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नितिन नवीन की टीम में भी दिखेगा जेन जी फैक्टर? क्या भाजपा के संगठन में बदलेंगे समीकरण

भाजपा जेन जी से संवाद भी बेहतर करेगी. इसके लिए सोशल मीडिया के नए प्लेटफ़ॉर्म का प्रयोग होगा. पार्टी दोतरफा संवाद करेगी.

नितिन नवीन की टीम में भी दिखेगा जेन जी फैक्टर? क्या भाजपा के संगठन में बदलेंगे समीकरण
  • भाजपा ने नीट पेपर लीक विरोधी छात्र आंदोलन के बाद युवाओं से बेहतर संवाद के लिए सोशल मीडिया का उपयोग बढ़ाया है
  • नितिन नवीन को 45 वर्ष की उम्र में भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर पार्टी ने युवा नेतृत्व को मजबूती दी है
  • भाजपा की नई टीम में नए युवा तथा अनुभवी नेताओं को शामिल कर अगले 20 सालों के लिए पार्टी नेतृत्व तैयार किया जाएगा
नई दिल्ली:

नीट पेपर लीक के विरोध में देश भर में जेन जी के आंदोलन के बाद भाजपा इससे हुए नुक़सान के आकलन में जुट गई है. सरकार ने आनन-फानन फैसले कर काफी हद तक इसकी भरपाई की है, लेकिन भविष्य में नई पीढ़ी के साथ बेहतर संवाद और तालमेल की जमीन तैयार करना पार्टी के लिए बहुत जरूरी हो गया है. जहां सरकार के स्तर पर जेन जी से संवाद के लिए मंत्रियों से इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म का अधिक इस्तेमाल करने को कहा गया है वहीं भाजपा भी वैकल्पिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के उपयोग के रास्ते तलाशने में जुट गई है. 

इसी बीच पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन की बहुप्रतीक्षित टीम को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है कि क्या टीम गठन में इस आंदोलन का भी ध्यान रखा जाएगा? भाजपा के एक नेता के अनुसार उम्र केवल एक फ़ैक्टर भर है. असली बात युवाओं के बीच लोकप्रिय और उनसे संवाद करने वाले व्यक्तित्व की है. पीएम मोदी स्वयं ही इंस्टाग्राम पर जेनज़ी से संवाद के लिए आगे आए हैं. पार्टी नेताओं के अनुसार युवाओं में उनकी लोकप्रियता और छवि काफ़ी मज़बूत है. जहां तक पार्टी संगठन का सवाल है, भाजपा ने केवल 45 वर्ष के नितिन नवीन को अध्यक्ष बना कर युवा पीढ़ी को बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है. यह भाजपा के भीतर चौथी पीढ़ी को कमान तो है ही साथ ही आने वाले समय के लिए पार्टी के नेतृत्व को तैयार करने की रणनीति भी है.

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भाजपा के एक नेता के अनुसार अगर अन्य राष्ट्रीय दलों से तुलना की जाए तो राष्ट्रीय अध्यक्ष सबसे युवा हैं. पार्टी ने युवा नेतृत्व को ऐसे समय में आगे किया, जब वह विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है और पिछले बारह वर्षों से सत्ता में है. भाजपा जेन जी से संवाद भी बेहतर करेगी. इसके लिए सोशल मीडिया के नए प्लेटफ़ॉर्म का प्रयोग होगा. पार्टी दोतरफा संवाद करेगी. जिला स्तर पर युवाओं को सोशल मीडिया टीम से जोड़ा जाएगा. भविष्य का नेतृत्व तैयार करने की ललक उनकी टीम के गठन में भी दिखेगी. यह बदलाव केवल संगठन ही नहीं बल्कि सरकार में भी दिखेगा. पीएम मोदी के मंत्रिपरिषद का फेरबदल भी मॉनसून सत्र के बाद संभावित है, जिसमें व्यापक परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं. कई बुज़ुर्ग मंत्रियों को हटाया जा सकता है और युवा नेताओं को मौका मिल सकता है.

पार्टी सूत्रों के मुताबिक नवीन की टीम के लिए होम वर्क पूरा हो चुका है. इसकी घोषणा के लिए सही समय का इंतज़ार किया जा रहा है. माना जा रहा है कि युवा अध्यक्ष के साथ काम करने के लिए बनाई जाने वाली टीम में अनुभवी नेताओं के साथ ही युवाओं को भी मौका दिया जाएगा ताकि भविष्य के लिए नेतृत्व तैयार किया जा सके. नितिन नवीन 20 जनवरी को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए थे. उसके बाद से ही उनकी नई टीम के गठन को लेकर इंतजार हो रहा है. सूत्रों के अनुसार इसके लिए देश भर में नेताओं की सूची तैयार की गई है. पचास वर्ष के कम उम्र के नेताओं की इस सूची के बारे में वरिष्ठ नेताओं से फीडबैक लिया गया है. इसी के आधार पर जल्दी ही नितिन नवीन की टीम की घोषणा होगी.

भाजपा संविधान के मुताबिक कितने राष्ट्रीय पदाधिकारियों का नियम

दरअसल, भाजपा संविधान के अनुसार पार्टी अध्यक्ष की सहायता के लिए पदाधिकारियों की नियुक्ति की जाती है. इनमें अधिकतम 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, नौ राष्ट्रीय महामंत्री (जिनमें एक महामंत्री संगठन भी शामिल है) और 15 मंत्रियों की नियुक्ति हो सकती है. एक राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष की नियुक्ति भी की जाती है. पार्टी संविधान में किए गए संशोधन के अनुसार 33 प्रतिशत पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं. इसका मतलब है कि कुल 38 राष्ट्रीय पदाधिकारियों में से कम से कम 13 महिलाएं होना अनिवार्य हैं. इसके साथ ही अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के प्रत्येक वर्ग में से कम से कम तीन पदाधिकारी होने आवश्यक हैं.

संसदीय बोर्ड में अध्यक्ष समेत होंगे 11 मेंबर

राष्ट्रीय पदाधिकारियों की नियुक्ति के साथ ही पार्टी की सर्वोच्च निर्णायक संस्था संसदीय बोर्ड का भी गठन होगा. वैसे तो इसमें अध्यक्ष को मिला कर अधिकतम 11 सदस्य हो सकते हैं, लेकिन फिलहाल इसमें 12 सदस्य हो गए हैं. क्षेत्रीय, सामाजिक और धार्मिक संतुलन बैठाने के लिए इसका भी पुनर्गठन होगा. इसके अलावा केंद्रीय चुनाव समिति का भी गठन होना है, जिसमें संसदीय बोर्ड के सभी सदस्यों के साथ ही कुछ अन्य नेताओं को भी शामिल किया जाता है. अभी महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और महिला मोर्चा की अध्यक्ष वी श्रीनिवासन इसकी सदस्य हैं.

राष्ट्रीय कार्यकारिणी का भी गठन करेंगे नितिन नवीन

नितिन नवीन राष्ट्रीय कार्यकारिणी का भी गठन करेंगे. यह पार्टी की मुख्य कार्यकारी संस्था है. इसमें अध्यक्ष के अलावा अधिकतम 120 सदस्य हो सकते हैं. इनमें भी कम से कम 40 महिलाएं और 12 सदस्य एससी-एसटी वर्ग से होने आवश्यक हैं. इसके साथ ही राष्ट्रीय अध्यक्ष आवश्यकतानुसार विशेष आमंत्रित तथा स्थायी आमंत्रित सदस्यों को भी मनोनीत कर सकते हैं. राष्ट्रीय परिषद का भी गठन होगा, जिसमें राज्य परिषदों द्वारा निर्वाचित सदस्य, संसदीय दल के 10 प्रतिशत सदस्य, पार्टी के सभी पूर्व अध्यक्ष और राज्यों की विधानसभाओं और विधान परिषदों के नेता, राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सभी सदस्य, पार्टी के सभी राष्ट्रीय मोर्चों के अध्यक्ष और राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा अधिकतम 20 मनोनीत सदस्य होते हैं.

भाजपा महासचिवों में होंगे कई नए चेहरे, 33 फीसदी होंगी महिलाएं

भाजपा सूत्रों के अनुसार राष्ट्रीय महासचिवों में कई नए चेहरे लाए जाएंगे. इन्हें राज्यों से लाया जाएगा ताकि राष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व की नई पीढ़ी तैयार की जा सके और युवा अध्यक्ष के साथ काम करने में सहजता रहे. हालांकि वर्तमान अनुभवी महासचिवों विनोद तावड़े, सुनील बंसल और तरुण चुग को नई टीम में भी जगह मिलने की संभावना है. नई टीम में महिलाओं को खासतौर से तवज्जो दी जाएगी ताकि महिला आरक्षण को लेकर मोदी सरकार की पहल पर बल दिया जा सके. वैसे भी मोदी सरकार चाहती है कि 2029 के लोक सभा चुनाव में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू कर दिया जाए. इस तरह पार्टी महिलाओं का भी नया नेतृत्व तैयार करना चाह रही है. पीएम मोदी ने वंशवाद और जातिवाद को खत्म करने के लिए बिना राजनीतिक पृष्ठभूमि के एक लाख युवाओं को राजनीति में लाने की बात कही है. टीम के गठन में इस सोच की झलक भी दिखाई देगी.

RSS चाहता है आने वाले 20 सालों के हिसाब से तैयार हो पार्टी

पार्टी नेताओं के अनुसार जिस तरह स्वयं नितिन नवीन के चयन को लेकर आरएसएस और भाजपा नेताओं में लंबा मंथन चला, ठीक वैसे ही उनकी टीम को लेकर भी गहन मंत्रणा हुई है. आरएसएस चाहता है कि ऐसे लोगों को जगह मिले जो विचारधारा के लिए प्रतिबद्ध हों और संगठन को मजबूत दे सकें. वे कार्यकर्ताओं से जीवंत संपर्क रख सकें और आने वाले 15-20 वर्षों के लिए पार्टी की दशा और दिशा तय कर सकें. इस लिहाज से नितिन नवीन की टीम काफी महत्वपूर्ण साबित होने जा रही है.

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