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जजों के नाम पर घूस लेने का मामला : सुप्रीम कोर्ट ने 90 मिनट की सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा
- Monday November 13, 2017
- Reported by: आशीष कुमार भार्गव
मेडिकल कालेजों को राहत पहुंचाने के लिए जजों के नाम पर घूस लेने के मामले में खचाखच भरे कोर्ट रूम में सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने 90 मिनट की सुनवाई के बाद आदेश सुरक्षित रखा लिया है. कोर्ट का हाल ये था कि एजी के.के. वेणुगोपाल भी कोर्ट रूम में नहीं घुस पाए और उन्हें जज कॉरीडोर से कोर्टरूम में ले जाया गया. अब सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को ये तय करेगा कि कामिनी जयसवाल की याचिका पर सुनवाई की जाए या नहीं?
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ndtv.in
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जजों के नाम पर घूस लेने का मामला : सोमवार की सुनवाई रद्द, दो हफ्ते बाद अब तीन जजों की बेंच करेगी सुनवाई
- Friday November 10, 2017
- Reported by: आशीष भार्गव
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के वक्त जबरदस्त हंगामा हुआ. याचिकाकर्ता प्रशांत भूषण ने गुस्से में चीफ जस्टिस पर आरोप लगाए और बाद में वो चिल्लाकर बाहर निकल गये. चीफ जस्टिस ने कहा कि अगर इस तरह के आरोप लगाए जाएंगे तो संस्थान कभी काम नहीं कर सकता है. वहीं, इस मामले में कोर्ट रूम में बार एसोसिएशन और एएसजी ने प्रशांत का विरोध किया. इन्होंने मांग की कि प्रशांत भूषण के खिलाफ न्यायालय की अवमानना का मामला दर्ज हो. साथ ही इन लोगों ने मांग की कि कोर्ट में जो भी हुआ, इसे लेकर मीडिया को रिपोर्टिंग पर रोक लगाई जाए.
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जजों के नाम पर घूस लेने का मामला : सुप्रीम कोर्ट ने 90 मिनट की सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा
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मेडिकल कालेजों को राहत पहुंचाने के लिए जजों के नाम पर घूस लेने के मामले में खचाखच भरे कोर्ट रूम में सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने 90 मिनट की सुनवाई के बाद आदेश सुरक्षित रखा लिया है. कोर्ट का हाल ये था कि एजी के.के. वेणुगोपाल भी कोर्ट रूम में नहीं घुस पाए और उन्हें जज कॉरीडोर से कोर्टरूम में ले जाया गया. अब सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को ये तय करेगा कि कामिनी जयसवाल की याचिका पर सुनवाई की जाए या नहीं?
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जजों के नाम पर घूस लेने का मामला : सोमवार की सुनवाई रद्द, दो हफ्ते बाद अब तीन जजों की बेंच करेगी सुनवाई
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सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के वक्त जबरदस्त हंगामा हुआ. याचिकाकर्ता प्रशांत भूषण ने गुस्से में चीफ जस्टिस पर आरोप लगाए और बाद में वो चिल्लाकर बाहर निकल गये. चीफ जस्टिस ने कहा कि अगर इस तरह के आरोप लगाए जाएंगे तो संस्थान कभी काम नहीं कर सकता है. वहीं, इस मामले में कोर्ट रूम में बार एसोसिएशन और एएसजी ने प्रशांत का विरोध किया. इन्होंने मांग की कि प्रशांत भूषण के खिलाफ न्यायालय की अवमानना का मामला दर्ज हो. साथ ही इन लोगों ने मांग की कि कोर्ट में जो भी हुआ, इसे लेकर मीडिया को रिपोर्टिंग पर रोक लगाई जाए.
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