प्रवर्तन निदेशालय ने श्रवण्ती समूह के प्रमोटर डी.वी. राव और उनके सहयोगियों के खिलाफ चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच में बड़ा खुलासा किया है. जांच एजेंसी के मुताबिक, करीब 284 करोड़ रुपये का मनी लॉन्ड्रिंग मामला सामने आया है. इस मामले में डी.वी. राव, कंपनी के निदेशक डी. शांति किरण और डी.वी. राव के भाई डी. अवनिंद्र कुमार को गिरफ्तार किया गया है. विशेष अदालत ने तीनों को 12 मई 2026 तक ईडी की हिरासत में भेज दिया है.
फर्जी तरीके से लिया था लोन
यह पूरा मामला गुरुग्राम के सेक्टर-40 थाने में दर्ज केस से शुरू हुआ था. आरोप है कि DJW Electric Power Projects Private Limited नाम की कंपनी, जिसे डी.वी. राव नियंत्रित करते थे, ने अलग-अलग संस्थाओं से फर्जी तरीके से करोड़ों रुपये का लोन लिया. ईडी की जांच में सामने आया कि इस धोखाधड़ी में करीब 58 करोड़ रुपये का लोन शामिल था.
फर्जी कंपनियों की दी जाती थी खातों की जानकारी
जांच एजेंसी के मुताबिक आरोपियों ने बैंकिंग प्रणाली का बेहद सुनियोजित तरीके से दुरुपयोग किया. कंपनी के दस्तावेजों में दिखाया गया कि लोन वापस किए जा रहे हैं, लेकिन वास्तविकता में आरटीजीएस का गलत इस्तेमाल कर रकम कोलकाता स्थित फर्जी कंपनियों में भेजी जा रही थी. आरटीजीएस के दस्तावेजों में असली लोन देने वालों के नाम लिखे जाते थे, लेकिन बैंक खातों की जानकारी फर्जी कंपनियों की दी जाती थी. इस तरीके से पैसा Nexus International, Bhavtarini Sales Pvt. Ltd. और Gabel Trading Co. जैसी कंपनियों में पहुंचाया गया.
न कोई ऑफिस... न ही कोई कर्मचारी
ईडी की जांच आगे बढ़ी तो Sravanthi Energy Private Limited यानी एसईपीएल से जुड़ा एक और बड़ा मामला सामने आया. यह कंपनी भी डी.वी. राव के नियंत्रण में थी. जांच में पता चला कि एसईपीएल हर महीने करीब 75 लाख रुपये कंसल्टेशन फीस के नाम पर Verset Technologies Pvt. Ltd. नाम की एक फर्जी कंपनी को भेज रही थी. जांच में सामने आया कि इस कंपनी का न कोई ऑफिस था और न ही कोई कर्मचारी. यह कंपनी डी.वी. राव के ससुर के नाम पर रजिस्टर्ड थी. इस फर्जी व्यवस्था के जरिए करीब 89.36 करोड़ रुपये निकाल लिए गए.
139 करोड़ की नकली खरीद
इसके अलावा एसईपीएल ने 100 से ज्यादा फर्जी कंपनियों के जरिए 139 करोड़ रुपये से अधिक की नकली खरीद दिखाई. फर्जी बिल तैयार किए गए लेकिन वास्तव में कोई सामान या सेवा नहीं ली गई. ईडी का दावा है कि इन भुगतानों का पैसा बाद में नकद के रूप में डी.वी. राव और उनके परिवार तक वापस पहुंचता था. एसईपीएल मामले में कुल 228 करोड़ रुपये की अवैध कमाई सामने आई है.
बैंकिंग व्यवस्था को 1500 करोड़ का नुकसान
ईडी के मुताबिक डी.वी. राव पहले भी बैंकों का भारी कर्ज नहीं चुका पाए थे, जिसकी वजह से कंपनी एनपीए घोषित हो गई. इसके बाद बैंकों को मजबूरी में एकमुश्त समझौता करना पड़ा, जिससे बैंकिंग व्यवस्था को 1500 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ. जांच एजेंसी का कहना है कि एक तरफ कंपनी कर्ज में डूब रही थी, वहीं दूसरी तरफ डी.वी. राव लगातार कंपनी का पैसा निकालकर अपनी निजी संपत्ति बढ़ा रहे थे. इससे सिर्फ बैंक ही नहीं बल्कि कंपनी में निवेश करने वाले निवेशकों को भी भारी नुकसान हुआ. कई सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की भी कंपनी में हिस्सेदारी बताई जा रही है, इसलिए यह मामला सार्वजनिक हित से जुड़ा माना जा रहा है.
सोने, हीरे की ज्वेलरी समेत कई महंगी गाड़ियां जब्त
इससे पहले ईडी ने छापेमारी के दौरान डी.वी. राव और उनके परिवार से करीब 5 करोड़ रुपये की सोने और हीरे की ज्वेलरी और कई महंगी गाड़ियां जब्त की थीं. इसके बाद मनी लॉन्ड्रिंग के तहत करीब 24 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की गईं. इनमें 25 हजार वर्ग फुट से ज्यादा क्षेत्र में फैले पांच आलीशान मकान और आंध्र प्रदेश, तेलंगाना तथा कर्नाटक में फैली करीब 292 एकड़ जमीन शामिल है. ये संपत्तियां डी.वी. राव और उनके परिवार के नाम पर बताई गई हैं.
जांच से बचते रहे डी.वी. राव
ईडी का कहना है कि जांच के दौरान डी.वी. राव को कई बार समन भेजे गए, लेकिन वह लगातार जांच से बचते रहे और एजेंसी के सामने पेश नहीं हुए. इसके बाद अदालत ने उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया. ईडी ने डी.वी. राव के भाई डी. अवनिंद्र कुमार पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं. जांच एजेंसी के मुताबिक 2 अप्रैल 2026 को एक कारोबारी प्रीतिश कुमार झिंगन के यहां छापेमारी में 1 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए थे.
तीनों आरोपी ED की हिरासत में
पूछताछ में प्रीतिश झिंगन ने बताया कि यह रकम डी. अवनिंद्र कुमार ने भेजी थी और इसका इस्तेमाल कुछ लोगों को भुगतान करने और मामले को प्रभावित करने के लिए किया जाना था. ईडी का आरोप है कि डी.वी. राव अपने भाई के हैदराबाद स्थित घर में छिपे हुए थे, ताकि जांच से बच सकें. तीनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां न्यायालय ने माना कि मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप बेहद गंभीर हैं और मामले में गहन पूछताछ जरूरी है. इसी आधार पर अदालत ने तीनों आरोपियों को 12 मई 2026 तक ईडी की हिरासत में भेज दिया.
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