Gratuity Rules India 2026: अगर आप 2026 में नौकरी बदलने की सोच रहे हैं, तो सैलरी के साथ एक और चीज जरूर चेक कर लें और वो है ग्रेच्युटी. बहुत से लोग जॉब बदलते वक्त ग्रेच्युटी को नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि नए नियमों के बाद कई कर्मचारियों को सिर्फ एक साल में भी ग्रेच्युटी का फायदा मिलने लगा है. खासतौर पर कॉन्ट्रैक्ट और फिक्स्ड टर्म पर काम करने वालों के लिए यह बड़ी राहत की खबर है.
ग्रेच्युटी क्या होती है?
ग्रेच्युटी वह रकम होती है जो कंपनी अपने कर्मचारी को उसकी सर्विस के बदले देती है. यह पैसा कर्मचारी को उसकी लगातार मेहनत और काम के लिए मिलता है, जब वह नौकरी छोड़ता है या उसका कॉन्ट्रैक्ट खत्म होता है.
एक साल में भी मिल सकती है ग्रेच्युटी
अब नए सोशल सिक्योरिटी कोड के तहत फिक्स्ड टर्म और कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों को सिर्फ एक साल की नौकरी के बाद भी ग्रेच्युटी मिल सकती है. पहले इसके लिए पांच साल की नौकरी जरूरी थी. हालांकि, परमानेंट कर्मचारियों के लिए अभी भी पांच साल का नियम लागू है.
किन शर्तों पर मिलेगी एक साल की ग्रेच्युटी?
एक साल की ग्रेच्युटी का फायदा तभी मिलेगा जब कर्मचारी ने पूरे एक साल लगातार काम किया हो. बीच में लंबा ब्रेक या ज्यादा छुट्टी होने पर यह फायदा अटक सकता है. अगर कर्मचारी नौकरी छोड़ता है, तो ग्रेच्युटी की गिनती जॉइनिंग डेट से लेकर आखिरी वर्किंग डे तक की जाती है.
जॉब बदलने वालों के लिए बड़ी राहत
जो लोग बार बार नौकरी बदलते हैं या शॉर्ट टर्म और कॉन्ट्रैक्ट पर काम करते हैं, उनके लिए यह नियम काफी फायदेमंद है. अब कम समय की नौकरी में भी उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिलेगी.
45,000 रुपये बेसिक सैलरी पर कितनी ग्रेच्युटी?
अगर आपकी बेसिक सैलरी 45,000 रुपये है और आपने एक साल काम किया है, तो आपको करीब 25,962 रुपये की ग्रेच्युटी मिल सकती है. यह दिखाता है कि अब कम समय काम करने वालों को भी सीधा फायदा मिलने लगा है.
75,000 रुपये बेसिक सैलरी पर कितना मिलेगा पैसा?
अगर आपकी बेसिक सैलरी 75,000 रुपये है और आपने एक साल की नौकरी पूरी की है, तो आपकी ग्रेच्युटी की रकम करीब ₹43,269 रुपये तक हो सकती है. यानी जॉब बदलते वक्त यह रकम अच्छा सपोर्ट बन सकती है.
ग्रेच्युटी कैसे होती है कैलकुलेट?
ग्रेच्युटी निकालने का फॉर्मूला बहुत आसान है.लास्ट बेसिक सैलरी को नौकरी के सालों से गुणा किया जाता है और फिर उसे 15 से गुणा कर 26 से भाग दिया जाता है.नए लेबर कोड के अनुसार, महीने में 26 वर्किंग डे माने जाते हैं. इसमें साप्ताहिक छुट्टियां शामिल नहीं होतीं. इसलिए ग्रेच्युटी की गिनती 26 के हिसाब से की जाती है.
इस फॉर्मूले से कोई भी कर्मचारी अपनी ग्रेच्युटी खुद निकाल सकता है.
11 महीने काम किया है तब भी फायदा
ग्रेच्युटी का एक बड़ा फायदा यह है कि अगर किसी कर्मचारी ने एक साल से थोड़ा कम, यानी 11 महीने से ज्यादा काम किया है, तो उसे भी पूरा एक साल माना जा सकता है और ग्रेच्युटी मिल सकती है.
ग्रेच्युटी पर नहीं लगता टैक्स
ग्रेच्युटी पूरी तरह टैक्स फ्री होती है. जॉब बदलने वाले कर्मचारियों के लिए यह सबसे बड़ी राहत है, क्योंकि इस रकम पर कोई टैक्स नहीं देना पड़ता.
नौकरी बदलने से पहले जरूर समझें सैलरी- ग्रेच्युटी का हिसाब
अगर आप 2026 में जॉब बदलने का प्लान बना रहे हैं, तो अपनी बेसिक सैलरी, नौकरी का समय और ग्रेच्युटी का हिसाब जरूर लगाएं. थोड़ी सी जानकारी आपको अच्छा खासा फायदा दिला सकती है.
{नोट- यह जानकारी सामान्य नियमों पर आधारित है. असल रकम कंपनी की पॉलिसी और शर्तों के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती है.}
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