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Success Story : कौन हैं देश की पहली महिला ब्लाइंड जज थान्या नाथन? जानिए यहां
- Saturday February 21, 2026
- Written by: सुभाषिनी त्रिपाठी
थान्या नाथन ने केरल ज्यूडिशियल सर्विस परीक्षा 2025 में बाजी मारकर पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है. वह न केवल केरल की पहली पूरी तरह से दृष्टिहीन (100% Visually Impaired) महिला जज बनने जा रही हैं, बल्कि उनकी यह जीत करोड़ों लोगों के लिए एक मिसाल है.
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33 साल पहले 225 रुपये की छिनतई, 5 में से 2 आरोपियों का निधन, अब आया फैसला
- Wednesday February 18, 2026
- Reported by: प्रभाकर कुमार, Edited by: निलेश कुमार
कानूनी जानकारों का कहना है कि ऐसे मामलों में देरी के कई कारण होते हैं. गवाहों की अनुपस्थिति, तारीख पर तारीख, न्यायालयों में लंबित मामलों की अधिक संख्या और सीमित संसाधन इसकी बड़ी वजह हैं.
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Exclusive: ऑनलाइन ट्रोलिंग गलत, संसद को कानून बनाना चाहिए... पूर्व CJI बीआर गवई ने कही दिल की बात
- Wednesday November 26, 2025
- Reported by: आशीष भार्गव, Edited by: प्रभांशु रंजन
Former CJI BR Gavai Interview: हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायधीश पद से रिटायर हुई जस्टिस बीआर गवई ने बुधवार को NDTV से हुई खास बातचीत में अपनी जर्नी, अपने दिए फैसलों के साथ-साथ अन्य मुद्दों पर खुलकर बात की.
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50 का कपड़ा, 100 का चावल, 150 की घड़ी चोरी... 5 ऐसे मामले जिनमें मिलती रही तारीख पर तारीख, दशकों बाद आया फैसला
- Tuesday August 5, 2025
- Written by: निलेश कुमार
बिहार में 1985 में हुआ एक मामूली जमीन विवाद भी ऐसा ही एक उदाहरण है, जो 35 साल तक चलता रहा. कई पक्षकार गुजर गए, जो बचे, उनके बीच आखिरकार 2020 में बातचीत से मामला सुलझा और कोर्ट ने केस क्लोज किया.
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भारत की न्याय व्यवस्था अपनी सीमाओं से बाहर भी भारतीयों के साथ न्यायपूर्ण व्यवहार करती है : जस्टिस सूर्यकांत
- Tuesday June 10, 2025
- Reported by: आशीष भार्गव
जस्टिस सूर्य कांत अमेरिका के सिएटल में वॉशिंगटन तेलंगाना एसोसिएशन (WTA) द्वारा आयोजित समारोह में बोल रहे थे...
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CJI गवई ने की कॉलेजियम सिस्टम की वकालत, कोई समाधान न्यायिक स्वतंत्रता की कीमत पर नहीं
- Wednesday June 4, 2025
- Reported by: आशीष भार्गव
एक कड़े बयान में CJI गवई ने जोर देकर कहा है कि कॉलेजियम प्रणाली की आलोचना हो सकती है, लेकिन कोई भी समाधान न्यायिक स्वतंत्रता की कीमत पर नहीं आना चाहिए. जजों को बाहरी नियंत्रण से मुक्त होना चाहिए.
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सभी नागरिकों को इंसाफ पाने का हक, काम आसान नहीं... कोशिश जारी रखेंगे : जस्टिस बीआर गवई
- Tuesday December 10, 2024
- Reported by: आशीष भार्गव, Edited by: अंजलि कर्मकार
जस्टिस गवई कहते हैं, "अंडर ट्रायल कैदियों के भी कुछ अधिकार होते हैं. उनके बेसिक राइट्स को आप इग्नोर नहीं कर सकते. नालसा ऐसे ही कैदियों की मदद के लिए है. यहां तक कि ट्रायल के बाद भी जो कैदी जेल में पड़े हुए हैं, नालसा उन्हें जमानत दिलाने की कोशिश करता है."
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क्यों हो रही है कैदियों की इलेक्ट्रानिक निगरानी की बात, क्या यह निजता के अधिकार का उल्लंघन होगा
- Tuesday December 3, 2024
- Written by: राजेश कुमार आर्य
सुप्रीम कोर्ट की एक रिपोर्ट में जमानत पर या दूसरे तरीकों से रिहा हुए कैदियों की इलेक्ट्रानिक उपकरणों से निगरानी की वकालत की गई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसी निगरानी से जेलों में से कैदियों की भीड़ कम होगी. इस निगरानी के कुछ नैतिक पहलू भी हैं.
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तीन दशक पुराने कॉलेजियम सिस्टम को लेकर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला
- Friday September 6, 2024
- Reported by: आशीष भार्गव
तीन दशक पुराने कॉलेजियम सिस्टम को लेकर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला आया है. यह जजों की नियुक्ति को लेकर पहली बार सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक कदम है. हाईकोर्ट कॉलेजियम सामूहिक रूप से हाईकोर्ट के जजों के लिए नामों की सिफारिश करने का फैसला करते हैं, हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश व्यक्तिगत रूप से इस संबंध में फैसला नहीं ले सकते.
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अदालती कार्यवाही से तंग आ चुका है आम आदमी : CJI जस्टिस चंद्रचूड़ ने लोक अदालतों पर जोर दिया
- Saturday August 3, 2024
- Edited by: सूर्यकांत पाठक
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने शनिवार को अदालती कार्यवाही से "तंग" हो चुके आम लोगों की दुर्दशा को देखते हुए वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र के रूप में लोक अदालतों का महत्व स्पष्ट किया. उन्होंने जोर देकर कहा कि न्यायिक प्रक्रिया वादियों के लिए एक सजा है. इसके कारण वे अक्सर अपने कानूनी अधिकारों से भी कम समझौते स्वीकार करके थकाऊ मुकदमेबाजी को समाप्त करने के लिए हताश होकर समझौतों की तलाश करते हैं.
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Success Story : कौन हैं देश की पहली महिला ब्लाइंड जज थान्या नाथन? जानिए यहां
- Saturday February 21, 2026
- Written by: सुभाषिनी त्रिपाठी
थान्या नाथन ने केरल ज्यूडिशियल सर्विस परीक्षा 2025 में बाजी मारकर पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है. वह न केवल केरल की पहली पूरी तरह से दृष्टिहीन (100% Visually Impaired) महिला जज बनने जा रही हैं, बल्कि उनकी यह जीत करोड़ों लोगों के लिए एक मिसाल है.
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33 साल पहले 225 रुपये की छिनतई, 5 में से 2 आरोपियों का निधन, अब आया फैसला
- Wednesday February 18, 2026
- Reported by: प्रभाकर कुमार, Edited by: निलेश कुमार
कानूनी जानकारों का कहना है कि ऐसे मामलों में देरी के कई कारण होते हैं. गवाहों की अनुपस्थिति, तारीख पर तारीख, न्यायालयों में लंबित मामलों की अधिक संख्या और सीमित संसाधन इसकी बड़ी वजह हैं.
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Exclusive: ऑनलाइन ट्रोलिंग गलत, संसद को कानून बनाना चाहिए... पूर्व CJI बीआर गवई ने कही दिल की बात
- Wednesday November 26, 2025
- Reported by: आशीष भार्गव, Edited by: प्रभांशु रंजन
Former CJI BR Gavai Interview: हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायधीश पद से रिटायर हुई जस्टिस बीआर गवई ने बुधवार को NDTV से हुई खास बातचीत में अपनी जर्नी, अपने दिए फैसलों के साथ-साथ अन्य मुद्दों पर खुलकर बात की.
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50 का कपड़ा, 100 का चावल, 150 की घड़ी चोरी... 5 ऐसे मामले जिनमें मिलती रही तारीख पर तारीख, दशकों बाद आया फैसला
- Tuesday August 5, 2025
- Written by: निलेश कुमार
बिहार में 1985 में हुआ एक मामूली जमीन विवाद भी ऐसा ही एक उदाहरण है, जो 35 साल तक चलता रहा. कई पक्षकार गुजर गए, जो बचे, उनके बीच आखिरकार 2020 में बातचीत से मामला सुलझा और कोर्ट ने केस क्लोज किया.
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भारत की न्याय व्यवस्था अपनी सीमाओं से बाहर भी भारतीयों के साथ न्यायपूर्ण व्यवहार करती है : जस्टिस सूर्यकांत
- Tuesday June 10, 2025
- Reported by: आशीष भार्गव
जस्टिस सूर्य कांत अमेरिका के सिएटल में वॉशिंगटन तेलंगाना एसोसिएशन (WTA) द्वारा आयोजित समारोह में बोल रहे थे...
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CJI गवई ने की कॉलेजियम सिस्टम की वकालत, कोई समाधान न्यायिक स्वतंत्रता की कीमत पर नहीं
- Wednesday June 4, 2025
- Reported by: आशीष भार्गव
एक कड़े बयान में CJI गवई ने जोर देकर कहा है कि कॉलेजियम प्रणाली की आलोचना हो सकती है, लेकिन कोई भी समाधान न्यायिक स्वतंत्रता की कीमत पर नहीं आना चाहिए. जजों को बाहरी नियंत्रण से मुक्त होना चाहिए.
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सभी नागरिकों को इंसाफ पाने का हक, काम आसान नहीं... कोशिश जारी रखेंगे : जस्टिस बीआर गवई
- Tuesday December 10, 2024
- Reported by: आशीष भार्गव, Edited by: अंजलि कर्मकार
जस्टिस गवई कहते हैं, "अंडर ट्रायल कैदियों के भी कुछ अधिकार होते हैं. उनके बेसिक राइट्स को आप इग्नोर नहीं कर सकते. नालसा ऐसे ही कैदियों की मदद के लिए है. यहां तक कि ट्रायल के बाद भी जो कैदी जेल में पड़े हुए हैं, नालसा उन्हें जमानत दिलाने की कोशिश करता है."
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क्यों हो रही है कैदियों की इलेक्ट्रानिक निगरानी की बात, क्या यह निजता के अधिकार का उल्लंघन होगा
- Tuesday December 3, 2024
- Written by: राजेश कुमार आर्य
सुप्रीम कोर्ट की एक रिपोर्ट में जमानत पर या दूसरे तरीकों से रिहा हुए कैदियों की इलेक्ट्रानिक उपकरणों से निगरानी की वकालत की गई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसी निगरानी से जेलों में से कैदियों की भीड़ कम होगी. इस निगरानी के कुछ नैतिक पहलू भी हैं.
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तीन दशक पुराने कॉलेजियम सिस्टम को लेकर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला
- Friday September 6, 2024
- Reported by: आशीष भार्गव
तीन दशक पुराने कॉलेजियम सिस्टम को लेकर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला आया है. यह जजों की नियुक्ति को लेकर पहली बार सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक कदम है. हाईकोर्ट कॉलेजियम सामूहिक रूप से हाईकोर्ट के जजों के लिए नामों की सिफारिश करने का फैसला करते हैं, हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश व्यक्तिगत रूप से इस संबंध में फैसला नहीं ले सकते.
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अदालती कार्यवाही से तंग आ चुका है आम आदमी : CJI जस्टिस चंद्रचूड़ ने लोक अदालतों पर जोर दिया
- Saturday August 3, 2024
- Edited by: सूर्यकांत पाठक
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने शनिवार को अदालती कार्यवाही से "तंग" हो चुके आम लोगों की दुर्दशा को देखते हुए वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र के रूप में लोक अदालतों का महत्व स्पष्ट किया. उन्होंने जोर देकर कहा कि न्यायिक प्रक्रिया वादियों के लिए एक सजा है. इसके कारण वे अक्सर अपने कानूनी अधिकारों से भी कम समझौते स्वीकार करके थकाऊ मुकदमेबाजी को समाप्त करने के लिए हताश होकर समझौतों की तलाश करते हैं.
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