UP Cabinet Decisions: उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट ने कृषि शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए महर्षि महेश योगी अंतरराष्ट्रीय कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना को मंजूरी दे दी है. कानपुर जिले के बिल्हौर में स्थापित होने वाला यह विश्वविद्यालय आधुनिक कृषि तकनीक, वैज्ञानिक अनुसंधान, प्राकृतिक खेती और जैविक कृषि को बढ़ावा देने का प्रमुख केंद्र बनेगा. सरकार का मानना है कि इस संस्थान के शुरू होने से किसानों को नई तकनीकों की जानकारी मिलेगी और युवाओं के लिए कृषि शिक्षा तथा रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. साथ ही यह परियोजना महर्षि महेश योगी की जैविक और प्राकृतिक खेती संबंधी सोच को संस्थागत रूप देने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है.
बिल्हौर में बनेगा अंतरराष्ट्रीय कृषि विश्वविद्यालय
उत्तर प्रदेश कैबिनेट द्वारा मंजूरी मिलने के बाद कानपुर के बिल्हौर क्षेत्र में महर्षि महेश योगी अंतरराष्ट्रीय कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हो गया है. प्रस्तावित विश्वविद्यालय कृषि शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार का प्रमुख केंद्र होगा. यहां आधुनिक खेती, जैविक कृषि, प्राकृतिक खेती और कृषि विज्ञान से जुड़े विभिन्न विषयों पर अध्ययन और शोध कार्य किए जाएंगे.

UP Cabinet Meeting: योगी कैबिनेट से महर्षि महेश योगी अंतरराष्ट्रीय कृषि विश्वविद्यालय को मिली मंजूरी
किसानों को मिलेगा आधुनिक तकनीक का लाभ
विश्वविद्यालय का मुख्य उद्देश्य किसानों तक नई कृषि तकनीकों और वैज्ञानिक अनुसंधान के परिणामों को पहुंचाना होगा. संस्थान के उपाध्यक्ष राहुल भारद्वाज के अनुसार विश्वविद्यालय के माध्यम से किसानों को उन्नत कृषि तकनीक, वैज्ञानिक अनुसंधान और प्राकृतिक एवं जैविक खेती की आधुनिक पद्धतियों की जानकारी दी जाएगी. इससे खेती की लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिल सकती है.
युवाओं के लिए खुलेंगे नए अवसर
विश्वविद्यालय की स्थापना से क्षेत्र के विद्यार्थियों और युवाओं को भी फायदा मिलने की उम्मीद है. गवर्निंग बॉडी के सदस्य पंकज शर्मा के अनुसार यह संस्थान कृषि शिक्षा, शोध और नवाचार का उत्कृष्ट केंद्र बनेगा. यहां विद्यार्थियों को कृषि विज्ञान और संबंधित क्षेत्रों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के अवसर मिलेंगे, जिससे रोजगार और कौशल विकास को भी बढ़ावा मिलेगा.
जैविक खेती को मिलेगी नई दिशा
महर्षि संस्थान के अध्यक्ष अजय प्रकाश श्रीवास्तव ने इसे महर्षि महेश योगी के जैविक खेती संबंधी सपने को साकार करने वाला ऐतिहासिक निर्णय बताया है. उनका कहना है कि कृषि क्षेत्र में बदलते समय के साथ वैज्ञानिक और टिकाऊ खेती की जरूरत बढ़ रही है. ऐसे में यह विश्वविद्यालय जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाएगा.
कृषि अनुसंधान और नवाचार पर रहेगा जोर
विश्वविद्यालय में खेती से जुड़ी नई तकनीकों, जल संरक्षण, मिट्टी की गुणवत्ता, जैविक उत्पादन और टिकाऊ कृषि मॉडल पर शोध को प्राथमिकता दिए जाने की संभावना है. कृषि क्षेत्र में शोध आधारित विकास से किसानों की आय बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने में मदद मिल सकती है.
‘विकसित भारत-2047' के लक्ष्य को मिलेगा बल
संस्थान से जुड़े पदाधिकारी अजय प्रकाश श्रीवास्तव का मानना है कि यह विश्वविद्यालय कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ विकसित भारत-2047 के लक्ष्य में भी योगदान देगा. कृषि क्षेत्र में आधुनिक शिक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा मिलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल सकती है.
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