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नोएडा की फैक्ट्रियों में 2 शिफ्ट में काम, नहीं मिलेगा ओवरटाइम, क्या फायदा क्या नुकसान?

Major Shift in Noida Factories, No More Overtime: नोएडा एंटरप्रिनियोर्स एसोसिएशन (NEA) के उपाध्यक्ष सुधीर श्रीवास्तव ने कहा कि हम कम रेट में प्रोडक्ट उपलब्ध करवाते हैं. मिनिमम वेजेस बढ़ा है, प्रोडक्ट की कॉस्ट भी बढ़ेगी. इसे बैलेंस करने के लिए हमने 4 घंटे के ओवरटाइम की जगह 8 घंटे की नई शिफ्ट शुरू करने का निर्णय लिया है. 24 अप्रैल को हम UP CM योगी आदित्यनाथ से भी मिलने जा रहे हैं.

नोएडा की फैक्ट्रियों में 2 शिफ्ट में काम, नहीं मिलेगा ओवरटाइम, क्या फायदा क्या नुकसान?
Noida factories Implement 2-Shift System from May 1 Overtime End. (AI Photo)

Noida factories Implement 2-Shift System from 1 May 2026: नोएडा की औद्योगिक इकाइयों में 1 मई 2026 से दो शिफ्ट में काम होगा. ज्यादातर इकाइयों के उद्यमियों ने श्रमिक आंदोलन के बाद हाईपॉवर कमेटी के फैसलों से बचने के लिए इस सिस्टम को लागू करने का निर्णय किया है. इससे ओवरटाइम की व्यवस्था पूरी तरह खत्म हो जाएगी, जिससे उद्यमियों पर अधिक खर्च का दबाव नहीं बढ़ेगा. आइए, विस्तार से जानते हैं यह निर्णय क्यों लिया गया, दो शिफ्ट में किस तरह काम होगा?  

दरअसल, 13 अप्रैल नोएडा के औद्योगिक सेक्टरों में को वेतनवृद्धि और ओवर टाइम का डबल पैसा देने की मांग को लेकर श्रमिकों ने बड़ा प्रदर्शन किया था जो कई जगह उग्र हो गया था. श्रमिक आंदोलन के बाद हाईपॉवर कमेटी बनाई गई, जिसने न्यूनतम मजदूरी (Minimum Wages) बढ़ाने के साथ ही श्रमिकों को ओवर टाइम का डबल पैसा देने का फैसला लिया. अब उद्यमियों ने श्रमिकों से दो शिफ्ट में काम कराने जैसा बड़ा फैसला लिया है. इस फैसले से औद्योगिक इकाइयां ओवरटाइम के डबल खर्च से बच जाएंगी. 

सुबह 6 और दोपहर 2 बजे से रहेगी शिफ्ट 

नई व्यवस्था के तहत श्रमिकों की पहली शिफ्ट सुबह 6 बजे से दोपहर 2 बजे तक और दूसरी दोपहर 2 से रात 10 बजे तक चलेगी. श्रमिकों के पास ओवरटाइम का कोई विकल्प नहीं रहेगा. इस फैसले को लेकर उद्यमियों का कहना है कि इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. पहले जहां 4 घंटे का ओवरटाइम दिया जाता था, अब उसकी जगह 8 घंटे की नई शिफ्ट होगी, जिसके लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की भर्ती की जा रही है.  

कॉस्ट बैलेंस करने के लिए लिया गया फैसला

नोएडा एंटरप्रिनियोर्स एसोसिएशन (NEA) के उपाध्यक्ष सुधीर श्रीवास्तव ने फैसले को लेकर कहा कि भारत मैन्युफैक्चरिंग हब बन रहा है, हम कम रेट में प्रोडक्ट उपलब्ध करवाते हैं. मिनिमम वेजेस  (न्यूनतम मजदूरी ) बढ़ा है, इससे इनपुट कॉस्ट बढ़ेगी तो प्रोडक्ट की कॉस्ट भी बढ़ेगी. इसे बैलेंस करने के लिए हमने 4 घंटे के ओवरटाइम की जगह 8 घंटे की नई शिफ्ट शुरू करने का निर्णय लिया है. कई कंपनियों ने इसे चालू कर दिया है और कई  कई कंपनियों में भर्ती शुरू हो गई है. जैसे ही मैनपावर आएगा आएगा, हम डबल शिफ्ट में जाएंगे. हम 24 अप्रैल को सीएम योगी आदित्यनाथ से मिलने के लिए लखनऊ भी जा रहे हैं.  

16 घंटे काम कराने की योजना की जा रही तैयार 

सुधीर श्रीवास्तव ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत कई औद्योगिक इकाइयां 16 घंटे काम कराने की योजना तैयार कर रही हैं. इसमें बिजली आपूर्ति, जनरेटर  (DG सेट) के उपयोग और उससे जुड़ी लागत का आकलन किया जा रहा है, जिससे उत्पादन पर असर न पड़े. इस बदलाव की जानकारी औद्योगिक संगठनों और इकाइयों को लगातार दी जा रही है, जिससे 1 मई 2026 से नई व्यवस्था को लागू किया जा सके. 

जानें क्या फायदा, क्या नुकसान?

इस पूरी कवायद में फायदा यह होगा कि हजारों लोगों के लिए रोजगार के अवसर खुलेंगे. वहीं, नुकसान उन श्रमिकों होगा जो ज्यादा इनकम के लिए ओवरटाइम करते थे. ओवरटाइम खत्म होने से उनकी इनकम कम हो जाएगी, उन्हें सिर्फ तन्खा से ही गुजारा करना पड़ेगा.   

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