- मायावती ने अखिलेश यादव के 'चवन्नी' वाले बयान पर निशाना साधा है.
- उन्होंने अखिलेश यादव से पूरे जाट समाज से माफी मांगने की बात कही है.
- मायावती ने जयंत चौधरी का समर्थन करते हुए सपा को अति-अहंकारी पार्टी बताया है.
समाजवादी पार्टी के प्रमुख और यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव के एक बयान से उत्तर प्रदेश की सियासत गर्माती नजर आ रही है. उन्होंने राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी को लेकर 'चवन्नी को रुपया बना दिया' बयान दिया था. इस मामले में बसपा चीफ और सूबे की पूर्व मु्ख्यमंत्री मायावती खुलकर जयंत चौधरी के समर्थन में आ गई हैं. उन्होंने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए तुरंत पूरे जाट समाज से माफी मांगने की बात कही है. मायावती ने अखिलेश यादव के इस बयान को अहंकारी और अलोकतांत्रिक बताया गया है. इस मुद्दे पर यूपी की सियासत गर्माती दिख रही है.
पूरे जाट समाज से माफी मांगें अखिलेश यादव: मायावती
बसपा चीफ मायावती ने अखिलेश यादव को लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा 'जैसा कि सर्वविदित है कि समाजवादी पार्टी प्रमुख की तरफ से अपनी पुरानी सहयोगी पार्टी राष्ट्रीय लोकदल और उस पार्टी के नेता केंद्रीय मंत्री के बारे में यह सार्वजनिक बयान देना कि 'हमने इनको चवन्नी से रुपया बना दिया है'. यह कहना पूरी तरह से अमर्यादित, अशोभनीय और अति-शर्मनाक है. इस प्रकार की अहंकारी व अलोकतांत्रिक बयानबाजी के लिये उन्हें उस पार्टी से व उनके नेता से ही नहीं बल्कि स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह के परिवार का अपमान करने हेतु पूरे जाट समाज से भी तुरंत माफी मांगनी चाहिए तो यह उचित होगा.
'भाजपा फायदा उठाती है'
मायावती ने लिखा वैसे देश की राजनीति में सपा का चाल, चरित्र व चेहरा अपने विरोधी पार्टियों के लिये ही नहीं बल्कि अपने सहयोगियों के लिये भी हमेशा से राजनीतिक संकीर्णता व जातिवादी द्वेष आदि से ग्रसित ज्यादातर अप्रिय और अविश्वसनीय ही रहा है, जिस कारण इसका राजनीतिक एवं चुनावी लाभ भी अक्सर मौकों पर भाजपा ही उठाती रही है और सेक्युलर ताकतें कमजोर होती रहीं हैं.'
मायावती ने फिर उठाया गेस्ट हाउस कांड
मायावती ने लिखा 'इस पार्टी के इसी प्रकार के अति-अहंकारी स्वभाव के कारण पहले सन 1993 में उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव के साथ सपा और बसपा का बना गठबंधन जल्दी ही टूट गया था. जिसके फलस्वरूप 2 जून 1995 को मेरी हत्या करने के षड़यंत्र के तहत मेरे खिलाफ कुख्यात लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस कांड हुआ.फिर आगे चलकर इनके बेटे अखिलेश यादव की तरफ से इनके पिता की तरह पुरानी गलतियों को फिर से ना दोहराने का आश्वासन देते हुए, लोकसभा का चुनावी गठबंधन हुआ जो चुनाव का नतीजा इनके अनुरूप ना आने की वजह से कुछ समय के बाद ही बसपा के प्रति इनके अहंकारी व स्वार्थी आदि रवैये के कारण फिर यह गठबंधन भी टूट गया, क्योंकि परमपूज्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के आत्म-सम्मान व स्वाभिमान के कारवां वाली पार्टी बसपा व उसकी नेतृत्व 'सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय' की सर्वसमाज हितैषी अंबेडकरवादी नीतियों व सिद्धांतों से कदापि विमुख नहीं हो सकती है.
बसप सुप्रीमो ने लिखा अब संक्षेप में यही कहना है कि यह पार्टी (सपा) गठबंधन के मामले में केवल अपना काम निकालना जानती है. अपना काम निकलते ही फिर यह पार्टी गिरगिट की तरह अपना रंग बदल लेती है तथा दूसरी पार्टी के बारे में अनाप-शनाप भाषा का भी खूब इस्तेमाल करती रहती है, जो कि सपा का पुराना रवैया है. ऐसे में सर्वसमाज के लोग सपा की संकीर्ण व जातिवादी राजनीति से जरूर सावधान रहें.
अखिलेश के पीडीए पर भी साधा निशाना
मायावती ने अखिलेश यादव के पीडीए पर भी निशाना साधा है. उन्होंने लिखा 'इसके साथ ही, यह बात भी जग-जाहिर है कि सपा मुखिया अखिलेश यादव अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए अपने पीडीए में से पी को कभी पिछड़ा वर्ग, तो कभी पी को पंडितों का हितकारी बता देते हैं, जबकि इनके बारे में सच्चाई तो यह है कि वे पिछड़े वर्गों में अपनी खुद की जाति के अलावा बाकी पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों तथा अपर कास्ट समाज में से खासकर ब्राह्मण समाज के भी कतई हितैषी नहीं रहे हैं.'
'इतना ही नहीं, बल्कि इस पार्टी (सपा) की सभी रही सरकारों में दलितों, पिछड़ों, अकलियतों और अपरकास्ट समाज में से विशेषकर ब्राह्मण समाज का भी काफी शोषण व उत्पीड़न आदि किया गया है. ना ही इनके हितों में कोई भी सकारात्मक कदम उठाए गए हैं, बल्कि इनकी सरकार में वास्तव में केवल गुंडों, बदमाशों, माफियाओं व अन्य अराजक तत्वों का ही भला हुआ है और साथ ही इनकी सरकार में दिन-छिपने के बाद हमारी बहन-बेटियां भी घर से बाहर नहीं निकल सकती थीं. ऐसे में सर्वसमाज के लोग उत्तर प्रदेश आगामी विधानसभा आम चुनाव में इस पार्टी (सपा) को सत्ता में कतई भी ना आने दें, जो उनके हित में होगा.'
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