कार्यकर्ता
विनीत एक बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आते हैं. उनके पिता रवि कुमार एक बुक स्टोर (किताबों की दुकान) पर काम करके घर का गुजारा चलाते हैं, जबकि मां गीता देवी एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के रूप में समाज सेवा कर रही हैं. विनीत की छोटी बहन रिमझिम फिलहाल 12वीं कक्षा में पढ़ाई कर रही है.

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6 अगस्त 2006 को जन्मे विनीत कुमार ने महज 19 साल की उम्र में यह मुकाम हासिल किया है. खास बात यह है कि विनीत ने 12वीं पास करने के तुरंत बाद जिंदगी में पहली बार किसी सरकारी नौकरी का फॉर्म भरा था और अपनी पहली ही कोशिश में वे सफल रहे. देश सेवा का संकल्प ले चुके विनीत ने बताया कि वे सेना में रहते हुए अपनी आगे की पढ़ाई भी जारी रखेंगे और उसे पूरा करेंगे.
संतोष कुमार जायसवाल की रिपोर्ट
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