यूपी के बदायूं में गुरुवार को एचपीसीएल प्लांट में हुए खौफनाक डबल मर्डर से इलाके में दहशत है. सेंजनी गांव हुए इस हत्याकांड में कंपनी के मैनेजर और डिप्टी मैनेजर की हमलावर अजय प्रताप सिंह ने गोली मार हत्या कर दी थी. पुलिस ने एनकाउंटर में आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है. मामले में कई चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं. बताया जा रहा है कि आरोपी कई बार दोनों अफसरों को जान से मारने की धमकी दे चुका था. गांव में रसूख होने की वजह से उसका खौफ था. इसी डर की वजह से मृतक मैनेजर सुधीर गुप्ता नौकरी से वीआरएस ले लिया था. मृतक की कई बार शिकायत के बाद भी पुलिस ने कोई सख्त कार्रवाई नहीं की थी.
नोएडा निवासी डीजीएम सुधीर गुप्ता और पीलीभीत के डिप्टी जीएम हर्षित मिश्रा की सेंजनी गांव के ही रहने वाले अजय प्रताप सिंह ने गोली मारकर हत्या कर दी. सेंजनी गांव में ही एचपीसीएल के कम्प्रेस्ड बायोगैस प्लांट में आरोपी अजय प्रताप वहां प्लांट में पराली वेंडर था. लापरवाही के आरोप में करीब छह महीने पहले मैनेजर ने उसे ब्लैकलिस्ट कर दिया था. इसी बात की अजय प्रताप को खुन्नस थी. इतना ही उसके खौफ की वजह से उन्होंने वीआरएस की अर्जी दे रखी थी. और एक अप्रैल को वह नौकरी से मुक्त होने वाले थे.
सुधीर गुप्ता ने वीआरएस, डिप्टी मैनेजर ने मांगा था ट्रांसफर
वह लगातार दोनों अधिकारियों को धमकाता रहा. कभी उनकी गाड़ी रुकवाकर झगड़ा करता तो कभी प्लांट में घुसकर गाली-गलौज करता था. लगातार दबाव और तनाव के चलते सुधीर गुप्ता ने कंपनी से वीआरएस ले लिया था, जो स्वीकृत भी हो चुका था. वहीं, हर्षित मिश्रा ने कंपनी से अपना ट्रांसफर मांगा था, लेकिन वह नहीं हो पाया. बताया जा रहा है कि 31 मार्च तक वह घर लौटने की तैयारी में थे, लेकिन इससे पहले ही अजय प्रताप सिंह ने दोनों अफसरों की गोली मारकर हत्या कर दी. वहीं, सुधीर गुप्ता की जगह महाराष्ट्र के अकोला से मुकेश कुमार को एजीएम पद पर यहां ज्वाइन करना था, लेकिन प्लांट में हुए दोहरे हत्याकांड के बाद उन्होंने भी पदभार ग्रहण करने से मना कर दिया.

गांव में रसूख, पुलिस से नजदीकी; कौन है आरोपी अजय प्रताप सिंह?
आरोपी अजय प्रताप सिंह का गांव के रसूखदार परिवार से बताया जा रहा है. उसकी मां किरण देवी गांव की राशन डीलर हैं, जबकि चाचा राकेश सिंह ग्राम प्रधान हैं. परिवार का प्रभाव इसी से समझा जा सकता है कि उसका चचेरा भाई जिला पंचायत सदस्य रह चुका है और स्थानीय भाजपा नेताओं के करीब माना जाता है. गांव के बाहर उसकी करीब छह दुकानें बताई जाती हैं और परिवार के पास अच्छी-खासी जमीन भी है, जिससे गांव में उनका दबदबा माना जाता है.

आरोपी अजय प्रताप सिंह
सिर्फ 7 दिन में जेल से बाहर आ गया था आरोपी
इसी प्रभाव के चलते पुलिस भी सख्ती नहीं बरत रही थी. डीजीएम सुधीर गुप्ता ने चार फरवरी को अजय प्रताप के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था, लेकिन इसके बावजूद उसकी गिरफ्तारी नहीं हुई. बाद में डीएम और एसएसपी से शिकायत की, तब अजय प्रताप के खिलाफ केवल शांति भंग में कार्रवाई करते हुए उसे सात दिन के लिए जेल भेजा गया था. इसके बाद वह छूटकर बाहर आ गया और कुछ ही दिनों बाद दोहरे हत्याकांड को अंजाम दे डाला.
पुलिस वालों के साथ थानों में बैठा रहता था आरोपी
ग्रामीणों का कहना है कि अजय प्रताप अक्सर थानों में बैठता था और पुलिसकर्मियों के साथ उठना-बैठना भी था, जिसकी वजह से उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं हो रही थी. फिलहाल सोशल मीडिया पर उसकी एक हल्का दरोगा के साथ फोटो और वीडियो भी वायरल हो रहे हैं, जो पूरे मामले को लेकर कई सवाल खड़े कर रहे हैं.
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