IPL Ticket Fraud: लखनऊ में चैट GPT और कोरल ड्रा की मदत से आईपीएल 2026 के फर्जी टिकट बेचने वाले अंतरराज्जीय गैंग को लखनऊ पुलिस ने इकाना स्टेडियम के बाहर से गिरफ्तार किया है. लखनऊ पुलिस ने छत्तीसगढ़ दुर्ग के रहने राजेंद्र चौधरी विश्वजीत साहू, श्रीकांत बोरकर, नूतन कुमार साहू को इस मामले में गिरफ्तार किया है. डीसीपी अमित कुमार आनंद ने बताया कि इसके पहले उन्होंने दिल्ली में भी स्टेडियम के बाहर फर्जी आईपीएल टिकट बेचने की कोशिश की थी.
चैट GPT और कोरल ड्रा से बनाते थे फर्जी टिकट
पकडे गए चारों आरोपी सोशल मीडिया से टिकट की फोटो लेकर चैट GPT से टिकट की साइज एडिट करके डिज़ाइन तैयार किया. पेपर क्वालिटी आदि की जानकारी लेकर कोरल ड्रा एप्लीकेशन से फर्जी आईपीएल की टिकट (Fake IPL Tickets) बनाई. लखनऊ के अलावा देश के अलग-अलग हिस्सों में इन्होंने स्टेडियम के बाहर जाकर टिकट बेचने का काम किया है. लखनऊ से पहले दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में भी फर्जी टिकट को बेचने का प्रयास कर चुके हैं, लेकिन क्वालिटी और बारकोड मैच नहीं मिले तो टिकट नहीं बिक पाए.
UPI से किया लेनदेन... इसलिए धरे गए
डीसीपी साउथ अमित कुमार आनंद ने बताया कि पकड़े गए चारों आरोपी छत्तीसगढ़ के निवासी हैं और उनके पास से लैपटॉप, आईपीएल के दर्जनों फर्जी टिकट, पास, पेपर कटर, पेपर शीट 3 एटीएम कार्ड 2 आधार कार्ड, 2 पैन कार्ड, पासबुक,एक कार बरामद हुए है. आरोपीय ने उरई के रहने वाले प्रदीप सिंह को ₹1000 में फर्जी आईपीएल का टिकट बेचा और यूपीआई से पेमेंट लिया. इसी यूपीआई ट्रांजैक्शन के बेस पर लखनऊ पुलिस ने इन्हें धर दबोचा.
इकाना के बाहर बनाया था जालसाजों ने फैन को शिकार
बीते दिनों लखनऊ के गाना स्टेडियम में हुए लखनऊ सुपर जॉइंट और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के मुकाबले को देखने के लिए दूर दराज से लोग आए हुए थे... दीवानगी विराट कोहली की थी. इसी का फायदा उठाते हुए जालसाज लखनऊ आए और इकाना के बाहर ही उरई के रहने वाले प्रदीप को इन्होंने अपना पहला शिकार बनाया और 1000 रुपये में फर्जी टिकट बेचे, जब प्रदीप टिकट चेक करने के लिए आगे बढ़े तो टिकट चेक करने वाली टीम ने उन्हें रोक दिया और टिकट के बारे में इंक्वारी की, जिसके बाद प्रदीप ने उन्हें जालसाजों के बारे में बताया, जिन्होंने उन्हे टिकट बेचा था.
लखनऊ पुलिस के मुताबिक, पकड़े गए चारों आरोपियों में से एक नूतन डिप्लोमा होल्डर है, जबकि दूसरा विश्वजीत इंटर पास है और यूट्यूब से उसमें फर्जी टिकट बनाने और डिजाइन का काम, 2/3 D डिजाइनिंग एलिवेशन का सीखा है. जबकि एक आरोपी और मास्टरमाइंड श्रीकांत बोरकर ग्रेजुएट है और कार वॉशिंग का काम करता है और डिजाइन करता है. चौथा और मुख्य सहयोगी राजेंद्र चौधरी वाशिंग का काम करता है.
हाई प्रोफाइल आईपीएल मैच में एक्टिव रहता था गैंग
श्रीकांत बोरकर और राजेंद्र चौधरी को कर वॉशिंग में ज्यादा मुनाफा नही हो रहा था और व्यवसाय को बढ़ाने के लिए पैसों की जरूरत थी, जिसके बाद उन्होंने आईपीएल सीजन आने पर जाल साजी का काम शुरू किया. ये गैंग ऑनलाइन और स्टेडियम के बाहर जाकर लोगों को अपने झांसे में लेता था हाई प्रोफाइल मैच में ही यह गैंग एक्टिव रहते थे. ताकि टिकट की मारामारी के बीच फर्जी टिकट आसानी से बिक जाए.
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