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'पड़ोसी से बहस आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं, आपसी झगड़े समाज में आम बात', सुप्रीम कोर्ट ने कहा
- Wednesday September 10, 2025
उच्चतम न्यायालय कर्नाटक उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें उच्च न्यायालय ने आरोपी महिला को आईपीसी की धारा 306 के तहत दोषी ठहराया था.
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महिलाओं के जिम में पुरुष प्रशिक्षक क्यों? हाई कोर्ट ने जताई चिंता, ट्रेनर पर गंदी वीडियो बनाने के आरोप
- Tuesday September 2, 2025
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, 'यह चिंताजनक है कि वर्तमान समय में महिलाओं को पुरुष प्रशिक्षक ट्रेनिंग दे रहे हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा और सम्मान के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं है.'
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फर्जी एनकाउंटर में 'SSP-DSP' समेत 5 दोषी, तीन दशक पुराने केस में CBI कोर्ट का अहम फैसला
- Friday August 1, 2025
फर्जी एनकाउंटर का यह मामला 1993 में पंजाब में अमृतसर के दो थानों से जुड़ा है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केस सीबीआई ने लिया था. अब स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने तत्कालीन एसएसपी-डीएसपी समेत पांच पूर्व पुलिस अफसरों को हत्या का दोषी करार दिया है.
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समलैंगिकता को अपराध बताने वाली IPC की धारा 377 को लेकर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई बंद की
- Thursday February 8, 2024
समलैंगिकता को अपराध बताने वाली आईपीसी की धारा 377 के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने क्यूरेटिव याचिका का निस्तारण कर सुनवाई बंद कर दी. पांच जजों की संविधान पीठ ने कहा कि इस संबंध में 2018 में नवतेज सिंह जौहर केस में फैसला आ चुका है, लिहाजा यह याचिका निष्प्रभावी हो गई है.
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CrPC की धारा 64 के प्रावधान को चुनौती देने का मामला: SC ने जांच के लिए केंद्र को और 3 महीने का समय दिया
- Thursday April 6, 2023
सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने बताया कि CrPC और IPC प्रावधानों में संशोधन के लिए सरकार सक्रिय तौर पर विचार विमर्श कर रही है. इसमें राजद्रोह कानून भी विचार शामिल है. सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्र को जांच के लिए तीन महीने का और समय दिया है.
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राजद्रोह की धारा के खिलाफ डाली गई याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, कही ये बात
- Tuesday February 9, 2021
सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश (CJI) एस. ए. बोबडे ने कहा कि याचिकाकर्ता इससे कैसे प्रभावित है? आप पर क्या कॉज ऑफ एक्शन है. आपके खिलाफ कोई केस नहीं है. हमने पहले ही तय कर रखा है कि जब तक कोई कॉज ऑफ एक्शन नहीं होगा तो आप इसी तरह कानून को चुनौती नहीं दे सकते हैं. हमारे पास ऐसा कोई केस नहीं है जो जेल में सड़ रहा हो. आप अगर ठोस केस के साथ आते हैं तो देखेंगे.
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लॉकडाउन का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ एफआईआर रद्द करने की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की
- Tuesday May 5, 2020
लॉकडाउन का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आईपीसी धारा 188 के तहत दर्ज एफआईआर रद्द करने की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की. सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी डॉ विक्रम सिंह की याचिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर कार्रवाई नहीं की जाती है तो फिर लॉकडाउन का पालन कैसे कराया जाएगा. कोर्ट ने कहा कि हम हैरान हैं कि ये कैसी- कैसी याचिकाएं दाखिल की जा रही हैं. इसके पीछे कोई एजेंडा हो सकता है.
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Coronavirus: मुंबई पुलिस ने समूह यात्रा पर रोक लगाने के लिए धारा 144 लागू की
- Sunday March 15, 2020
- Bhasha
Coronavirus: कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के मद्देनजर मुंबई पुलिस (Mumbai Police) ने विदेशी या घरेलू पर्यटन स्थलों पर समूह यात्रा कराने से टूर ऑपरेटरों को रोकने के लिए सीआरपीसी की धारा 144 (Section 144) लागू कर दी गई है.
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तनुश्री दत्ता से पुलिस ने 5 घंटे तक पूछे कई सवाल, फिर नाना समेत 4 के खिलाफ केस दर्ज, अभी तक गिरफ्तारी नहीं
- Thursday October 11, 2018
पुलिस ने नाना पाटेकर समेत चार आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 354 और 509 के तहत मामला दर्ज किया है. शाम 7 बजकर 10 मिनट पर ओशिवरा थाने पहुंची तनुश्री पूरे 5 घंटे बाद रात 12 बजकर 10 मिनट पर थाने से बाहर निकलीं.
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सुप्रीम कोर्ट बोला: व्यभिचार अपराध नहीं, पति, पत्नी का मालिक नहीं, पढ़ें इस मामले की पूरी टाइमलाइन
- Thursday September 27, 2018
- NDTVKhabar News Desk
सुप्रीम कोर्ट ने व्यभिचार कानून को रद्द कर दिया और अब से यह अपराध नहीं रहा. सुप्रीम कोर्ट की प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से व्यभिचार से संबंधित दंडात्मक प्रावधान को असंवैधानिक करार देते हुए उसे मनमाना और महिलाओं की व्यक्तिकता को ठेस पहुंचाने वाला बताते हुए निरस्त किया. मुख्य न्यायधीश दीपक मिश्रा ने कहा, "व्यभिचार अपराध नहीं हो सकता. यह निजता का मामला है. पति, पत्नी का मालिक नहीं है. महिलाओं के साथ पुरूषों के समान ही व्यवहार किया जाना. इस मामले में हुई सुनवाई से संबंधित घटनाक्रम कुछ इस प्रकार रहा.
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सुप्रीम कोर्ट के ये हैं 5 जज, जिन्होंने समलैंगिकता के बाद अब व्यभिचार को किया अपराध से बाहर
- Thursday September 27, 2018
- NDTVKhabar News Desk
158 साल पुराने कानून IPC 497 (व्यभिचार) की वैधता (Adultery under Section 497) पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अपना फैसला सुना दिया. सुप्रीम कोर्ट के पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने व्यभिचार को आपराधिक कृत्य बताने वाले दंडात्मक प्रावधान को सर्वसम्मति से निरस्त किया. सुप्रीम कोर्ट ने 157 साल पुराने व्यभिचार को रद्द कर दिया और कहा कि किसी पुरुष द्वारा विवाहित महिला से यौन संबंध बनाना अपराध नहीं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि व्यभिचार कानून असंवैधानिक है. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि व्यभिचार कानून मनमाना और भेदभावपूर्ण है. यह लैंगिक समानता के खिलाफ है. मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस रोहिंटन नरीमन, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदु मल्होत्रा के संविधान पीठ ने यह फैसला सुनाया है. बता दें कि इस पीठ ने ही धारा 377 पर अपना अहम फैसला सुनाया था. इससे पहले इसी बेंच ने समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से अलग किया था. तो चलिए जानते हैं उन पांचों जजों के बारे में...
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जानें क्या है IPC 497? सुप्रीम कोर्ट ने 158 साल पुराने व्यभिचार कानून को किया खत्म
- Thursday September 27, 2018
- NDTVKhabar News Desk
सुप्रीम कोर्ट ने व्यभिचार-रोधी कानून को रद्द कर दिया है और कहा है कि व्यभिचार अपराध नहीं है. कोर्ट ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं कि यह तलाक का आधार हो सकता है लेकिन यह कानून महिला के जीने के अधिकार पर असर डालता है.
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Supreme Court verdict on Adultery : चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा- महिला का मास्टर नहीं होता है पति , फैसले की 10 बातें
- Thursday September 27, 2018
- Ashish Bhargava
व्यभिचार कानून की वैधता (Supreme Court verdict on Adultery under Section 497) पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अहम फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जो भी कानून महिला को उसकी गरिमा से विपरीत या भेदभाव करता है वो संविधान के कोप को आमंत्रित करता है. ऐसे प्रावधान असंवैंधानिक है. सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों की संविधान पीठ ने 9 अगस्त को व्यभिचार की धारा IPC 497 पर फैसला सुरक्षित रखा था. पीठ के सामने मसला उठा था कि आइपीसी की धारा 497 ध अंसवैधानिक है या नहीं, क्योंकि इसमें सिर्फ पुरुषों को आरोपी बनाया जाता है, महिलाओं को नहीं. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा- महिला का मास्टर नहीं होता है पति. जानिए दस बातें
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158 साल पुराने व्यभिचार कानून को सुप्रीम कोर्ट ने किया रद्द, संविधान पीठ ने कहा- यह अपराध नहीं
- Thursday September 27, 2018
157 साल पुराने कानून IPC 497 (व्यभिचार) की वैधता (Supreme Court verdict on Adultery under Section 497) पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court)का फैसला गुरुवार को आएगा. सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों की संविधान पीठ ने 9 अगस्त को व्यभिचार की धारा IPC 497 पर फैसला सुरक्षित रखा था. पीठ तय करेगी कि यह धारा अंसवैधानिक है या नहीं, क्योंकि इसमें सिर्फ पुरुषों को आरोपी बनाया जाता है, महिलाओं को नहीं.
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'पड़ोसी से बहस आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं, आपसी झगड़े समाज में आम बात', सुप्रीम कोर्ट ने कहा
- Wednesday September 10, 2025
उच्चतम न्यायालय कर्नाटक उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें उच्च न्यायालय ने आरोपी महिला को आईपीसी की धारा 306 के तहत दोषी ठहराया था.
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महिलाओं के जिम में पुरुष प्रशिक्षक क्यों? हाई कोर्ट ने जताई चिंता, ट्रेनर पर गंदी वीडियो बनाने के आरोप
- Tuesday September 2, 2025
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, 'यह चिंताजनक है कि वर्तमान समय में महिलाओं को पुरुष प्रशिक्षक ट्रेनिंग दे रहे हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा और सम्मान के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं है.'
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फर्जी एनकाउंटर में 'SSP-DSP' समेत 5 दोषी, तीन दशक पुराने केस में CBI कोर्ट का अहम फैसला
- Friday August 1, 2025
फर्जी एनकाउंटर का यह मामला 1993 में पंजाब में अमृतसर के दो थानों से जुड़ा है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केस सीबीआई ने लिया था. अब स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने तत्कालीन एसएसपी-डीएसपी समेत पांच पूर्व पुलिस अफसरों को हत्या का दोषी करार दिया है.
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समलैंगिकता को अपराध बताने वाली IPC की धारा 377 को लेकर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई बंद की
- Thursday February 8, 2024
समलैंगिकता को अपराध बताने वाली आईपीसी की धारा 377 के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने क्यूरेटिव याचिका का निस्तारण कर सुनवाई बंद कर दी. पांच जजों की संविधान पीठ ने कहा कि इस संबंध में 2018 में नवतेज सिंह जौहर केस में फैसला आ चुका है, लिहाजा यह याचिका निष्प्रभावी हो गई है.
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CrPC की धारा 64 के प्रावधान को चुनौती देने का मामला: SC ने जांच के लिए केंद्र को और 3 महीने का समय दिया
- Thursday April 6, 2023
सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने बताया कि CrPC और IPC प्रावधानों में संशोधन के लिए सरकार सक्रिय तौर पर विचार विमर्श कर रही है. इसमें राजद्रोह कानून भी विचार शामिल है. सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्र को जांच के लिए तीन महीने का और समय दिया है.
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राजद्रोह की धारा के खिलाफ डाली गई याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, कही ये बात
- Tuesday February 9, 2021
सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश (CJI) एस. ए. बोबडे ने कहा कि याचिकाकर्ता इससे कैसे प्रभावित है? आप पर क्या कॉज ऑफ एक्शन है. आपके खिलाफ कोई केस नहीं है. हमने पहले ही तय कर रखा है कि जब तक कोई कॉज ऑफ एक्शन नहीं होगा तो आप इसी तरह कानून को चुनौती नहीं दे सकते हैं. हमारे पास ऐसा कोई केस नहीं है जो जेल में सड़ रहा हो. आप अगर ठोस केस के साथ आते हैं तो देखेंगे.
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लॉकडाउन का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ एफआईआर रद्द करने की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की
- Tuesday May 5, 2020
लॉकडाउन का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आईपीसी धारा 188 के तहत दर्ज एफआईआर रद्द करने की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की. सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी डॉ विक्रम सिंह की याचिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर कार्रवाई नहीं की जाती है तो फिर लॉकडाउन का पालन कैसे कराया जाएगा. कोर्ट ने कहा कि हम हैरान हैं कि ये कैसी- कैसी याचिकाएं दाखिल की जा रही हैं. इसके पीछे कोई एजेंडा हो सकता है.
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Coronavirus: मुंबई पुलिस ने समूह यात्रा पर रोक लगाने के लिए धारा 144 लागू की
- Sunday March 15, 2020
- Bhasha
Coronavirus: कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के मद्देनजर मुंबई पुलिस (Mumbai Police) ने विदेशी या घरेलू पर्यटन स्थलों पर समूह यात्रा कराने से टूर ऑपरेटरों को रोकने के लिए सीआरपीसी की धारा 144 (Section 144) लागू कर दी गई है.
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तनुश्री दत्ता से पुलिस ने 5 घंटे तक पूछे कई सवाल, फिर नाना समेत 4 के खिलाफ केस दर्ज, अभी तक गिरफ्तारी नहीं
- Thursday October 11, 2018
पुलिस ने नाना पाटेकर समेत चार आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 354 और 509 के तहत मामला दर्ज किया है. शाम 7 बजकर 10 मिनट पर ओशिवरा थाने पहुंची तनुश्री पूरे 5 घंटे बाद रात 12 बजकर 10 मिनट पर थाने से बाहर निकलीं.
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सुप्रीम कोर्ट बोला: व्यभिचार अपराध नहीं, पति, पत्नी का मालिक नहीं, पढ़ें इस मामले की पूरी टाइमलाइन
- Thursday September 27, 2018
- NDTVKhabar News Desk
सुप्रीम कोर्ट ने व्यभिचार कानून को रद्द कर दिया और अब से यह अपराध नहीं रहा. सुप्रीम कोर्ट की प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से व्यभिचार से संबंधित दंडात्मक प्रावधान को असंवैधानिक करार देते हुए उसे मनमाना और महिलाओं की व्यक्तिकता को ठेस पहुंचाने वाला बताते हुए निरस्त किया. मुख्य न्यायधीश दीपक मिश्रा ने कहा, "व्यभिचार अपराध नहीं हो सकता. यह निजता का मामला है. पति, पत्नी का मालिक नहीं है. महिलाओं के साथ पुरूषों के समान ही व्यवहार किया जाना. इस मामले में हुई सुनवाई से संबंधित घटनाक्रम कुछ इस प्रकार रहा.
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सुप्रीम कोर्ट के ये हैं 5 जज, जिन्होंने समलैंगिकता के बाद अब व्यभिचार को किया अपराध से बाहर
- Thursday September 27, 2018
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158 साल पुराने कानून IPC 497 (व्यभिचार) की वैधता (Adultery under Section 497) पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अपना फैसला सुना दिया. सुप्रीम कोर्ट के पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने व्यभिचार को आपराधिक कृत्य बताने वाले दंडात्मक प्रावधान को सर्वसम्मति से निरस्त किया. सुप्रीम कोर्ट ने 157 साल पुराने व्यभिचार को रद्द कर दिया और कहा कि किसी पुरुष द्वारा विवाहित महिला से यौन संबंध बनाना अपराध नहीं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि व्यभिचार कानून असंवैधानिक है. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि व्यभिचार कानून मनमाना और भेदभावपूर्ण है. यह लैंगिक समानता के खिलाफ है. मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस रोहिंटन नरीमन, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदु मल्होत्रा के संविधान पीठ ने यह फैसला सुनाया है. बता दें कि इस पीठ ने ही धारा 377 पर अपना अहम फैसला सुनाया था. इससे पहले इसी बेंच ने समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से अलग किया था. तो चलिए जानते हैं उन पांचों जजों के बारे में...
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जानें क्या है IPC 497? सुप्रीम कोर्ट ने 158 साल पुराने व्यभिचार कानून को किया खत्म
- Thursday September 27, 2018
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सुप्रीम कोर्ट ने व्यभिचार-रोधी कानून को रद्द कर दिया है और कहा है कि व्यभिचार अपराध नहीं है. कोर्ट ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं कि यह तलाक का आधार हो सकता है लेकिन यह कानून महिला के जीने के अधिकार पर असर डालता है.
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Supreme Court verdict on Adultery : चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा- महिला का मास्टर नहीं होता है पति , फैसले की 10 बातें
- Thursday September 27, 2018
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व्यभिचार कानून की वैधता (Supreme Court verdict on Adultery under Section 497) पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अहम फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जो भी कानून महिला को उसकी गरिमा से विपरीत या भेदभाव करता है वो संविधान के कोप को आमंत्रित करता है. ऐसे प्रावधान असंवैंधानिक है. सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों की संविधान पीठ ने 9 अगस्त को व्यभिचार की धारा IPC 497 पर फैसला सुरक्षित रखा था. पीठ के सामने मसला उठा था कि आइपीसी की धारा 497 ध अंसवैधानिक है या नहीं, क्योंकि इसमें सिर्फ पुरुषों को आरोपी बनाया जाता है, महिलाओं को नहीं. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा- महिला का मास्टर नहीं होता है पति. जानिए दस बातें
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158 साल पुराने व्यभिचार कानून को सुप्रीम कोर्ट ने किया रद्द, संविधान पीठ ने कहा- यह अपराध नहीं
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157 साल पुराने कानून IPC 497 (व्यभिचार) की वैधता (Supreme Court verdict on Adultery under Section 497) पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court)का फैसला गुरुवार को आएगा. सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों की संविधान पीठ ने 9 अगस्त को व्यभिचार की धारा IPC 497 पर फैसला सुरक्षित रखा था. पीठ तय करेगी कि यह धारा अंसवैधानिक है या नहीं, क्योंकि इसमें सिर्फ पुरुषों को आरोपी बनाया जाता है, महिलाओं को नहीं.
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