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दूरदर्शन के इस शो ने 90s में रच दिया था इतिहास, एक हफ्ते में आईं 14 लाख चिट्ठियां, हालात ऐसे कि टेंपो करना पड़ा था किराये पर

90 के दशक में ‘सुरभि’ शो के लिए दर्शकों की दीवानगी इस हद तक पहुंच गई कि एक हफ्ते में 14 लाख पोस्टकार्ड आ गए और रिकॉर्ड बन गया.

दूरदर्शन के इस शो ने 90s में रच दिया था इतिहास, एक हफ्ते में आईं 14 लाख चिट्ठियां, हालात ऐसे कि टेंपो करना पड़ा था किराये पर
90 के दशक में दूरदर्शन पर पॉपुलर था ये शो

आज सोशल मीडिया के जमाने में किसी शो की पॉपुलैरिटी लाइक, शेयर और कमेंट से मापी जाती है, लेकिन 90 के दशक में कहानी बिल्कुल अलग थी. उस समय दर्शकों का प्यार कागज पर उतरता था और पोस्टकार्ड के जरिए टीवी तक पहुंचता था. लोग अपने पसंदीदा शो में नाम दिखाने के लिए उत्साह से चिट्ठियां भेजते थे. उसी दौर में एक ऐसा शो आया, जिसने दर्शकों की दीवानगी का ऐसा रिकॉर्ड बनाया, जिसे आज भी याद किया जाता है. हम बात कर रहे हैं सुरभि की, जिसे सिद्धार्थ काक और रेणुका शहाणे होस्ट करते थे. एक इंटरव्यू में सिद्धार्थ काक ने बताया कि शुरुआत में शो को सामान्य रिस्पॉन्स मिला. पहले कुछ महीनों में सिर्फ 10 से 200 तक चिट्ठियां आती थीं. लेकिन धीरे-धीरे ये संख्या तेजी से बढ़ने लगी.

हर हफ्ते हजारों से लाखों तक पहुंची चिट्ठिया

कुछ ही समय में हालात ऐसे हो गए कि हर हफ्ते करीब पांच हजार पोस्टकार्ड आने लगे. टीम के लिए हर चिट्ठी पढ़ना मुश्किल हो गया. इसके बाद दर्शकों से अपील की गई कि वे सिर्फ एक पोस्टकार्ड भेजें. लेकिन दर्शकों का प्यार कहां रुकने वाला था. एक हफ्ते में करीब 14 लाख पोस्टकार्ड पहुंच गए, जो अपने आप में एक बड़ा रिकॉर्ड बन गया.

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रिकॉर्ड बना और बढ़ानी पड़ी कीमत

इतनी भारी संख्या में चिट्ठियां आने के कारण शो का नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हो गया. उस समय एक पोस्टकार्ड की कीमत करीब 15 पैसे थी, जिस पर सरकार सब्सिडी देती थी. लेकिन जब पोस्टकार्ड की मांग अचानक बढ़ी, तो कीमत बढ़ाने तक की नौबत आ गई.

पोस्ट ऑफिस भी हुआ परेशान, टेंपो से आई चिट्ठियां

स्थिति इतनी ज्यादा बिगड़ गई कि पोस्ट ऑफिस में चिट्ठियां रखने की जगह कम पड़ गई. अंधेरी पोस्ट ऑफिस से फोन आया कि अब इन चिट्ठियों को संभालना मुश्किल हो रहा है. इसके बाद शो की टीम को खुद टेंपो लगाकर चिट्ठियां मंगवानी पड़ीं. सैकड़ों बैग सिर्फ पोस्टकार्ड से भरे हुए थे.

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