अयोध्या राम मंदिर: अयोध्या के चर्चित चंदा चोरी मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है वैसे-वैसे नए खुलासे हो रहे हैं. जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक गिरफ्तार किए गए आरोपियों को मंदिर में आए चंदे की गिनती करने के लिए नहीं रखा गया था. उनका काम केवल दान पात्रों से निकले नोटों को सीधा करना, कटे-फटे नोटों को अलग करना और उन्हें व्यवस्थित करके मशीनों में डालने लायक बनाना था. ऐसे में अब जांच का फोकस इस बात पर है कि चोरी आखिर किस चरण में हुई.
नोट गिनने का नहीं था आरोपियों का काम
सूत्रों के अनुसार गिरफ्तार सभी आरोपी थर्ड पार्टी के जरिए नियुक्त किए गए आउटसोर्स कर्मचारी थे. इनका मुख्य काम श्रद्धालुओं द्वारा मोड़कर डाले गए नोटों को सीधा करना और उन्हें व्यवस्थित तरीके से अलग-अलग रखना था. आरोपियों को न तो सीधे ट्रस्ट ने नियुक्त किया था और न ही एसबीआई ने. उनकी भर्ती उस निजी कंपनी के माध्यम से हुई थी जिसे बैंक ने आउटसोर्सिंग के लिए अनुबंधित किया था.
मशीनों से होती थी पूरी प्रक्रिया
जांच में सामने आया है कि नोटों की वास्तविक गिनती मशीनों के जरिए की जाती थी. सबसे पहले करेंसी सॉर्टिंग मशीन नोटों को उनके रंग और डिजाइन के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर गड्डियां तैयार करती थी. इसके बाद दूसरी मशीन के जरिए इन गड्डियों में मौजूद नोटों की गिनती होती थी. इस पूरी प्रक्रिया में आरोपियों की भूमिका केवल नोटों को मशीन तक पहुंचाने से पहले व्यवस्थित करने तक सीमित थी.
पुलिस के रडार पर बैंक और ट्रस्ट से जुड़े लोग
मामले की जांच कर रही अयोध्या पुलिस अब उन लोगों की भूमिका भी खंगाल रही है जो पूरी प्रक्रिया की निगरानी और संचालन से जुड़े थे. सूत्रों के मुताबिक एसबीआई के पूर्व मैनेजर गोविंद जी मिश्र, जो फिलहाल लखनऊ में तैनात हैं, पुलिस के रडार पर हैं. उनसे जल्द पूछताछ की जा सकती है. इसके अलावा मंदिर में नोटों की गणना करने वाले बैंक कर्मचारियों के बयान भी अभी दर्ज नहीं किए गए हैं.
इस हफ्ते दर्ज हो सकते हैं अहम बयान
सूत्रों का कहना है कि बैंक और ट्रस्ट के बीच हुए एमओयू से जुड़े अनिल मिश्रा के बयान भी इसी सप्ताह दर्ज किए जा सकते हैं. बताया जा रहा है कि वह पूर्व बैंकर हैं और एक निजी कंपनी के माध्यम से आउटसोर्स आधार पर काम कर रहे थे. भर्ती प्रक्रिया, ड्रेस कोड और कर्मचारियों के चयन का जिम्मा भी उसी निजी कंपनी के पास था जिसे एसबीआई ने हायर किया था.
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