विज्ञापन

बिना मंजूरी छुट्टी पर गए तो क्‍या छिन जाएगी ग्रेच्‍युटी और पेंशन? उड़ीसा हाई कोर्ट का ये फैसला आपके बड़े काम आएगा

Orissa High Court Judgement: क्या बिना मंजूरी छुट्टी के कारण कर्मचारी की पेंशन और ग्रेच्युटी रोकी जा सकती है? उड़ीसा हाई कोर्ट ने ऐसे एक मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. आप भी जान लीजिए ये महत्‍वपूर्ण फैसला.

बिना मंजूरी छुट्टी पर गए तो क्‍या छिन जाएगी ग्रेच्‍युटी और पेंशन? उड़ीसा हाई कोर्ट का ये फैसला आपके बड़े काम आएगा
छुट्टी का आवेदन किया, मंजूर नहीं हुआ, फिर भी चले गए तो क्‍या होगा?
NDTV इंडिया ग्राफिक्‍स

मान लीजिए आप या आपके घर के सदस्‍य गंभीर रूप से बीमार पड़ते हैं, आप ऑफिस में अपने बॉस को छुट्टी के लिए मेल डालते हैं पर ये छुट्टी मंजूर नहीं होती! आपको इमरजेंसी थी, सो आप छुट्टी पर चले जाते हैं. 4-5 दिनों के बाद आप वापस ऑफिस लौटते हैं. और बिना मंजूरी छुट्टी पर जाने को मिसकंडक्‍ट (Misconduct) यानी गंभीर कदाचार माना जाए और आपको नौकरी के बाद वाले ग्रेच्‍युटी, पेंशन जैसे सारे रिटायरमेंट बेनिफिट्स छीन लिए जाएं! 

ये सोचते हुए आपके मन में निराशा और गुस्‍सा, दोनों भाव आ सकते हैं. है न? 

ऐसा ही कुछ हुआ था रेलवे के एक कर्मचारी जया चंद्र मिश्रा के साथ साल 2012 में. लेकिन अब उड़ीसा हाई कोर्ट ने इस मामले पर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया है कि काम से लंबे समय तक अनुपस्थित रहना ऑटोमैटिकली ऐसा कदाचार नहीं बन जाता कि किसी की पेंशन ही रोक दी जाए.

पहले पूरा मामला जान लीजिए  

यह कानूनी विवाद 'जया चंद्र मिश्रा बनाम भारत सरकार और अन्‍य' के बीच का है. रेलवे ने अपने इस कर्मचारी के खिलाफ बिना मंजूरी लंबी छुट्टी पर रहने के कारण अनुशासनात्मक कार्रवाई की थी. 

रेलवे अथॉरिटी ने साल 2021 में कर्मचारी को 'अनिवार्य सेवानिवृत्ति' (Compulsory Retirement) दे दी थी और उनके रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले सारे लाभ और सुविधाओं में कटौती कर दी थी. इसके खिलाफ जब कर्मचारी सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) गए, तो वहां से भी उन्हें निराशा हाथ लगी.

हाई कोर्ट की शरण में आए तो मिला न्‍याय 

जस्टिस कृष्णा एस दीक्षित और जस्टिस चितरंजन डैश की बेंच ने कैट (CAT) के पुराने आदेश को पलटते हुए रेलवे को सख्त निर्देश दिए. अदालत ने कहा, 'कर्मचारी ने छुट्टी के लिए आवेदन किया था, भले ही वह मंजूर नहीं हुआ था. सिर्फ इसलिए कि छुट्टी स्वीकृत नहीं हुई थी, ये मान लेना गलत है कि कर्मचारी किसी गंभीर कदाचार का दोषी था.'

अदालत ने माना कि बिना मंजूरी गायब रहने पर संबंधित लीव रूल्स के तहत प्रशासनिक कार्रवाई तो की जा सकती है, लेकिन इसके लिए सेवा की सबसे कठोर सजा (पेंशन और ग्रेच्युटी रोकना) देना बिल्कुल जायज नहीं है.

12 हफ्तों में लौटानी होगी पेंशन और ग्रेच्युटी

हाई कोर्ट ने रेलवे अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे कर्मचारी के रिटायरमेंट बेनिफिट्स, जिसमें पेंशन, ग्रेच्युटी और लीव एनकैशमेंट (छुट्टियों के बदले पैसा) शामिल हैं, उनकी दोबारा गणना करें. अदालत ने रेलवे को 12 हफ्तों के भीतर पूरे बकाए का भुगतान करने का निर्देश दिया है, हालांकि इस एरियर पर कोई ब्याज नहीं दिया जाएगा.

आपके लिए क्यों मायने रखता है ये फैसला? 

पटना हाई कोर्ट के अधिवक्‍ता कुमार शानू के अनुसार, नौकरीपेशा लोगों के लिए उड़ीसा हाईकोर्ट का ये फैसला बहुत मायने रखता है. उन्‍होंने कहा, 'ये फैसला देश के करोड़ों  कर्मचारियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है.

उन्‍होंने एक-दो उदाहरण देते हुए कहा कि कई बार ऐसा होता है कि आपके सीनियर आपसे किसी व्‍यक्तिगत खुन्‍नस में या चिढ़ में आपकी छुट्टी के आवेदन पर रेस्‍पॉन्‍ड नहीं करते हैं. और फिर वे आगे अनुशासनात्‍मक कार्रवाई की अनुशंसा कर देते हैं. बिहार में शिक्षा विभाग में शिक्षकों के साथ ऐसे कई मामले हो चुके हैं. इससे उनकी सर्विस बुक खराब हो जाती है और बाद में रिटायरमेंट लाभ के समय बड़ी दिक्‍कत हो सकती है. ऐसे में ये फैसला एक मिसाल बन सकता है. 

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Pension Rule Update, Gratuity Rule Changes, Orissa High Court Order, Leave Application, Retirement Benefits
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com