बारिश के बीच किसानों ने पूरे UP में रोकी ट्रेनें, कई जगह पुलिस को चकमा देकर पटरियों तक पहुंचे किसान

किसानों को रेलवे पटरियों तक पहुंचने से रोकने के लिए बड़े पैमाने पर फोर्स तैनात की गई. 14 संवेदनशील जिलों में इस मौके पर एक-एक वरिष्ठ आईपीएस अफसर की ड्यूटी लगाई गई.

लखनऊ:

संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर आंदोलनकारी किसानों ने आज पूरे उत्तर प्रदेश में जगह-जगह ट्रेनें रोकीं. बारिश के बावजूद किसानों का आंदोलन जारी रहा. किसानों को रेलवे पटरियों तक पहुंचने से रोकने के लिए बड़े पैमाने पर फोर्स तैनात की गई. 14 संवेदनशील जिलों में इस मौके पर एक-एक वरिष्ठ आईपीएस अफसर की ड्यूटी लगाई गई.  बुलंदशहर के खुर्जा जंक्शन पर बारिश के बीच बड़ी तादाद में किसान पहुंचे और लखनऊ से दिल्ली जा रही गोमती एक्सप्रेस रोक ली. हालांकि, किसानों को रेल लाइन तक पहुंचने से रोकने के लिए बड़ी तादाद में फोर्स तैनात थी. लेकिन उनको चकमा देकर किसान रेलवे पटरियों पर पहुंच ही गए. किसानों के विरोध को देखकर कर मुसाफिरों ने ट्रेन की खिड़की-दरवाजे बंद कर दिए. बाद में पुलिस ने किसानों को हटाकर ट्रेन को रवाना किया. 

बुलंदशहर, बीकेयू के पूर्व जिलाध्यक्ष बब्बन चौधरी ने बताया, 'बहुत बड़ी संख्या में किसान अपने घरों से निकले. बारिश का भी खौफ नहीं किया और यहां रेलवे पटरियों पर किसान बैठे और ट्रेनों को रोका. जो चार बजे तक प्रोग्राम था, उसको थोड़ा छोटा कर दिया गया. यहां बिजली की लाइने हैं कहीं बारिश की वजह से कोई हादसा ना हो जाए, इस वजह से घंटे भर पहले समाप्त कर दिया गया.'

बांदा में रेलवे पटरियों पर बैठे किसान गृह राज्य मंत्री को बर्खास्त करने के नारे लगाते रहे. लखीमपुर खीरी में किसानों को कुचलकर मारने की वारदात से किसानों में नाराजगी है. किसान यहां भी पुलिस को चकमा देकर पटरियों पर आ गए, बाद में उन्हें हटाया गया.

बुंदेलखंड किसान यूनियन के अध्यक्ष विमल शर्मा ने बताया, 'हमारी मांग है कि गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी को तुरंत बर्खास्त किया जाए और जेल भेजा जाए. वरना यह आंदोलन लगातार चलता रहेगा. और जैसा भी संयुक्त किसान मोर्चा का आंदोलन होगा. हम लोग बुंदेलखंड के किसान उस आंदोलन में बराबर भागीदार रहेंगे.'

हापुड़ में किसानों ने ट्रेन रोकी. हापुड़ के गढ़मुक्तेश्वर स्टेशन पर पहुंचने से किसानों को रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेडे्स लगा रखे थे. लेकिन किसान उन बैरिकेड्स से कूदते-फांदते रेलवे पटरियों पर पहुंच गए और धरना दिया. बाद में पुलिस ने उन्हें हटाया.

हापुड़ के किसान नेता दिशेष खेड़ा ने बताया, 'जो काले कानून इन्होंने बनाए हैं. उन्हें वापस नहीं ले रहे हैं. किसान बराबर दिल्ली की सीमाओं पर पड़ा है. लगभग 700 से ज्यादा किसान वहां शहीद हो गए. हमने सर्दी भी झेल ली, गर्मी भी झेल ली, बारिश भी झेल ली और आंधी भी झेल ली. सारे मौसम वहां झेल लिए. सरकार सुनने को तैयार नहीं है.'

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लखीमपुर हिंसा के विरोध में 'रेल रोको आंदोलन', कई जगह ट्रैक पर बैठे किसान