- राम मंदिर ट्रस्ट ने रूटीन ऑडिट के दौरान दानपात्र से नकदी और सामग्री गायब होने का शक हुआ
- सीसीटीवी फुटेज में एक कर्मचारी की संदिग्ध हरकतें दिखीं, जिसके बाद ट्रस्ट ने गुप्त जांच शुरू की
- विपक्षी दलों ने चढ़ावे की चोरी को लेकर सरकार पर सवाल उठाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की
अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे और चंदा चोरी का मामला इन दिनों काफी गरमाया हुआ है. दान की रकम में हेराफेरी के आरोपों की जांच चल रही है. मामले में अब तक कई बड़े किरदार सामने आए हैं, जिनकी संपत्ति सवालों के घेरे में है. राजनीतिक बयानों से लेकर पुलिसिया कार्रवाई तक, इस मामले में अब तक क्या-क्या हुआ है, यहां जानें.
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
जून की शुरुआत में हुआ खुलासा: राम मंदिर ट्रस्ट जब अपना रूटीन ऑडिट (खातों की जांच) कर रहा था, तब दानपात्र से नकदी और दूसरी चीजें गायब होने का शक हुआ.
सीसीटीवी से खुला राज: जब मंदिर परिसर और दानपात्र के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखी गई, तो वहां काम करने वाले एक कर्मचारी की हरकतें संदिग्ध लगीं. इसके बाद ट्रस्ट ने अंदरूनी तौर पर मामले की जांच शुरू की और शुरुआत में इसे सीक्रेट (गोपनीय) रखा गया.
मामले में हुई राजनीति और विपक्षी दलों के हमले
7 जून (अखिलेश यादव का हमला): समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इस मामले को हवा दी. उन्होंने योगी सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि अगर उनकी 'डबल इंजन' सरकार, ड्रोन और दूरबीन सही से काम कर रहे होते, तो विपक्ष को सवाल उठाने का मौका ही नहीं मिलता. उन्होंने कहा कि आस्था के पैसे में चोरी गंभीर चिंता का विषय है.
संजय सिंह का बयान: आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने भी इस पर निशाना साधा और कहा कि राम मंदिर जैसे पवित्र स्थान पर दान की चोरी बेहद गंभीर है. इसकी पूरी सच्चाई जनता के सामने आनी चाहिए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.
10 जून (बीजेपी का रुख): बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कानपुर दौरे के दौरान माना कि चंदा चोरी की बातें सामने आई हैं. उन्होंने साफ किया कि सरकार इसकी जांच करवा रही है और जो भी दोषी होगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा.
13 जून - SIT का गठन - मामले को बढ़ता देख मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर 3 सदस्यों की एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई गई. खुद राम मंदिर ट्रस्ट ने भी सरकार से निष्पक्ष जांच की मांग की थी ताकि मंदिर की छवि खराब करने की कोशिशों को रोका जा सके.
SIT में शामिल बड़े अधिकारी
- विजय विश्वास पंत (IAS, लखनऊ के डिविजनल कमिश्नर)
- किरण एस (IPS, पुलिस महानिरीक्षक)
- नील रतन (विशेष सचिव, वित्त विभाग)
13 जून को ही मंदिर में चढ़ावे की रकम गिनने वाले एक कर्मचारी लवकुश मिश्रा के घर पर छापा मारा गया. लवकुश के घर की अलमारी और गोबर के ढेर से करीब 10 लाख रुपये नकद बरामद हुए.
संदेह के घेरे में संपत्ति: लवकुश के साथ एक और कर्मचारी को हिरासत में लिया गया है. इन दोनों की सैलरी सिर्फ 18 से 20 हजार रुपये महीना थी, लेकिन हाल ही में इनकी संपत्ति अचानक बहुत बढ़ गई. जांच में पता चला है कि एक कर्मचारी ने 1.5 करोड़ रुपये की जमीन खरीदी है और दूसरे ने 40 लाख रुपये का प्लॉट लिया है.
15 जून, 2026 - SIT की टीम जांच के लिए सीधे अयोध्या राम मंदिर परिसर पहुंची. टीम ने गेट नंबर 11 से एंट्री की और केस से जुड़े ज़रूरी दस्तावेज़ अपने कब्ज़े में ले लिए हैं. सरकार ने SIT को आदेश दिया है कि वह 7 दिनों के भीतर अपनी शुरुआती रिपोर्ट और 15 दिनों के अंदर फाइनल रिपोर्ट सौंपे.
16 जून, 2026 - SIT ने 11 घंटे तक मंदिर परिसर में जांच की. ट्रस्ट के पदाधिकारियों समेत 100 से अधिक लोगों से पूछताछ की. चढ़ावा की गिनती कहां होती है, गिनती कौन-कौन करता है, फिर बैंक में कौन जमा करता है? इस पूरे प्रोसेस और उसमें शामिल लोगों के बारे में जानकारी ली.
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