केंद्र सरकार ने खाना बनाने वाले बर्तनों और एल्युमिनियम के बर्तनों के लिए BIS मार्क अनिवार्य कर दिया है. इसके लिए नया क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर जारी किया है.एल्युमिनियम के बर्तनों पर और पेय पदार्थ वाली बोतलों यानी बेवरेज कैन के लिए भी ये BIS मानक तत्काल प्रभाव से लागू होगा. बड़े उद्योगों के लिए 1 अप्रैल से ये नियम लागू था, जबकि लघु उद्योगों के लिए 1 अक्टूबर से ये नियम लागू किया जाना था. ऐसे में मानकों का उल्लंघन करने पर BIS कानून के तहत कार्रवाई होगी. दिवाली और धनतेरस पर दिल्ली, उत्तर प्रदेश से लेकर ज्यादातर उत्तर भारत के राज्यों में बर्तनों की बिक्री होती है. खासकर धनतेरस के दिन बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है. इस दौरान कम क्वालिटी के बर्तन भी मार्केट में खपा दिए जाते हैं. ऐसे में सरकार ने सख्ती उठाते हुए बीआईएस मार्क अनिवार्य कर दिया है. घटिया एल्युमिनियम और अन्य धातुओं के मिश्रण से बनने वाले बर्तनों से सेहत को होने वाले नुकसान की बातें भी उठती रही हैं.
BIS का हॉलमार्क अनिवार्य
सरकार ने कुकवेयर और एल्युमिनियम के बर्तनों के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) का हॉलमार्क अनिवार्य कर दिया है. इसके लिए खाना बनाने के बर्तन और टिफिन गुणवत्ता नियंत्रण आदेश 2026 के तहत लागू किया गया है. BIS मार्क यह तय करेगा कि बर्तन बनाने में इस्तेमाल एल्युमिनियम और अन्य धातुएं हानिकारक हैं या नहीं है. इससे उपभोक्ताओं को बेहतर उत्पाद मिलेंगे.
कम क्वालिटी के बर्तनों पर सख्ती
घटिया और मिलावटी धातुओं से बने बर्तनों की बिक्री पर रोक लगेगी. BIS उत्पाद ज्यादा टिकाऊ और भरोसेमंद होंगे और आम लोगों की सेहत से कोई खिलवाड़ नहीं होगा. हालांकि कारोबारियों का कहना है कि सर्टिफिकेशन और बेहतर गुणवत्ता वाले कच्चे माल के इस्तेमाल से लागत बढ़ सकती है. इसके एल्युमिनियम के बर्तन और महंगे हो सकते हैं.
दुकानदारों ने कानून का उल्लंघन किया तो जुर्माना
उद्योग संगठन और सरकार का कहना है कि निर्माता पहले से ही गुणवत्ता मानकों का पालन कर रहे हैं. बाजार में घटिया और सस्ते उत्पादों से मिलने वाली कारोबारी दौड़ खत्म होगी. इससे अच्छी क्वालिटी उत्पादों की मांग बढ़ेगी.सूक्ष्म और लघु उद्योगों को BIS लाइसेंस, फैक्ट्री का ऑडिट कराने और उत्पादों की लैब-टेस्टिंग कराने की चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. सरकार ने उन्हें तैयारी के लिए मोहलत दी थी. ये नियम केवल घरेलू बाजार में बिकने वाले उत्पादों पर लागू होगा. निर्यात होने वाले बर्तनों को इससे छूट दी गई है. बर्तन निर्माता या दुकानदार बिना BIS मार्क वाले उत्पाद बेचते पाए जाएंगे. भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम 2016 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

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