राम मंदिर वीआईपी पास: अयोध्या के राम मंदिर में वीआईपी दर्शन पास व्यवस्था एक बार फिर चर्चा में है. राम मंदिर में चंदा और चढ़ावा से जुड़े विवाद के बीच यह जानकारी सामने आई है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों के वीआईपी पास जारी करने के अधिकार वापस ले लिए गए हैं. इसके बाद लोगों के बीच यह जानने की उत्सुकता बढ़ गई है कि आखिर राम मंदिर में वीआईपी पास कैसे बनता है और इसके लिए कौन अधिकृत होता है.
किन लोगों के पासवीआईपी पास जारी करने का अधिकार?
अब तक ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय, ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा और विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव को वीआईपी दर्शन पास जारी कराने का अधिकार प्राप्त था. हालांकि अब यह जिम्मेदारी ट्रस्ट के सदस्य महंत दिनेंद्र दास को सौंप दी गई है. बताया जा रहा है कि फिलहाल सुगम दर्शन पास जारी किए जाएंगे लेकिन उन्हें स्वीकृत कराने वाले सदस्य का नाम बदल जाएगा.
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पैसे देकर नहीं बनता कोई वीआईपी पास
राम मंदिर में पैसे देकर वीआईपी पास बनवाने की कोई व्यवस्था नहीं है. वीआईपी पास केवल अधिकृत व्यक्तियों की सिफारिश और निर्धारित प्रक्रिया के तहत जारी किए जाते हैं. ट्रस्ट पदाधिकारियों के अलावा अयोध्या के जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी), डीआईजी और कमिश्नर को भी पास जारी कराने का अधिकार दिया गया है. प्रशासन के इन चार अधिकारियों को प्रतिदिन 200-200 लोगों के लिए पास जारी कराने की सुविधा प्राप्त है जबकि ट्रस्ट पदाधिकारियों के लिए ऐसी कोई निर्धारित सीमा नहीं थी.
एक फॉर्म से बन सकते हैं आठ लोगों के पास
विशिष्ट अतिथि या सुगम दर्शन पास के लिए एक निर्धारित फॉर्म भरना होता है. इस फॉर्म में श्रद्धालुओं का नाम, उम्र, जेंडर और पहचान पत्र का विवरण देना जरूरी होता है. एक फॉर्म के जरिए अधिकतम आठ लोगों के लिए पास जारी किया जा सकता है. जिस व्यक्ति या अधिकारी की आईडी से पास बनता है उसका नाम भी रिकॉर्ड में दर्ज रहता है.
राम मंदिर में प्रवेश के तीन अलग-अलग रास्ते
राम मंदिर परिसर में प्रवेश के लिए मुख्य रूप से तीन गेट निर्धारित हैं. आम श्रद्धालु मुख्य द्वार से प्रवेश कर लाइन में लगकर रामलला के दर्शन करते हैं. वहीं वीआईपी श्रद्धालुओं के लिए गेट नंबर-2 यानी रंग महल बैरियर गेट निर्धारित है. इस रास्ते से आने वाले लोगों को अपेक्षाकृत कम समय में दर्शन की सुविधा मिलती है.
इसके अलावा आदि शंकराचार्य द्वार को वीवीआईपी प्रवेश द्वार माना जाता है. राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और अन्य उच्च पदस्थ अतिथि इसी मार्ग से वाहन सहित मंदिर परिसर में प्रवेश करते हैं. ट्रस्ट की सिफारिश पर कई विशेष अतिथियों को भी इस गेट से प्रवेश की सुविधा दी जाती रही है. हालांकि सभी गेटों पर सुरक्षा जांच होती है लेकिन वीवीआईपी मार्ग की व्यवस्था अन्य प्रवेश द्वारों से अलग मानी जाती है.
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