- शिवपाल यादव की तय थी बीजेपी नेता की मुलाकात
- अमर सिंह का बड़ा दावा
- लेकिन नहीं आये थे शिवपाल
नई दिल्ली:
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले मुलायम सिंह यादव परिवार में शुरू हुआ आपसी झगड़ा अभी तक खत्म नहीं हुआ है. ऊपरी तौर पर शिवपाल यादव और अखिलेश यादव के बीच शांति दिखाई देती है लेकिन बीच-बीच में तनाव की खबरें आती रहती हैं. 26 अगस्त को शिवपाल यादव ने पार्टी में खुद को अकेला होने का दर्द बयां किया था. उन्होंने कहा था कि हम चाहते हैं कि आगामी लोकसभा चुनाव में साथ मिलकर चुनाव लड़े, डेढ़ साल से सड़क पर हूं लेकिन पार्टी ने कोई ज़िम्मेदारी नहीं दी है. लेकिन उनको लेकर पूर्व सपा नेता अमर सिंह ने बड़ा दावा किया है. उनका कहना है कि सपा में हाशिये पर पहुंच चुके वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव की भाजपा के एक शीर्ष नेता से मुलाकात बिल्कुल तय थी, मगर यादव उसके लिये नहीं पहुंचे. सिंह ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा ‘‘मैंने भाजपा के शीर्ष नेता से शिवपाल के लिये बात की थी. बैठक के लिये समय भी तय हो गया था लेकिन शिवपाल नहीं पहुंचे. मुझ पर उनकी कोई राजनीतिक जिम्मेदारी नहीं है. मैं उनके सम्पर्क में नहीं हूं.’’
शिवपाल यादव की अखिलेश को नसीहत, बड़ों की बात मानते तो दोबारा सीएम बनते
इस बारे में और खुलासा करने के सवाल पर उन्होंने कहा ‘‘शिवपाल तो आप लोगों के आसपास ही रहते हैं. आप उनसे पूछ सकते हैं.‘‘ कभी सपा में बड़ा ओहदा और रुतबा रखने वाले प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से प्रतिद्वंद्विता के बाद इन दिनों हाशिये पर हैं.
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उन्होंने पिछले दिनों कहा था कि वह अब भी पार्टी में कोई जिम्मेदारी मिलने का इंतजार कर रहे हैं. वह ज्यादा समय तक उपेक्षित नहीं रह सकते और जल्द ही उन्हें भविष्य की रणनीति तय करनी होगी. शिवपाल ने इटावा में कहा था, ‘‘हम चाहते हैं कि आगामी लोकसभा चुनाव में साथ मिलकर लड़ें. पिछले डेढ़ साल से मैं पार्टी में कोई जिम्मेदारी मिलने का इंतजार कर रहा हूं, मगर अभी तक मुझे जिम्मेदारी नहीं सौंपी गयी है. मैं कितने समय तक उपेक्षित रहूं. अगर हम साथ लड़ेंगे तो इससे आम आदमी पर अच्छा असर पड़ेगा‘‘.
रामनाथ कोविंद सेकुलर भी दलित भी : शिवपाल यादव
इनपुट : भाषा
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इनपुट : भाषा
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