Kanpur Kidney Scandal Viral Driver Arrest: कानपुर पुलिस ने किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट में शामिल डॉक्टर अफजल के ड्राइवर परवेज सैफी को गिरफ्तार कर लिया है. ये वही सैफी है जिसका नोटों के साथ वीडियो वायरल हुआ था. पुलिस ने आरोपी सैफी के पास से लाखों रुपये भी वरामद किए हैं, जो इंसानी अंगों की खरीद-फरोख्त कर कमाए गए थे.
दरअसल, कानपुर किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट के खुलासे के बाद पुलिस और अन्य एजेंसियां मामले की जांच में जुटी हैं. रैकेड में शामिल डॉक्टरों और दलालों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है. हाल ही में सोशल मीडियो पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें डॉक्टर अफजल के ड्राइवर परवेज सैफी नोटों के ढेर के साथ शान से बैठा नजर आ रहा था. इसके बाद पुलिस ने उसकी तलाश और तेज की, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया.

Kanpur Kidney Racket: पुलिस गिरफ्तार में डॉ. अफजल का ड्राइवर परवेज सैफी.
पुलिस ने नौ लाख रुपये बरामद किए
बताया जा रहा है कि आरोपी ड्राइवर परवेज सैफी ने यह वीडियो कल्याणपुर के एक होटल में बनाया था. वीडियो में दिख रही रकम पारुल नामक की महिला के किडनी ऑपरेशन के बदले वसूली गई थी. पुलिस ने उसके पास से 9 लाख रुपये भी बरामद किए गए हैं. बता दें कि सैफी कोई नया अपराधी नहीं है. उस पर पहले से ही आधा दर्जन से ज्यादा केस दर्ज हैं.
500 के नोटों की गड्डियों के साथ दिखे कानपुर किडनी कांड के फरार आरोपी का सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है. आरोपी की तलाश में कई जिलों में लगातार दबिश दी जा रही है#Kanpur pic.twitter.com/bl1lp3c3Xf
— NDTV India (@ndtvindia) April 6, 2026
दिल्ली के बड़े अस्पताल का नाम आया सामने
इधर, कानपुर किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट की जांच कर रही पुलिस की टीम के हाथ एक ऑडियो क्लिप भी लगा है. यह ऑडियो किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट के मुख्य आरोपी शिवम अग्रवाल और दिल्ली में रहने वाले उसके दलाल नवीन पांडे के बीच का बताया जा रहा है. ऑडियो में किसी मरीज की मौत के मामले को मैनेज करने की योजना बनाई जा रही है. इस बातचीत में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि दोनों आरोपी दिल्ली के एक बड़े अस्पताल का भी जिक्र कर रहे हैं. जिससे जांच का दायरा अब दिल्ली के बड़े अस्पतालों तक पहुंचता दिख रहा है.
मरीजों की मौतों को भी मैनेज कर रहा था गिरोह
कानपुर पुलिस के अनुसार, यह ऑडियो शिवम अग्रवाल के मोबाइल फोन से बरामद किया गया है. जिससे यह भी साफ हो गया है कि यह गिरोह केवल अंगों की तस्करी ही नहीं कर रहा था, बल्कि ऑपरेशन के दौरान होने वाली मौतों, कानूनी अड़चनों को रसूख और पैसे के दम पर दबाने में भी माहिर था. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस रैकेट में कितने अस्पताल, कितने रसूखदार और कौन-कौन डॉक्टर शामिल हैं.
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