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पत्नी की भरण-पोषण राशि पति की आय के लगभग 25 प्रतिशत तक हो सकती है,पढ़ें इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ऐसा क्यों कहा
- Wednesday January 14, 2026
- Reported by: रनवीर सिंह, Edited by: Sachin Jha Shekhar
कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता पति ने किसी शारीरिक अक्षमता का दावा नहीं किया है इसलिए कोर्ट का मानना है कि याचिकाकर्ता/पति एक स्वस्थ व्यक्ति है और इसलिए वह अपनी पत्नी का भरण-पोषण करने की अपनी पवित्र दायित्व से पीछे नहीं हट सकता.
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पति ने कहा-कमाती हो तो हक नहीं.., कोर्ट ने दिया करारा जवाब, जानिए सुप्रीम कोर्ट और HC के 5 बड़े फैसले
- Tuesday January 13, 2026
- Written by: Sachin Jha Shekhar
सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के पांच अहम फैसलों ने स्पष्ट किया कि पत्नी की योग्यता, आय या अलगाव उसके भरण-पोषण के अधिकार को खत्म नहीं कर सकती.
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'पत्नी पढ़ी-लिखी है, गुजारा भत्ता क्यों दूं?' पति की दलील पर हाई कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला
- Tuesday January 13, 2026
- Reported by: भाषा, Edited by: पीयूष जयजान
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी की उच्च शिक्षा या व्यावसायिक कौशल भरण-पोषण से इनकार का आधार नहीं हो सकता.
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ndtv.in
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पहली शादी वैलिड रहने तक अपने पार्टनर से गुज़ारा भत्ता नहीं मांग सकती महिला...इलाहाबाद हाईकोर्ट
- Tuesday December 16, 2025
- Written by: Deepak Gambhir, Edited by: धीरज आव्हाड़
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला देते हुए कहा कि पहली शादी वैध होने पर महिला CRPC 125 के तहत दूसरी शादी या लिव‑इन जैसे रिश्ते से Maintenance नहीं मांग सकती. Court Judgment में स्पष्ट किया गया कि Hindu Marriage Act के अनुसार पहली शादी खत्म हुए बिना दूसरी शादी अमान्य होती है.
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मुस्लिम महिला के गुजारे भत्ते पर सुप्रीम फैसला आते ही याद आया शाह बानो केस? जानें क्या है ये मामला
- Thursday July 11, 2024
- NDTV
सुप्रीम कोर्ट ने अब मुस्लिम महिलाओं (Muslim Women) के अधिकार पर एक अहम फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मुस्लिम तलाकशुदा महिला भी सीआरपीसी की धारा 125 के तहत गुजारे भत्ते के लिए अपने पति के खिलाफ याचिका दायर कर सकती है. कोर्ट के इस फैसले को एक बड़ी नजीर माना जा रहा है.
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सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम महिलाओं को भी दिया गुजारे भत्ते का हक, कहा- धर्म रुकावट नहीं
- Wednesday July 10, 2024
- Reported by: आशीष भार्गव
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि अब समय आ गया है कि भारतीय पुरुष परिवार के लिए गृहिणी की भूमिका और त्याग को पहचानें. उन्हें संयुक्त खाते और एटीएम खोलकर उसे वित्तीय सहायता प्रदान करनी चाहिए.
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बरसात के मौसम में इस वजह से बढ़ जाता है जोड़ों का दर्द, जानिए सूजन और दर्द को कम करने के लिए क्या करें
- Tuesday July 11, 2023
- Translated by: Avdhesh Painuly
Joint Pain: फिजिकल एक्टिविटी का कॉम्बिनेशन, इनडोर क्लाइमेट और ट्रीटमेंट प्लान को फॉलो कर गठिया से पीड़ित व्यक्तियों को इस दौरान अपने दर्द को ठीक करने में मदद मिल सकती है.
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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब, क्या सभी धर्मों में तलाक-भत्ता के लिए बना सकते हैं समान कानून?
- Wednesday December 16, 2020
- Reported by: आशीष भार्गव, Edited by: सिद्धार्थ चौरसिया
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से तलाक के कानूनों में विसंगतियों को दूर करने के लिए कदम उठाने की बाबत केंद्र सरकार को निर्देश दिए जाने की मांग की गई है. याचिका में कहा गया है कि शीर्ष अदालत तलाक के मसले पर धर्म, नस्ल, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर पूर्वाग्रह नहीं रखते हुए सभी नागरिकों के लिए समान कानून बनाने के लिए केंद्र सरकार को निर्देश जारी करे.
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पत्नी की भरण-पोषण राशि पति की आय के लगभग 25 प्रतिशत तक हो सकती है,पढ़ें इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ऐसा क्यों कहा
- Wednesday January 14, 2026
- Reported by: रनवीर सिंह, Edited by: Sachin Jha Shekhar
कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता पति ने किसी शारीरिक अक्षमता का दावा नहीं किया है इसलिए कोर्ट का मानना है कि याचिकाकर्ता/पति एक स्वस्थ व्यक्ति है और इसलिए वह अपनी पत्नी का भरण-पोषण करने की अपनी पवित्र दायित्व से पीछे नहीं हट सकता.
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला देते हुए कहा कि पहली शादी वैध होने पर महिला CRPC 125 के तहत दूसरी शादी या लिव‑इन जैसे रिश्ते से Maintenance नहीं मांग सकती. Court Judgment में स्पष्ट किया गया कि Hindu Marriage Act के अनुसार पहली शादी खत्म हुए बिना दूसरी शादी अमान्य होती है.
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- Thursday July 11, 2024
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सुप्रीम कोर्ट ने अब मुस्लिम महिलाओं (Muslim Women) के अधिकार पर एक अहम फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मुस्लिम तलाकशुदा महिला भी सीआरपीसी की धारा 125 के तहत गुजारे भत्ते के लिए अपने पति के खिलाफ याचिका दायर कर सकती है. कोर्ट के इस फैसले को एक बड़ी नजीर माना जा रहा है.
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- Reported by: आशीष भार्गव
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- Reported by: आशीष भार्गव, Edited by: सिद्धार्थ चौरसिया
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से तलाक के कानूनों में विसंगतियों को दूर करने के लिए कदम उठाने की बाबत केंद्र सरकार को निर्देश दिए जाने की मांग की गई है. याचिका में कहा गया है कि शीर्ष अदालत तलाक के मसले पर धर्म, नस्ल, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर पूर्वाग्रह नहीं रखते हुए सभी नागरिकों के लिए समान कानून बनाने के लिए केंद्र सरकार को निर्देश जारी करे.
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