सूत्रों के मुताबिक सपा-कांग्रेस गठबंधन की घोषणा बुधवार को किए जाने की संभावना है
- कांग्रेस के साथ समझौते की घोषणा 1-2 दिन में कर सकती है सपा
- सपा-कांग्रेस गठबंधन में कांग्रेस के हिस्से में आएंगी 75-80 सीटें
- डिम्पल यादव और प्रियंका गांधी मिलकर करेंगी चुनावी रैलियां
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लखनऊ:
परिवार में जारी 'जंग' को निपटा लेने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अब राज्य विधानसभा चुनाव से पहले अपने अगले ज़रूरी काम की तरफ बढ़ रहे हैं - यानी वह उस गठबंधन की तैयारी में जुटे हैं, जो उनके मुताबिक प्रतिद्वंद्वियों मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बसपा या बीएसपी) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का मुकाबला कर सकता है. उन्होंने NDTV को बताया, "कांग्रेस के साथ समझौते की घोषणा एक या दो दिन में कर दी जाएगी..."
43-वर्षीय अखिलेश यादव का इरादा यूपी के मुख्यमंत्री के रूप में दूसरा कार्यकाल हासिल करना है, लेकिन वह अपने पिता मुलायम सिंह यादव के साथ 'संघर्ष' में उलझे रहे, जिन्होंने पुत्र से सलाह-मशविरा किए बिना प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी थी.
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पार्टी में 'सर्वेसर्वा' कौन है, इसका फैसला सोमवार को केंद्रीय निर्वाचन आयोग ने कर दिया, और कहा कि चूंकि अखिलेश यादव के पास समाजवादी पार्टी के अधिकतर सदस्यों का समर्थन है, इसलिए वही संगठन के भी सर्वेसर्वा हैं, और उनके पिता द्वारा लगाया गया विद्रोह का आरोप गलत है. इस जीत से तय हो गया है कि युवा मुख्यमंत्री ही पार्टी के चुनाव चिह्न 'साइकिल' को इस्तेमाल करने के अधिकारी हैं, जिसे मतदाता पहचानते हैं. अपने पिता को पूरा सम्मान देने की अपनी बात पर अडिग रहे अखिलेश ने सोमवार को चुनाव आयोग के फैसले की घोषणा के बाद भी उनके आवास पर जाकर उनसे मुलाकात की, और दोनों की मुलाकात की एक तस्वीर भी ट्वीट की.
अखिलेश यादव ने सोमवार को पिता मुलायम सिंह यादव से मुलाकात की
अखिलेश यादव ने मंगलवार को पुष्टि की कि कांग्रेस के साथ गठबंधन की बातचीत जारी है, जिसमें अजित सिंह की राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) जैसी छोटी क्षेत्रीय पार्टियों को भी शामिल किया जा सकता है. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी तथा अखिलेश यादव हालिया वक्त में एक दूसरे की तारीफों के पुल बांधते रहे हैं, और दोनों ने ही अलग-अलग समय पर एक-दूसरे को 'गुड ब्वॉय' कहकर पुकारा है.
अखिलेश यादव ने कांग्रेस के साथ गठबंधन के लिए मुलायम सिंह यादव को भी मनाने की कोशिश की थी, और यहां तक भी दावा किया था कि गठबंधन हो जाने से वे राज्य की कुल 403 सीटों में से 300 पर जीत हासिल कर पाएंगे, क्योंकि इस गठबंधन के अस्तित्व में आने से मुस्लिम वोट एकजुट हो जाएगा. गठबंधन में कांग्रेस को 75-80 सीटें आवंटित की जाने की संभावना बताई जा रही है. सूत्रों ने बताया कि अखिलेश और राहुल मिलकर रैलियों को संबोधित करेंगे, और इसी तरह अखिलेश की सांसद पत्नी डिम्पल यादव और राहुल की बहन प्रियंका गांधी वाड्रा भी मिलकर रैलियों को संबोधित करेंगी.
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 66-वर्षीय समाजवादी पार्टी कार्यकर्ता शकील अहमद कुरेशी का कहना है, "हमारे क्षेत्र में हर चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी को 5,000 से 10,000 वोट मिल ही जाते हैं, सो, अगर दोनों पार्टियों का गठबंधन हो जाए, तो वे वोट हमें या उन्हें मिलेंगे ही..."
उत्तर प्रदेश में अपनी ताकत को लगभग खो चुकी कांग्रेस के लिए अखिलेश यादव की पीठ पर सवार होकर सत्ता के गलियारों तक पहुंच बहाल करने का मौका भी राजनैतिक रूप से पुनरुद्धार का अवसर है. सोमवार को जैसे ही चुनाव आयोग ने समाजवादी पार्टी का सर्वेसर्वा अखिलेश यादव को घोषित किया, जोश में भरे कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने पोस्टर चिपका डाले, जिनमें गठबंधन को लेकर खुशी साफ झलक रही है.
सपा और कांग्रेस के गठबंधन को लेकर खुशी ज़ाहिर करते पोस्टर रातोंरात नज़र आने लगे हैं
गठबंधन को लेकर अखिलेश यादव की योजना है कि समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश की 403 सीटों में लगभग 300 पर चुनाव लड़ेगी, जबकि कांग्रेस को लगभग 75 सीटें दी जाएंगी, और आरएलडी व अन्य छोटे दलों को कुल 25-30 सीटों पर लड़ने का अवसर दिया जाएगा. यह पिछले साल बिहार में किए गए प्रयोग जैसा रहेगा, जहां पुराने प्रतिद्वंद्वियों लालू प्रसाद यादव और कांग्रेस के साथ मिलकर नीतीश कुमार ने लगातार तीसरी बार राज्य का मुख्यमंत्री बनने में कामयाबी हासिल की थी.
इसी महीने घोषित किए गए विधानसभा चुनाव कार्यक्रम के तहत उत्तर प्रदेश में कुल सात चरणों में 11, 15, 19, 23, 27 फरवरी तथा 4, 8 मार्च को मतदान होगा, और मतगणना 11 मार्च को करवाई जाएगी.
43-वर्षीय अखिलेश यादव का इरादा यूपी के मुख्यमंत्री के रूप में दूसरा कार्यकाल हासिल करना है, लेकिन वह अपने पिता मुलायम सिंह यादव के साथ 'संघर्ष' में उलझे रहे, जिन्होंने पुत्र से सलाह-मशविरा किए बिना प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी थी.
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पार्टी में 'सर्वेसर्वा' कौन है, इसका फैसला सोमवार को केंद्रीय निर्वाचन आयोग ने कर दिया, और कहा कि चूंकि अखिलेश यादव के पास समाजवादी पार्टी के अधिकतर सदस्यों का समर्थन है, इसलिए वही संगठन के भी सर्वेसर्वा हैं, और उनके पिता द्वारा लगाया गया विद्रोह का आरोप गलत है. इस जीत से तय हो गया है कि युवा मुख्यमंत्री ही पार्टी के चुनाव चिह्न 'साइकिल' को इस्तेमाल करने के अधिकारी हैं, जिसे मतदाता पहचानते हैं. अपने पिता को पूरा सम्मान देने की अपनी बात पर अडिग रहे अखिलेश ने सोमवार को चुनाव आयोग के फैसले की घोषणा के बाद भी उनके आवास पर जाकर उनसे मुलाकात की, और दोनों की मुलाकात की एक तस्वीर भी ट्वीट की.

अखिलेश यादव ने मंगलवार को पुष्टि की कि कांग्रेस के साथ गठबंधन की बातचीत जारी है, जिसमें अजित सिंह की राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) जैसी छोटी क्षेत्रीय पार्टियों को भी शामिल किया जा सकता है. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी तथा अखिलेश यादव हालिया वक्त में एक दूसरे की तारीफों के पुल बांधते रहे हैं, और दोनों ने ही अलग-अलग समय पर एक-दूसरे को 'गुड ब्वॉय' कहकर पुकारा है.
अखिलेश यादव ने कांग्रेस के साथ गठबंधन के लिए मुलायम सिंह यादव को भी मनाने की कोशिश की थी, और यहां तक भी दावा किया था कि गठबंधन हो जाने से वे राज्य की कुल 403 सीटों में से 300 पर जीत हासिल कर पाएंगे, क्योंकि इस गठबंधन के अस्तित्व में आने से मुस्लिम वोट एकजुट हो जाएगा. गठबंधन में कांग्रेस को 75-80 सीटें आवंटित की जाने की संभावना बताई जा रही है. सूत्रों ने बताया कि अखिलेश और राहुल मिलकर रैलियों को संबोधित करेंगे, और इसी तरह अखिलेश की सांसद पत्नी डिम्पल यादव और राहुल की बहन प्रियंका गांधी वाड्रा भी मिलकर रैलियों को संबोधित करेंगी.
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 66-वर्षीय समाजवादी पार्टी कार्यकर्ता शकील अहमद कुरेशी का कहना है, "हमारे क्षेत्र में हर चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी को 5,000 से 10,000 वोट मिल ही जाते हैं, सो, अगर दोनों पार्टियों का गठबंधन हो जाए, तो वे वोट हमें या उन्हें मिलेंगे ही..."
उत्तर प्रदेश में अपनी ताकत को लगभग खो चुकी कांग्रेस के लिए अखिलेश यादव की पीठ पर सवार होकर सत्ता के गलियारों तक पहुंच बहाल करने का मौका भी राजनैतिक रूप से पुनरुद्धार का अवसर है. सोमवार को जैसे ही चुनाव आयोग ने समाजवादी पार्टी का सर्वेसर्वा अखिलेश यादव को घोषित किया, जोश में भरे कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने पोस्टर चिपका डाले, जिनमें गठबंधन को लेकर खुशी साफ झलक रही है.

गठबंधन को लेकर अखिलेश यादव की योजना है कि समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश की 403 सीटों में लगभग 300 पर चुनाव लड़ेगी, जबकि कांग्रेस को लगभग 75 सीटें दी जाएंगी, और आरएलडी व अन्य छोटे दलों को कुल 25-30 सीटों पर लड़ने का अवसर दिया जाएगा. यह पिछले साल बिहार में किए गए प्रयोग जैसा रहेगा, जहां पुराने प्रतिद्वंद्वियों लालू प्रसाद यादव और कांग्रेस के साथ मिलकर नीतीश कुमार ने लगातार तीसरी बार राज्य का मुख्यमंत्री बनने में कामयाबी हासिल की थी.
इसी महीने घोषित किए गए विधानसभा चुनाव कार्यक्रम के तहत उत्तर प्रदेश में कुल सात चरणों में 11, 15, 19, 23, 27 फरवरी तथा 4, 8 मार्च को मतदान होगा, और मतगणना 11 मार्च को करवाई जाएगी.
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