- पूरे देश में धूमधाम से मनाई जा रही है कार्तिक पूर्णिमा
- कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है
- आज काशी के घाटों पर अद्भुत नजारा देखने को मिला
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वाराणसी:
कार्तिक पूर्णिमा (kartik Purnima 2018) आज यानी शुक्रवार को पूरे देश में धूमधाम से मनाई जा रही है. कार्तिक पूर्णिमा (kartik Purnima) को त्रिपुरी पूर्णिमा या गंगा स्नान के नाम से भी जाना जाता है. आज के दिन वाराणसी (Varanasi) के घाटों पर आस्था और श्रद्धा का अभूतपूर्व नज़ारा देखने को मिला. काशी के पावन घाटों पर शुक्रवार सुबह से ही लाखों की संख्या में दूर-दराज से आये श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए पहुंचे. बता दें कि कार्तिक मास की पूर्णिमा पर गंगा स्नान का विशेष महत्व है.

सूर्य की पहली किरण के साथ हर कोई मां गंगा में डुबकी लगा कर पुण्य कमाना चाहता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आज का दिन विशेष फल दायक है.

पर्वों की नगरी वाराणसी में हर त्योहार का एक विशेष महत्व रहा है और स्कन्द पुराण की मानें तो आज के दिन स्वर्ग से देवतागण पृथ्वी पर आते हैं. इसलिए काशी में मां गंगा में स्नान और पूजन करने से शिव के संग भगवान् विष्णु भी प्रसन्न होते हैं.

आज के इस पावन अवसर पर गंगा स्नान से भोग और मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है. भक्तों की भारी भीड़ इस विश्वास के साथ ही यहां आई है.

कार्तिक पूर्णिमा का महत्व (Kartik Purnima Importance)
कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा (Tripura Purnima) और गंगा स्नान की पूर्णिमा (Ganga Snan Purnima) भी कहते हैं. मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव ने राक्षस त्रिपुरासुर का वध किया था. इसी वजह से इसे त्रिपुरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है. इसी के साथ कार्तिक पूर्णिमा की शाम भगवान विष्णु का मत्स्य अवतार उत्पन्न हुआ था. साथ ही कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान करना बेहद शुभ माना जाता है. मान्यता है कि गंगा स्नान के बाद किनारे दीपदान करने से दस यज्ञों के बराबर पुण्य मिलता है.

सूर्य की पहली किरण के साथ हर कोई मां गंगा में डुबकी लगा कर पुण्य कमाना चाहता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आज का दिन विशेष फल दायक है.

पर्वों की नगरी वाराणसी में हर त्योहार का एक विशेष महत्व रहा है और स्कन्द पुराण की मानें तो आज के दिन स्वर्ग से देवतागण पृथ्वी पर आते हैं. इसलिए काशी में मां गंगा में स्नान और पूजन करने से शिव के संग भगवान् विष्णु भी प्रसन्न होते हैं.

आज के इस पावन अवसर पर गंगा स्नान से भोग और मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है. भक्तों की भारी भीड़ इस विश्वास के साथ ही यहां आई है.

कार्तिक पूर्णिमा का महत्व (Kartik Purnima Importance)
कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा (Tripura Purnima) और गंगा स्नान की पूर्णिमा (Ganga Snan Purnima) भी कहते हैं. मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव ने राक्षस त्रिपुरासुर का वध किया था. इसी वजह से इसे त्रिपुरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है. इसी के साथ कार्तिक पूर्णिमा की शाम भगवान विष्णु का मत्स्य अवतार उत्पन्न हुआ था. साथ ही कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान करना बेहद शुभ माना जाता है. मान्यता है कि गंगा स्नान के बाद किनारे दीपदान करने से दस यज्ञों के बराबर पुण्य मिलता है.
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