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AI बना रहा अमीर: ऑफिस वर्क ही नहीं, आम नौकरियों में भी प्रमोशन और सैलरी हाइक दिला रहे ये खास टूल्स!

क्या आप भी जल्दी प्रमोशन लेकर अच्छी सैलरी पाना चाहते हैं? अगर हां, तो गूगल यूके की मैनेजिंग डायरेक्टर का यह इंटरव्यू आपको जरूर पढ़ना चाहिए.

AI बना रहा अमीर: ऑफिस वर्क ही नहीं, आम नौकरियों में भी प्रमोशन और सैलरी हाइक दिला रहे ये खास टूल्स!
गूगल यूके की एमडी का कहना है कि लोग एआई टूल्स का यूज करके तेजी से प्रमोशन पा रहे हैं.
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Tech News: जो लोग AI का स्मार्ट तरीके से इस्तेमाल कर रहे हैं, उन्हें कंपनियों में सबसे तेजी से प्रमोशन और सैलरी हाइक मिल रहा है. गूगल यूके की मैनेजिंग डायरेक्टर, केट एलेसी ने 'द सन' के साथ बातचीत में इसकी पुष्टि की है. उनका कहना कि अगर आप AI का सही इस्तेमाल सीख लेते हैं, तो आप बड़ी आसानी से एक 'ट्रेलब्लेजर' बन सकते हैं, जिसके बाद आपके लिए तरक्की के दरवाजे अपने आप खुल जाएंगे.

कौन हैं ये 'ट्रेलब्लेजर्स'?

गूगल की नई इकोनॉमिक इम्पैक्ट रिपोर्ट के मुताबिक, AI के इस्तेमाल करने वाले लोगों को मुख्य रूप से 4 हिस्सों में बांटा गया है:-

सबसे टॉप पर 'AI ट्रेलब्लेजर' हैं, जो कुल आबादी का 15% हैं. ये लोग AI की मदद से हफ्ते में अपने करीब 8 घंटे बचा रहे हैं. मजे की बात यह है कि इन्हीं लोगों को सबसे ज्यादा प्रमोशन, इंक्रीमेंट और बेहतरीन परफॉरमेंस रिव्यू मिल रहे हैं.

इनके ठीक नीचे 37% 'AI प्रैक्टिशनर' आते हैं. ये लोग AI को अपने डेली टूल की तरह इस्तेमाल तो कर रहे हैं, लेकिन काम में कुछ नया करने की कोशिश नहीं कर रहे. 

तीसरे नंबर पर 38% 'AI एक्सपेरिमेंटर्स' हैं, जो बिगिनर हैं और अभी सिर्फ छोटे-मोटे कामों के लिए इसे टेस्ट कर रहे हैं. 

वहीं, आखिर में 10% लोग 'AI स्पेक्टेटर्स' हैं, जिन्होंने अभी तक इसका बिल्कुल भी इस्तेमाल शुरू नहीं किया है और सिर्फ तमाशा देख रहे हैं.

क्या आप भी कर सकते हैं शुरुआत?

अगर आप अभी तक AI का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है. केट एलेसी के अनुसार, ट्रेलब्लेजर बनना काफी आसान है. इसके लिए आपको बस इसे एक 'क्रिएटिव पार्टनर' की तरह देखना होगा. चैटबॉट के साथ बोलकर बातें करना (Voice Command) एक नेचुरल शुरुआत हो सकती है, जो आजकल के Gemini और AlphaFold जैसे टूल्स में आसानी से उपलब्ध है. इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने से ही आप 'एक्सपेरिमेंटल' से 'प्रैक्टिशनर' और फिर 'ट्रेलब्लेजर' के स्तर तक पहुंच सकते हैं.

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इस्तेमाल में आ रही हैं 3 बड़ी रुकावटें

इस रिपोर्ट में आम लोगों के AI से दूर रहने की तीन वजह भी बताई गई हैं:- 

  • पहली रुकावट हमारी सोच है. लोग आज भी AI को सिर्फ सर्च इंजन का एक 'टेक्स्ट बॉक्स' समझते हैं, जबकि जरूरत इसे एक क्रिएटिव पार्टनर की तरह देखने की है. 
  • दूसरी बड़ी वजह आदत की कमी है, क्योंकि लोगों ने अभी तक इसे अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा नहीं बनाया है. 
  • तीसरी रुकावट कंपनियों का रवैया है. कंपनियों को यह तय करना होगा कि वे अपने कर्मचारियों को इन टूल्स के सही इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित करें और उन्हें ऐसा करने की पूरी छूट दें.

सिर्फ ऑफिस वालों के लिए नहीं, हर नौकरी में मददगार

अक्सर हमें लगता है कि AI सिर्फ उनके लिए है जो दिन भर कंप्यूटर के सामने स्प्रेडशीट खंगालते रहते हैं. लेकिन केट इस बात को पूरी तरह गलत मानती हैं. एक्स्ट्रा कमाई के साथ-साथ यह तकनीक लगभग हर प्रोफेशन में काम आ सकती है. उन्होंने एक प्लंबर या इलेक्ट्रीशियन का उदाहरण देते हुए इसे बड़ी आसानी से समझाया. ऐसे लोग AI का इस्तेमाल अपने इनवॉइस को बेहतर तरीके से मैनेज करने और ग्राहकों को अपने आप ईमेल भेजने के लिए कर सकते हैं. इससे उनका काफी समय बचेगा, वे ज्यादा ग्राहकों तक पहुंच पाएंगे और अपने बिजनेस को तेजी से बढ़ा सकेंगे.

नौकरियां जाएंगी नहीं, बल्कि नए मौके बनेंगे

AI का नाम सुनते ही लोगों को सबसे पहला डर नौकरी छिनने का लगता है. हालांकि, केट इसे सच नहीं मानतीं. उनका कहना है कि हर बड़ी टेक्नोलॉजिकल रिवोल्यूशन की तरह, इस बार भी नौकरियां बस शिफ्ट होंगी. रिसर्च भी बताती है कि यूके में 92% नौकरियां AI के आने से या तो और बेहतर हो जाएंगी या फिर पूरी तरह सुरक्षित रहेंगी. सच तो यह है कि AI ऐसी नई नौकरियां पैदा करेगा, जिनके बारे में हमने अभी सोचा भी नहीं है. यह बिल्कुल वैसा ही है, जैसे यूट्यूब के आने से पहले 'यूट्यूब क्रिएटर' नाम की कोई नौकरी नहीं होती थी. लेकिन आज दुनिया भर में लाखों लोग इसी से अपनी शानदार रोजी-रोटी चला रहे हैं.

इकॉनमी दौड़ेगी, आम जिंदगी होगी आसान

AI हमारी अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़े इंजन का काम करने वाला है. रिसर्च के अनुमान बताते हैं कि साल 2030 तक AI अकेले यूके की इकॉनमी में 400 बिलियन पाउंड (50,022,640 रुपये) की शानदार ग्रोथ ला सकता है. हालांकि, इसका आधा यानी 200 बिलियन पाउंड का फायदा तभी मिलेगा जब लोग इसे बड़े पैमाने पर अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाएंगे.

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