मध्यक्रम के सीनियर बल्लेबाज युवराज सिंह का मानना है कि यदि आप मैच नहीं जीत सकते, तो यह मायने नहीं रखता कि आप कागजों पर कितने मजबूत हैं।
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बेंगलुरु:
भारतीय मध्यक्रम के सीनियर बल्लेबाज युवराज सिंह का मानना है कि यदि आप मैच नहीं जीत सकते, तो यह मायने नहीं रखता कि आप कागजों पर कितने मजबूत हैं। बायें हाथ के इस बल्लेबाज ने इसके अलावा 1983 की विश्व चैंपियन टीम के साथ तुलना करने से इनकार कर दिया। युवराज ने कहा, हमारी टीम अभी मैच जीत रही है और यह महत्वपूर्ण है। 1983 की टीम सफल थी और यदि हमें यह साबित करना है कि हमारी टीम अच्छी है, तो हमें मैच जीतने होंगे। यह मायने नहीं रखता कि कागजों पर टीम कितनी मजबूत है। मैच जीतना ज्यादा महत्वपूर्ण है। युवराज से जब टीम में उनकी जिम्मेदारियों के बारे में पूछा गया, उन्होंने कहा, बीच के ओवरों में अच्छी बल्लेबाजी करना और परिस्थिति को भांपना महत्वपूर्ण है। हम कैसी स्थिति में हैं। हमें पारी संवारने की जरूरत है या बड़ी साझेदारी निभाने का। पिछले दो साल से मैं यही करने की कोशिश कर रहा हूं। चार साल पहले वेस्टइंडीज में खेले गए विश्व कप की कड़वी यादें अब भी युवराज के दिमाग में ताजा हैं और उनका मानना है कि टीम के लिए अच्छी शुरुआत अहम होगी। उन्होंने कहा, हमने निश्चित तौर पर वेस्टइंडीज में 2007 में खेले गए विश्व कप और क्वालीफाई नहीं कर पाने के कारणों पर विचार किया। यह बीत गया है और हम नई शुरुआत कर रहे हैं। पिछले विश्व कप में हम लय हासिल नहीं कर पाए। इस बार लय हासिल करना महत्वपूर्ण होगा। हमें अच्छी तैयारी करनी होगी और देखते हैं कि टूर्नामेंट की शुरुआत कैसी रहती है। बायें हाथ के इस बल्लेबाज ने हालांकि प्रारूप पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, जबकि टूर्नामेंट के निदेशक रत्नाकर शेट्टी ने स्वीकार किया कि इसे भारत के अनुकूल बनाया गया है। युवराज ने कहा, मुझे प्रारूप से कोई दिक्कत नहीं है। प्रारूप कैसा भी हो मेरा काम खेलना है। अब तक 265 वनडे खेलने वाले युवराज का मानना है कि बल्लेबाजी पावरप्ले को लेकर रवैया काफी महत्वपूर्ण होगा। उन्होंने कहा, आपको तब परिस्थितियों पर निर्भर रहना होता है। कभी यह आपके अनुकूल हो सकता है और किसी परिस्थिति में यह नुकसानदायक हो सकता है। यह महत्वपूर्ण होगा कि आप किस समय पावरप्ले लेते हैं। आम तौर पर आप तब पावरप्ले लेते हैं, जबकि बल्लेबाज जमे होते हैं और यदि आप नहीं लेते हो तो फिर 45 ओवर तो इसे लेना ही पड़ेगा। युवराज ने इसके साथ ही कहा कि भले ही वह आजकल लगातार गेंदबाजी कर रहे हैं, लेकिन खुद को विशेषज्ञ गेंदबाज नहीं मानते हैं। उन्होंने कहा, मैं खुद को विशेषज्ञ गेंदबाज नहीं मानता। जब भी मुझे गेंद सौंपी जाती है, मैं अपनी गेंदबाजी का लुत्फ उठाता हूं। जिस दिन मैंने यह सोचना शुरू कर दिया कि मैं विशेषज्ञ गेंदबाज हूं, बल्लेबाज मेरी धुनाई करना शुरू कर देंगे। उन्होंने कहा, मैं खुद को गेंदबाज नहीं मानता। पिछले 50 वनडे में मैंने इसलिए अधिक गेंदबाजी की, क्योंकि हमारे पास बायें हाथ का विशेषज्ञ स्पिनर नहीं है। इसलिए मेरा काम सात-आठ ओवर करना है।
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