ट्रेनों में सफर के दौरान एसी कोच से तौलिया, बेडशीट और कंबल चोरी होने की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए रेलवे बड़ा कदम उठाने जा रहा है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार (14 जुलाई) को रेलवे के रिफॉर्म्स के बारे में चर्चा के दौरान पूछे गए सवाल पर इस बारे में बताया. उन्होंने कहा कि ट्रेनों से तौलिया, बेडशीट और कंबल चोरी होने की घटनाएं रोकने के लिए अगले दो महीने के भीतर एक बड़ा रिफॉर्म (सुधार) लाया जाएगा. हालांकि ये पूरा सिस्टम क्या होगा और कैसे इन घटनाओं को रोका जाएगा, इस बारे में फिलहाल उन्होंने विस्तार से जानकारी नहीं दी है.
ट्रेनों के रिजर्वेशन कोच से तौलिया, बेडशीट और कंबल चोरी होने की घटनाएं रेलवे के लिए अक्सर चर्चा और चिंता का विषय बनी रहती हैं. अब इस समस्या से निपटने के लिए रेलवे एक सिस्टम बनाने जा रहा है. हाल ही में एक RTI में खुलासा हुआ है कि जनवरी 2022 से मई 2026 तक ट्रेनों से 1.27 करोड़ बेडरोल चोरी हो गए हैं. माना जा रहा है कि रिजर्वेशन कोच में यात्रा कर रहे पैसेंजर अपने साथ चादर, तौलिया वगैरह लेकर चले जाते हैं.
रेल मंत्री ने 8 नए रिफॉर्म्स के बारे में बताया
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रेलवे में लगातार सुधारों के लिए प्रेरित किया है. इसी कड़ी में रेलवे में अब तक 9 बड़े रिफॉर्म किए जा चुके हैं, और आज रेलवे को और अधिक आधुनिक, पारदर्शी, सुगम बनाने के लिए 8 नए रिफॉर्म्स पेश किए गए हैं.
1. फ्लाई ऐश का सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन (10वां सुधार)
देश में निर्माण कार्यों के लिए हर साल करीब 96 मिलियन टन फ्लाई ऐश का इस्तेमाल होता है. सही निपटान न होने पर यह पर्यावरण के लिए खतरा बनती है. अब फ्लाई ऐश को बंद वैगनों में ले जाया जाएगा, जिससे धूल उड़ने और प्रदूषण की समस्या खत्म होगी. रेलवे ने इसके लिए विशेष कंटेनर तैयार किए हैं, जिनमें ऊपर से लोडिंग होगी, जिससे यह प्रक्रिया आसान और सुरक्षित हो जाएगी.
2. कंटेनर व्यवसाय के लिए एकीकृत लाइसेंस (11वां सुधार)
रेलवे कंटेनर संचालन के लिए अब 'यूनिफाइड (एकीकृत) लाइसेंस' व्यवस्था ला रहा है ताकि अधिक से अधिक कंपनियां और लोग इस कारोबार से जुड़ सकें. लंबे समय की स्थिरता: यह नई नीति अगले 20 वर्षों के लिए लागू रहेगी, जिससे उद्योगों को काम करने में स्थिरता मिलेगी और नियमों की कमियां दूर होंगी.
3. उर्वरकों की आसान ढुलाई और पारदर्शी भाड़ा (12वां सुधार)
अभी तक उर्वरक मालभाड़े की व्यवस्था में 50 अलग-अलग स्लैब थे. अब मालभाड़ा सीधे 'प्रति टन प्रति किलोमीटर' के आधार पर तय होगा. वर्तमान में उर्वरकों की ढुलाई में रेलवे की 85% हिस्सेदारी है. अब उर्वरकों की ढुलाई कंटेनरों के जरिए भी की जा सकेगी.
4. रेल परियोजनाओं के श्रमिकों के लिए 'स्किल सर्टिफिकेशन' (13वां सुधार)
रेलवे परियोजनाओं में काम करने वाले सभी श्रमिकों और कर्मचारियों के लिए 'रेलवे स्किल सर्टिफिकेशन फ्रेमवर्क' लागू किया जाएगा. इससे सुनिश्चित होगा कि काम करने वाले लोग प्रशिक्षित और कुशल हों.
5. निर्माण कार्यों और ठेकेदारी नियमों में बड़े बदलाव (14वां सुधार)
अनुबंध की शुरुआत में ही 10% परफॉर्मेंस सिक्योरिटी जमा करानी होगी, इसके बाद रनिंग बिल से कोई कटौती नहीं की जाएगी. केवल वही कंपनियां पात्र होंगी जिनके लंबित कानूनी विवाद उनकी नेट वर्थ के 50% से अधिक नहीं हैं. ठेकेदारों के लिए 'Contractor's All Risk Insurance' और 'Professional Indemnity Insurance' को अनिवार्य कर दिया गया है.
जमीन अधिग्रहण को पूरी तरह डिजिटल बनाने के लिए CRIS द्वारा विकसित 'रेल भूमि वेब पोर्टल शुरू किया गया है. इससे कागजी काम खत्म होगा और मुआवजा वितरण व कानूनी समय-सीमा की रियल-टाइम मॉनिटरिंग हो सकेगी.
6. वैगन डिजाइन में उद्योगों को मिली छूट (15वां सुधार)
अब कोई भी कंपनी या उद्योग अपनी जरूरत के हिसाब से वैगन का डिजाइन तैयार कर सकेगा. पहले वैगनों का डिजाइन केवल RDSO ही बनाता था और इंडियन रेलवे स्टैंडर्ड्स (IRS) के स्वीकृत पुर्जों के उपयोग की बाध्यता के कारण नई तकनीक और इनोवेशन की गुंजाइश बेहद कम थी. अब कंपनियां खुद डिजाइन बना सकती हैं, जिसे सुरक्षा मानकों पर परखने के बाद RDSO अंतिम मंजूरी देगा.
7. तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के परिवहन का आधुनिकीकरण (16वां सुधार)
अब तक पेट्रोलियम और तेल उत्पादों की ढुलाई वाले टैंक वैगन केवल रेलवे के ही मालिकाना हक में होते थे. अब तेल कंपनियां अपनी जरूरत के हिसाब से विशेष टैंक वैगन डिजाइन करा सकती हैं और इन्हें सीधे खरीद या लीजिंग एजेंसियों से लीज पर ले सकती हैं.
8. कंटेनर में जाएगा अनाज, बर्बादी होगी कम (17वां सुधार)
पारंपरिक ढुलाई के दौरान होने वाले 4-5% अनाज और दालों के नुकसान को रोकने के लिए अब इनके परिवहन को कंटेनरों में करने की मंजूरी दे दी गई है. इससे अनाज नमी, धूल और गंदगी से सुरक्षित रहेगा और इसका किराया भी अब 'प्रति टन प्रति किलोमीटर' के पारदर्शी आधार पर तय होगा.
रेल मंत्री ने कहा, 'प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में भारतीय रेलवे लगातार विकास के पथ पर अग्रसर है. चाहे वह रेल संपत्तियों की सुरक्षा से जुड़े जमीनी रिफॉर्म्स हों या फिर माल ढुलाई और इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े बड़े नीतिगत बदलाव, हमारा ध्यान पारदर्शिता, सुरक्षा और दक्षता बढ़ाने पर केंद्रित है.'
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