भारत में हर साल एक जुलाई को राष्ट्रीय चार्टर्ड अकाउंटेंट दिवस (सीए-डे) मनाया जाता है. दरअसल इसी दिन 1949 में इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया की स्थापना की गई थी. इसी उपलक्ष्य में यह दिन मनाया जाता है. यह उस व्यवस्था का भी सम्मान है जो देश की आर्थिक विश्वसनीयता, पारदर्शिता और जवाबदेही की आधारशिला है. भारत की अर्थव्यवस्था जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, उतनी ही महत्वपूर्ण भूमिका उन चार्टर्ड एकाउंटेंट्स की होती जा रही है जो कॉर्पोरेट जगत के वित्तीय प्रहरी बनकर व्यवस्था में विश्वास बनाए रखते हैं. विकसित भारत 2047 की परिकल्पना केवल उद्योगों, निवेश और उत्पादन से साकार नहीं होगी, इसके लिए एक ऐसी वित्तीय व्यवस्था भी जरूरी है जो ईमानदार, पारदर्शी, तकनीक-संचालित और वैश्विक मानकों के अनुरूप हो. इस पूरी व्यवस्था के केंद्र में चार्टर्ड एकाउंटेंट्स खड़े हैं.
क्या काम करते हैं सीए
एक सामान्य नागरिक जिस प्रकार अपने अधिकारों और कर्तव्यों के साथ राष्ट्र निर्माण में भागीदार होता है, उसी प्रकार कंपनियां भी आर्थिक व्यवस्था की 'कॉर्पोरेट नागरिक' हैं. इन कॉर्पोरेट नागरिकों की वित्तीय सच्चाई, उनके लेखों की विश्वसनीयता और कानूनों के प्रति उनकी जवाबदेही सुनिश्चित करने का उत्तरदायित्व चार्टर्ड एकाउंटेंट्स निभाते हैं. वे केवल बैलेंस शीट तैयार करने वाले विशेषज्ञ नहीं हैं, बल्कि कंपनी कानून, अकाउंटिंग मानकों और वित्तीय अनुशासन के ऐसे स्वतंत्र प्रहरी हैं जो निवेशकों, बैंकों, सरकार और समाज सबके के हितों की रक्षा करते हैं. एक प्रकार से वे कॉर्पोरेट जगत के लोकपाल हैं, जिनकी निष्पक्षता पर पूरे वित्तीय तंत्र का भरोसा टिका रहता है.
पिछले एक दशक में भारत ने आर्थिक और कर सुधारों के क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन देखे हैं. वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का देशव्यापी कार्यान्वयन हो, फेसलेस असेसमेंट जैसी पारदर्शी कर व्यवस्था हो या फिर डिजिटल टैक्स प्रशासन, इन सभी सुधारों को धरातल पर सफल बनाने में चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ने सरकार और उद्योग जगत के बीच एक प्रभावी सेतु की भूमिका निभाई है. करोड़ों करदाताओं और लाखों उद्यमों को नई व्यवस्था के अनुरूप तैयार करना, उन्हें नियमों की जानकारी देना और अनुपालन सुनिश्चित करना किसी भी दृष्टि से आसान कार्य नहीं था. यदि आज भारत का जीएसटी मॉडल दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल टैक्स नेटवर्कों में गिना जाता है, तो उसमें चार्टर्ड एकाउंटेंट्स के पेशेवर कौशल और क्षमता निर्माण का भी महत्वपूर्ण योगदान है.
निवेशकों के विश्वास की रक्षा कौन करता है
इसी प्रकार इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) ने भारतीय बैंकिंग और कॉर्पोरेट क्षेत्र में एक नई कार्य संस्कृति स्थापित की है. वित्तीय अनुशासन, समयबद्ध समाधान और जवाबदेही को मजबूत करने वाले इस सुधार में भी चार्टर्ड एकाउंटेंट्स की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है. कंपनियों के वित्तीय अभिलेखों का स्वतंत्र प्रमाणीकरण, परिसंपत्तियों का यथार्थ मूल्यांकन और पारदर्शी प्रक्रियाओं का पालन, ये सभी ऐसे काम हैं जिनके बिना किसी भी आर्थिक सुधार की सफलता अधूरी रहती.
आर्थिक विकास की सबसे बड़ी आवश्यकता पूंजी निर्माण है. जब एक सामान्य नागरिक अपने जीवनभर की बचत पूंजी बाजार में निवेश करता है, तब उसका सबसे बड़ा आधार विश्वास होता है. यह विश्वास तभी बनता है जब कंपनियों के वित्तीय विवरण सही, प्रमाणित और पारदर्शी हों. चार्टर्ड एकाउंटेंट्स इसी विश्वास की रक्षा करते हैं. वे सुनिश्चित करते हैं कि निवेशकों का धन सही कंपनियों तक पहुंचे, वित्तीय सूचनाएं वास्तविक हों और पूंजी बाजार की विश्वसनीयता बनी रहे. यही कारण है कि किसी भी विकसित अर्थव्यवस्था की मजबूती उसके वित्तीय संस्थानों के साथ-साथ उसके अकाउंटिंग और ऑडिटिंग ढांचे पर भी निर्भर करती है.
चार्टर्ड एकाउंटेंसी का बदलता स्वरूप कैसा है
आज भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है. ऐसे समय में वैश्विक निवेश आकर्षित करने के लिए केवल आर्थिक विकास दर पर्याप्त नहीं होती, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के वित्तीय मानकों का पालन भी उतना ही आवश्यक होता है. पांच लाख पचास हजार से अधिक सदस्यों वाली दुनिया की सबसे बड़ी प्रोफेशनल संस्था के रूप में भारतीय चार्टर्ड एकाउंटेंट्स यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि देश की कंपनियां वैश्विक अकाउंटिंग मानकों के अनुरूप काम करें, कॉर्पोरेट गवर्नेंस को मजबूत करें और ESG (पर्यावरण, सामाजिक और सुशासन) जैसे उभरते वैश्विक मानकों का प्रभावी अनुपालन करें. भविष्य का निवेश केवल लाभ नहीं देखेगा, बल्कि यह भी देखेगा कि कोई कंपनी पर्यावरण, समाज और सुशासन के प्रति कितनी जिम्मेदार है. इस परिवर्तन में भी चार्टर्ड एकाउंटेंट्स की भूमिका निर्णायक बनने जा रही है.
डिजिटल भारत के इस युग में तकनीक ने चार्टर्ड एकाउंटेंसी के स्वरूप को भी बदल दिया है. जीएसटी नेटवर्क, फेसलेस असेसमेंट, डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन कारोबारी लेनदेन के कारण अभूतपूर्व मात्रा में डेटा उपलब्ध हो रहा है. अब केवल लेखा-जोखा तैयार करना पर्याप्त नहीं है; इस डेटा का विश्लेषण करना, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डेटा एनालिटिक्स के माध्यम से ऑडिट ट्रेल स्थापित करना, कर चोरी और वित्तीय धोखाधड़ी की पहचान करना और संभावित जोखिमों का पूर्वानुमान लगाना समय की जरूरत है. तकनीक ने पारदर्शिता को नई शक्ति दी है और कंपनियों के लिए एक मजबूत डिजिटल क्रेडिट इतिहास तैयार करना भी संभव बनाया है. आने वाले समय में वही चार्टर्ड एकाउंटेंट सबसे अधिक प्रभावी होंगे जो पारंपरिक ज्ञान के साथ आधुनिक तकनीकी दक्षता भी विकसित करेंगे.
विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में भागीदार
युवा चार्टर्ड एकाउंटेंट्स के सामने आज अवसरों का एक नया क्षितिज खुल रहा है. क्षमता निर्माण, सतत सीखने की प्रवृत्ति और बहु-विषयक विशेषज्ञता अब विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन चुकी है. इंजीनियरों, वैल्यूअर्स, डेटा एनालिस्ट्स और अन्य विशेषज्ञों के साथ मिलकर काम करने वाली बहु-विषयक भारतीय फर्में वैश्विक परामर्श बाजार में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह उल्लेख किया है कि वैश्विक परामर्श फर्मों को फीस के रूप में करीब 50 हजार करोड़ रुपये प्रतिवर्ष देश से बाहर जाते हैं. यदि भारतीय चार्टर्ड एकाउंटेंट्स अपनी संस्थाओं का विस्तार करें, आपसी विलय के माध्यम से बड़ी और सक्षम फर्में विकसित करें और वैश्विक स्तर की सेवाएं प्रदान करें, तो यह आर्थिक अवसर देश के भीतर ही रहेगा. इससे न केवल विदेशी मुद्रा की बचत होगी, बल्कि भारत का महत्वपूर्ण वित्तीय और व्यावसायिक डेटा भी देश के भीतर सुरक्षित रहेगा.
वास्तव में, चार्टर्ड एकाउंटेंट केवल किसी कंपनी के सलाहकार नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक यात्रा के मौन शिल्पकार हैं. वे कर सुधारों को गति देते हैं, निवेशकों का विश्वास बनाए रखते हैं, कॉर्पोरेट पारदर्शिता सुनिश्चित करते हैं, आर्थिक सुधारों को सफल बनाते हैं और तकनीक आधारित भविष्य की वित्तीय व्यवस्था का निर्माण करते हैं. विकसित भारत 2047 का लक्ष्य तभी साकार होगा जब देश की आर्थिक प्रगति के साथ उसकी वित्तीय विश्वसनीयता भी समान गति से आगे बढ़ेगी. इस दिशा में चार्टर्ड एकाउंटेंट्स की भूमिका पहले से कहीं अधिक व्यापक, अधिक उत्तरदायी और अधिक निर्णायक होने वाली है.
सीए दिवस केवल एक पेशे का उत्सव नहीं, बल्कि उस विश्वास, ईमानदारी और पेशेवर उत्कृष्टता का उत्सव है जिसने भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है और जो आने वाले सालों में विकसित भारत के संकल्प को नई ऊर्जा प्रदान करेगी.
(डिस्क्लेमर: लेखक आर्थिक मुद्दों की गहरी समझ रखने वाले एक चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं. वो भारतीय जनता पार्टी में आर्थिक मामलों के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं. इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी हैं, उनसे एनडीटीवी का सहमत या असहमत होना जरूरी नहीं है.)