ब्रिटेन में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूरी तरह से बैन नहीं होगा. जहां एक तरफ कई देश सोशल मीडिया से बच्चों को दूर कर रहे हैं वहीं, ब्रिटेन में सरकार ने यह फैसला लिया कि सोशल मीडिया कंपनियों को बच्चों की सुरक्षा के लिए अपने नियम और तकनीक को और मजबूत बनाना होगा. ब्रिटेन के सांसदों ने काफी लंबी चर्चा के बाद यह फैसला लिया.
UK ने कई बड़ी टेक कंपनियों को चेतावनी दी है कि वे बच्चों की सुरक्षा को लेकर अपने सिस्टम को और मजबूत करें. जिन कंपनियों को यह चेतावनी दी गई है उनमें YouTube, TikTok, Facebook, Instagram और Snapchat शामिल हैं. बता दें, Ofcom और Information Commissioner's Office (ICO) ने मिलकर बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों को पत्र भेजा और उनसे बच्चों की सुरक्षा के लिए मजबूत कदम उठाने को कहा है.
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अब इन प्लेटफॉर्म्स को सबसे पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि कम उम्र के बच्चे आसानी से उनके प्लेटफॉर्म पर अकाउंट न बना सकें. इसके अलावा उन्हें ऐसे सिस्टम बनाने होंगे जो बच्चों को अनजान लोगों और खतरनाक कंटेंट से बचाएं.

अभी ज्यादातर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एज जांचने का तरीका बहुत कमजोर है. आमतौर पर यूजर से सिर्फ उसकी उम्र पूछी जाती है और वही जानकारी मान ली जाती है, लेकिन बच्चे आसानी से गलत उम्र लिखकर अकाउंट बना सकते हैं.
इसी वजह से Information Commissioner's Office ने सुझाव दिया है कि कंपनियों को नई तकनीक का इस्तेमाल करना चाहिए. इसमें फेशियल एज एस्टिमेशन, डिजिटल आईडी चेक और एक बार फोटो मैचिंग जैसे तरीके शामिल हो सकते हैं. इन तकनीकों की मदद से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि कोई यूजर वास्तव में कितनी उम्र का है.
अब इस फैसले के बाद टेक कंपनियों पर दबाव और बढ़ गया है. कई देशों की सरकारें अब सोशल मीडिया और बच्चों की सुरक्षा को लेकर कड़े नियम बना रही हैं. जैसे Australia ने दिसंबर में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर सख्त प्रतिबंध लागू किया था. वहीं, स्पेन, फ्रांस और डेनमार्क जैसे यूरोपीय देश भी इसी तरह के नियमों पर विचार कर रहे हैं.
वहीं, सोशल मीडिया कंपनियां भी अपनी तरफ से कुछ कदम उठा रही हैं. Meta ने हाल ही में ऑस्ट्रेलिया में 16 साल से कम उम्र के लगभग 5 लाख संदिग्ध अकाउंट बंद किए हैं.
इसी तरह TikTok ने यूरोप में ऐसे सिस्टम लागू किए हैं जो 13 साल से कम उम्र के यूजर्स के अकाउंट पहचान कर उन्हें हटाने में मदद करते हैं. इसमें फेशियल एज अनुमान, क्रेडिट कार्ड वेरिफिकेशन और सरकारी आईडी चेक जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है.
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