बीमा अध्यादेश
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कोरोना वायरस का असर: सामाजिक सुरक्षा कोड को लेकर जल्दबाजी नहीं दिखाएगी सरकार
- Monday April 13, 2020
- Reported by: सुनील प्रभु, Translated by: नितेश श्रीवास्तव
लेबर कोड को पहले ही सदन में पेश किया जा चुका है. इनमें से वेतन संहिता को पास किया जा चुका है, जिसमें न्यूनतम मजदूरी, बोनस और समान पारिश्रमिक जैसे कानूनों को एक साथ रखा गया है. एक अध्यादेश, अन्य तीन को प्रभावित करेगा. जो तीन श्रम संहिताएं पेंडिंग हैं उनमें से एक सामाजिक सुरक्षा कोड है, जिसमें भविष्य निधि, बीमा, मैटरनिटी बेनिफिट जैसी सुविधाएं शामिल हैं. इसके अलावा दूसरा औद्योगिक संबंध कोड है जिसके अंतर्गत औद्योगिक विवाद, ट्रेड यूनियन जैसे कानून एक साथ हो जाएंगे और तीसरा है व्यावसायिक सुरक्षा, जिसके अंतर्गत कल्याण कानून जैसे नियम एक हो जाएंगे.
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दो बिलों पर सरकार ने किया 'युद्धविराम', जमीन अधिग्रहण पर अब भी खिंची हैं तलवारें
- Wednesday March 11, 2015
केंद्र सरकार ने दो महत्वपूर्ण बिलों पर विपक्ष के साथ फिलहाल युद्धविराम का रास्ता निकाल लिया है और माना जा रहा है कि अब गुरुवार को सरकार के लिए राज्यसभा में बीमा में विदेशी निवेश से जुड़ा बिल पास कराना आसान हो गया है, लेकिन जमीन अधिग्रहण कानून पर सरकार की दिक्कतें बरकरार हैं।
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बीमा और कोयला अध्यादेश पर राष्ट्रपति की मुहर
- Friday December 26, 2014
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने बीमा और कोयला क्षेत्र से जुड़े दो अध्यादेशों पर आज हस्ताक्षर कर दिए। इससे बीमा क्षेत्र में अतिरिक्त विदेशी निवेश आकर्षित करने और रद्द कोयला खानों के फिर से आबंटन करने का रास्ता साफ हो गया है।
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लेफ्ट ने राष्ट्रपति से की अध्यादेशों को मंजूरी न देने की मांग
- Wednesday December 24, 2014
दरअसल, असली टकराव बीमा के अध्यादेश को लेकर है। दोनों अध्यादेशों को मंज़ूरी देने के मोदी कैबिनेट के फैसले को चुनौती देते हुए लेफ्ट फ्रंट ने राष्ट्रपति को चिट्ठी लिखी है। सीपीएम नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति से गुज़ारिश की है वह इन अध्यादेशों को मंज़ूरी न दें।
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अहम सुधारों के लिए सरकार को क्यों लाना पड़ रहा है अध्यादेश
- Monday December 22, 2014
धर्म परिवर्तन पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप सोमवार को संसद के दोनों सदनों में दिखा, जिसकी वजह से राजनीतिक गतिरोध और बढ़ गया। इसका नतीजा यह हुआ कि आर्थिक सुधार से जुड़े कई अहम बिल अट गए हैं, जिनमें बीमा बिल, कोयला खदान बिल और मोटर वाहन संशोधन बिल सबसे अहम हैं।
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कोरोना वायरस का असर: सामाजिक सुरक्षा कोड को लेकर जल्दबाजी नहीं दिखाएगी सरकार
- Monday April 13, 2020
- Reported by: सुनील प्रभु, Translated by: नितेश श्रीवास्तव
लेबर कोड को पहले ही सदन में पेश किया जा चुका है. इनमें से वेतन संहिता को पास किया जा चुका है, जिसमें न्यूनतम मजदूरी, बोनस और समान पारिश्रमिक जैसे कानूनों को एक साथ रखा गया है. एक अध्यादेश, अन्य तीन को प्रभावित करेगा. जो तीन श्रम संहिताएं पेंडिंग हैं उनमें से एक सामाजिक सुरक्षा कोड है, जिसमें भविष्य निधि, बीमा, मैटरनिटी बेनिफिट जैसी सुविधाएं शामिल हैं. इसके अलावा दूसरा औद्योगिक संबंध कोड है जिसके अंतर्गत औद्योगिक विवाद, ट्रेड यूनियन जैसे कानून एक साथ हो जाएंगे और तीसरा है व्यावसायिक सुरक्षा, जिसके अंतर्गत कल्याण कानून जैसे नियम एक हो जाएंगे.
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दो बिलों पर सरकार ने किया 'युद्धविराम', जमीन अधिग्रहण पर अब भी खिंची हैं तलवारें
- Wednesday March 11, 2015
केंद्र सरकार ने दो महत्वपूर्ण बिलों पर विपक्ष के साथ फिलहाल युद्धविराम का रास्ता निकाल लिया है और माना जा रहा है कि अब गुरुवार को सरकार के लिए राज्यसभा में बीमा में विदेशी निवेश से जुड़ा बिल पास कराना आसान हो गया है, लेकिन जमीन अधिग्रहण कानून पर सरकार की दिक्कतें बरकरार हैं।
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बीमा और कोयला अध्यादेश पर राष्ट्रपति की मुहर
- Friday December 26, 2014
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने बीमा और कोयला क्षेत्र से जुड़े दो अध्यादेशों पर आज हस्ताक्षर कर दिए। इससे बीमा क्षेत्र में अतिरिक्त विदेशी निवेश आकर्षित करने और रद्द कोयला खानों के फिर से आबंटन करने का रास्ता साफ हो गया है।
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लेफ्ट ने राष्ट्रपति से की अध्यादेशों को मंजूरी न देने की मांग
- Wednesday December 24, 2014
दरअसल, असली टकराव बीमा के अध्यादेश को लेकर है। दोनों अध्यादेशों को मंज़ूरी देने के मोदी कैबिनेट के फैसले को चुनौती देते हुए लेफ्ट फ्रंट ने राष्ट्रपति को चिट्ठी लिखी है। सीपीएम नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति से गुज़ारिश की है वह इन अध्यादेशों को मंज़ूरी न दें।
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अहम सुधारों के लिए सरकार को क्यों लाना पड़ रहा है अध्यादेश
- Monday December 22, 2014
धर्म परिवर्तन पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप सोमवार को संसद के दोनों सदनों में दिखा, जिसकी वजह से राजनीतिक गतिरोध और बढ़ गया। इसका नतीजा यह हुआ कि आर्थिक सुधार से जुड़े कई अहम बिल अट गए हैं, जिनमें बीमा बिल, कोयला खदान बिल और मोटर वाहन संशोधन बिल सबसे अहम हैं।
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