- कुंभ मेले के दौरान अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे और दान की रकम में भारी चोरी की गई
- लवकुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा ने चोरी के पैसों से कई संपत्तियां खरीदीं, जिनकी पुलिस ने जानकारी जुटाई है
- पुलिस आयकर विभाग की मदद से आरोपियों के वित्तीय लेन-देन और संपत्तियों की गहन जांच की जा रही है
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में हर दिन नए-नए खुलासे हो रहे हैं. पुलिस जांच में पता चला है कि मंदिर में सबसे ज्यादा चोरी कब हुई और सबसे ज्यादा खजाना किसने और कैसे लूटा, टिन्नू और जीजा-साले की जोड़ी की इसमें क्या भूमिका रही. आरोपियों से पूछताछ के बाद पुलिस ने इस मामले में कई बड़े खुलासे किए हैं.
जांच में पचा चला है कि कुंभ मेले के दौरान राम मंदिर में सबसे ज्यादा चोरी की गई. गिरफ्तार किए गए 8 आरोपियों में से कुछ आरोपी कुंभ से पहले छोटी-मोटी चोरी करते थे. लेकिन कुंभ के दौरान मंदिर में चढ़ावे और दान की रकम में भारी बढ़ोतरी हुई. आरोपियों ने इसी बात का फायदा उठाया और मिलकर बड़ी चोरी को अंजाम दिया.
जीजा-साले की जोड़ी ने चुराई सबसे ज्यादा रकम
पुलिस का दावा है कि चोरी की पूरी साजिश सभी 8 आरोपियों ने मिलकर रची थी. जांच में सामने आया है कि जीजा-साले की जोड़ी लवकुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा ने सबसे ज्यादा रकम की चोरी की. चोरी के पैसों से सबसे ज्यादा संपत्तियां भी इसी जोड़ी ने खरीदीं. अब तक की जांच में दोनों से जुड़ी करीब आधा दर्जन से ज्यादा संपत्तियों की जानकारी पुलिस को मिली है.
इनकम टैक्स विभाग की मदद ले रही पुलिस
आरोपियों के वित्तीय लेन-देन और संपत्तियों की पूरी पड़ताल के लिए अयोध्या पुलिस आयकर विभाग की भी मदद ले रही है. जांच के दौरान एसबीआई के कुछ कर्मचारियों की भूमिका भी पुलिस के शक के दायरे में है. अयोध्या पुलिस इस मामले की जांच के लिए ईडी को भी पत्र लिखेगी, ताकि मनी ट्रेल और वित्तीय लेन-देन की गहराई से जांच हो सके. पुलिस ने बताया कि सबसे ज्यादा कैश अविनाश शुक्ला की निशानदेही पर बरामद हुआ है.
चढ़ावा चोरी के आरोपियों से 2 घंटे पूछताछ
पुलिस ने कोर्ट की अनुमति के बाद मंगलवार को जेल में बंद राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपियों से करीब दो घंटे पूछताछ की थी. सबसे लंबी पूछताछ आरोपी अविनाश मिश्रा से की गई. आरोपियों ने करोड़ों की चोरी स्वीकारते हुए पूरे घटनाक्रम के बारे में बताया. इस दौरान ट्रस्टी अनिल मिश्रा का नाम फिर सामने आया. बताया गया कि दान राशि की गिनती संबंधी प्रक्रिया में अनिल मिश्रा की प्रमुख भूमिका रहती थी.
टिन्नू यादव के पास रहती थी कमरे की चाबी
सूत्रों के अनुसार, पूछताछ में पता चला कि टिन्नू यादव के पास गिनती वाले कक्ष की चाबी रहती थी. दूसरी चाबी बैंक कर्मियों के पास होती थी. इन सभी की मिलीभगत से रकम पार की जाती थी. टिन्नू और बैंककर्मी चोरी की रकम में हिस्सा लेते थे. पुलिस की पूछताछ में यह भी सामने आया कि टिन्नू चोरी का मुख्य संरक्षक था. आरोपियों ने बताया कि टिन्नू की मिलीभगत होने से चोरी आसानी से होती थी. सवाल करने वाला कोई भी नहीं होता था. उनको पता था कि कैमरे कहां-कहां लगे हैं.
कैमरे से बचकर चोरी को अंजाम दिया जाता था. कैमरे की नजर से बचने के लिए एक आदमी रकम पार करता था और बाकी लोग उसे घेर लेते थे. फिर रकम बाथरूम में छिपाते थे और मौका पाकर बाहर ले जाते थे. ट्रस्ट के पदाधिकारियों के करीबी होने की वजह से उनकी कहीं पर कोई चेकिंग नहीं होती थी.
अनिल मिश्रा की भूमिका की हो रही जांच
जांच में पता चला है कि मंदिर में सबसे ज्यादा अनिल मिश्रा के सिफारिशी कर्मचारियों को काम पर रखा गया था. करीब सवा सौ कर्मचारियों ने अनिल मिश्रा के जरिए राम मंदिर में नौकरी हासिल की थी. चंपत राय और गोपाल राव के जरिए भी लोगों की भर्ती हुई थी. SIT अनिल मिश्रा पर लगे कमीशन के आरोपों की भी जांच कर रही है. सूत्रों की माने तो जांच के दौरान अनिल मिश्रा की कई संपत्तियों के बारे में भी पता चला है. SIT यह भी जांच कर रही है कि ट्रस्टी बनने के बाद उनकी कितनी संपत्ति बढ़ी है. SIT अपनी विस्तृत रिपोर्ट में अनिल मिश्रा की कमीशन की जांच की रिपोर्ट भी देगी. अनुकल्प मिश्रा और लव कुश मिश्रा की भूमिका भी इस खेल में काफी बड़ी है. ये दोनों भी अनिल मिश्रा के रिश्तेदार बताए जा रहे हैं.
चार बक्सों में कंबलों के अंदर छिपाया कैश
आरोपी अविनाश शुक्ला के कौशलपुरी के ठिकाने से सबसे ज्यादा कैश बरामद हुआ था. एनडीटीवी उसके इस ठिकाने पर पहुंचा, जो कि एक योगा सेंटर है. जिससे अविनाश शुक्ला का भाई अभिषेक जुड़ा हुआ था. योग सेंटर चलाने वाली सीमा तिवारी ने बताया कि 5 जून को यहां पर पुलिस आई थी और बड़ी मात्रा में कैश बरामद किया था. योग केंद्र में अभिषेक के चार बक्से रखे हैं इन्हीं बक्सों में कंबलों के अंदर कैश को छुपा कर रखा गया था.एक बक्से में राम राज्य कोष लिखा हुआ था.
सीमा तिवारी के मुताबिक जब अभिषेक से इस छापेमारी और कैसे के बारे में पूछा गया तो उसने बताया कि उसका भाई अविनाश शुक्ला नशे के कारोबार में है और इसीलिए यहां पर छापेमारी हुई है.
इन आरोपियों से घर से नकदी बरामद
बता दें कि अयोध्या पुलिस जांच के लिए तीन दिन पहले सभी आरोपियों के घर पहुंची थी. इस दौरान टिन्नू यादव के घर से नकदी बरामद हुई. सभी आरोपियों के घरों से बैंकिंग से जुड़ी जानकारी इकट्ठा की गई और उनकी चल-अचल संपत्ति का रिकॉर्ड हासिल भी लिया गया. चढ़ावा चोरी की जांच में आरोपियों के बैंक खातों में ऐसे लेन-देन का पता चला है जो उनकी इनकम से कहीं ज़्यादा थे.
साल भर के उनके खातों की जांच करने पर लेन-देन के ऐसे सबूत मिले, जिनमें शामिल रकम उनकी आमदनी या साधनों से बहुत ज्यादा थी. सबसे ज्यादा 89 लाख कैश आरोपी अविनाश शुक्ला की निशानदेही पर बरामत हुआ. ये पैसा FIR दर्ज होने से पहले ही ट्रस्ट ने अपने स्तर पर बरामद किया था.
6 जुलाई को राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक
राम मंदिर ट्रस्ट के दो सदस्यों के इस्तीफे के बाद, ट्रस्ट के अगले एक्शन पर चर्चा के लिए 6 जुलाई को बैठक हो सकती है. VHP प्रमुख आलोक कुमार ने पहले PTI को बताया था कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक 7 जुलाई को होगी, लेकिन सूत्रों के मुताबिक, बैठक एक दिन पहले हो सकती है.
चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर चर्चा
ट्रस्ट के जनरल सेक्रेटरी चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं. बैठक में इन इस्तीफों पर चर्चा होगी और सूत्रों के मुताबिक, इन इस्तीफों को मंजूर किया जा सकता है. बता दें कि इस ट्रस्ट का गठन 2020 में अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राम मंदिर निर्माण और मैनेजमेंट के लिए किया गया था. अगर दोनों ट्रस्टियों के इस्तीफे मंजूर हो गए तो ट्रस्ट में तीन पद खाली हो जाएंगे. एक पद बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्राके निधन के बाग करीब एक साल से खाली है.
ये भी पढ़ें-15 दिन की डेडलाइन हुई पूरी, आखिर राम मंदिर मामले में SIT कब देगी फाइनल रिपोर्ट?
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं