साल 1998 में Tim Cook कॉम्पैक (Compaq) जैसी बड़ी कंपनी की वाइस प्रेसिडेंट की नौकरी छोड़ डूबती हुई एप्पल का हाथ थामा था. लगभग तीन दशकों तक Apple में रहने और कंपनी को दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी में से एक बनाने के बाद अब टिम कुक का सफर खत्म हो रहा है. Steve Jobs के एक बुलावे पर Apple में आने वाले कुक ने कैसे कंपनी की कमान संभाली और इसे $4 ट्रिलियन के शिखर पर पहुंचाया, आइए जानते हैं उनकी पूरी कहानी.

Tim Cook
Tim Cook का Apple से पहले का करियर
Tim Cook ने Duke University से MBA और Auburn University से Bachelor of Science degree in Industrial Engineering की पढ़ाई की है. एप्पल में आने से पहले उन्होंने IBM में पूरे 12 साल बिताए, जहां वे North American Fulfillment के डायरेक्टर थे. इसके बाद उन्होंने इंटेलिजेंट इलेक्ट्रॉनिक्स में भी काम किया और फिर कॉम्पैक कंपनी में कॉर्पोरेट मैटेरियल्स के वाइस प्रेसिडेंट बने. कॉम्पैक में अभी उन्हें एक साल भी नहीं हुआ था कि Apple के को-फाउंडर स्टीव जॉब्स ने उन्हें एक इंटरव्यू के लिए बुलाया और Cook ने एप्पल में आने का बड़ा फैसला ले लिया.
Apple को दी नई रफ्तार
साल 1998 में एप्पल जॉइन करते ही Tim Cook को सीनियर वाइस प्रेसिडेंट ऑफ ऑपरेशंस की जिम्मेदारी मिली. उस समय Apple के पास अपने खुद के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट थे. कुक ने आते ही एप्पल के काम करने के तरीके को पूरी तरह रीस्ट्रक्चर किया. उन्होंने इन-हाउस मैन्युफैक्चरिंग को बंद करके चीन के असेंबली पार्टनर्स के साथ कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग की शुरुआत की. इस रणनीति से एप्पल को बाजार के हिसाब से ढलने में बड़ी फ्लेक्सिबिलिटी मिली और इन्वेंट्री को लंबे समय तक रखने का झंझट खत्म हो गया. उन्होंने सप्लायर्स के साथ कड़े मोलभाव किए जिससे लागत कम हुई और सप्लाई चेन पर एप्पल का पूरा कंट्रोल हो गया.
जब स्टीव जॉब्स ने सौंपी CEO की कमान
Tim Cook की बेहतरीन परफॉर्मेंस को देखते हुए उन्हें साल 2005 में एप्पल का चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) बना दिया गया, जहां वे सीधे स्टीव जॉब्स को रिपोर्ट करते थे. वे ग्लोबल सेल्स, मैन्युफैक्चरिंग और मैकिन्टोश डिवीजन को संभाल रहे थे. जब स्टीव जॉब्स की सेहत लगातार बिगड़ने लगी, तो उन्होंने अगस्त 2011 में CEO पद से इस्तीफा दे दिया. जॉब्स ने खुद बोर्ड को टिम कुक का नाम सुझाया और कहा कि कुक ही उनके असली उत्तराधिकारी हैं. इसके बाद टिम कुक आधिकारिक तौर पर एप्पल के नए CEO बन गए.
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$348 बिलियन से $4 ट्रिलियन तक का जादुई सफर
जब अगस्त 2011 में टिम कुक ने कमान संभाली थी, तब Apple का मार्केट कैप लगभग $348 बिलियन डॉलर था. आलोचकों को लगता था कि जॉब्स के बिना एप्पल बिखर जाएगी, लेकिन Tim Cook ने सबको गलत साबित कर दिया. उनकी लीडरशिप में कंपनी की मार्केट वैल्यू आसमान छूने लगी और अक्टूबर 2025 में एप्पल ने $4 ट्रिलियन (4 लाख करोड़ डॉलर) का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर लिया.
100 करोड़ iPhone
Tim Cook के दौर में iPhone की लोकप्रियता दुनिया के कोने-कोने में पहुंच गई. जनवरी 2021 में एप्पल ने एक बड़ा माइलस्टोन हासिल करते हुए ऐलान किया कि दुनिया भर में एक्टिव आईफोन यूजर्स की संख्या 1 बिलियन (100 करोड़) को पार कर चुकी है. इसके साथ ही कुक ने कई रणनीतिक बिजनेस सौदे भी किए, जिसमें अक्टूबर 2018 में $600 मिलियन में डॉयलॉग सेमीकंडक्टर को खरीदना और 2019 में $1 बिलियन में इंटेल के मॉडेम बिजनेस का अधिग्रहण करना शामिल है.
सर्विसेज सेगमेंट और 2030 तक का ग्रीन टारगेट
हार्डवेयर के अलावा Tim Cook ने एप्पल के सर्विसेज सेगमेंट (जैसे ऐप स्टोर और डिजिटल स्टोरफ्रंट्स) को बहुत मजबूत बनाया. इसके अलावा वे दुनिया को एक बेहतर जगह बनाने के मिशन पर भी रहे. साल 2014 में उन्होंने पावर-सेविंग और सप्लाई चेन में पर्यावरण के अनुकूल बदलावों के लिए एक बड़ा कैंपेन लॉन्च किया था. Tim Cook की लीडरशिप में एप्पल ने यह बड़ा संकल्प लिया है कि साल 2030 तक कंपनी अपने पूरे बिजनेस और सप्लाई चेन को पूरी तरह से कार्बन न्यूट्रल (Carbon Neutral) बना देगी.

John Ternus
Tim Cook के बाद नए बॉस John Ternus
Tim Cook के बाद अब Apple की कमान जॉन टर्नस (John Ternus) के हाथों में होगी. जॉन फिलहाल एप्पल के हार्डवेयर इंजीनियरिंग विभाग के हेड हैं और वह 2001 से कंपनी से जुड़े हैं. iPhone, iPad, Airpods और Mac के डेवलेपमेंट में जॉन का बहुत बड़ा हाथ रहा है. माना जा रहा है कि जॉन टर्नस के आते ही Apple AI की दुनिया में बहुत तेजी से आगे बढ़ेगा.
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