नई दिल्ली:
वर्ल्ड कप क्वालिफ़ाइंग में गुआम में खेले गए ग्रुप-डी के दूसरे मैच में भी भारत को हार का सामना करना पड़ा। ग्रुप-डी के दूसरे मैच में गुआम ने भारत को 2-1 से हरा दिया। भारत की ओर से इकलौता गोल कप्तान सुनील छेत्री ने किया।
कप्तान छेत्री ने इंजरी टाइम में अपने करियर का 50वां गोल कर इतिहास तो कायम किया, लेकिन इससे मैच के नतीजों पर कोई असर नहीं पड़ा। ग्रुप-डी में भारत को अब ईरान और तुर्कनमेनिस्तान के खिलाफ मैच खेलने हैं।
फुटबॉल विशेषज्ञ नूवी कपाडिया कहते हैं, मेरी याददाश्त में ये भारत की सबसे बुरी हार है। वह कहते हैं कि भारत की वर्ल्ड रैंकिंग 141 है जबकि गुआम की 174. भारत के खिलाड़ियों को करोड़ रुपये से ज़्यादा सालाना कमाई होती है। भारत की जनसंख्या सवा सौ करोड़ के क़रीब है, जबकि गुआम की आबादी डेढ़ लाख से थोड़ी ज़्यादा है। वह कहते हैं कि ऐसी टीम से भी जीत के लिए आपको और क्या चाहिए? नूवी 2001 में ब्रूनेई के खिलाफ हुए मैच की याद दिलाते हैं। वह कहते हैं कि उस वक्त भारत ने ब्रूनेई को बेंगलुरु में 5-0 और फिर ब्रूनेई में खेले गए मैच में 4-0 से जीत हासिल की थी।
नूवी कहते हैं कि सुनील छेत्री ने 50वां गोल (87 मैच) किया है या नहीं इससे फ़र्क नहीं पड़ता। ज़ाहिर है भारतीय फ़ुटबॉल टीम और कोच स्टीफ़न कॉन्सटेनटाइन को बहुत काम करने की और शायद पूरी रणनीति पर विचार करने की जरूरत होगी।
कप्तान छेत्री ने इंजरी टाइम में अपने करियर का 50वां गोल कर इतिहास तो कायम किया, लेकिन इससे मैच के नतीजों पर कोई असर नहीं पड़ा। ग्रुप-डी में भारत को अब ईरान और तुर्कनमेनिस्तान के खिलाफ मैच खेलने हैं।
फुटबॉल विशेषज्ञ नूवी कपाडिया कहते हैं, मेरी याददाश्त में ये भारत की सबसे बुरी हार है। वह कहते हैं कि भारत की वर्ल्ड रैंकिंग 141 है जबकि गुआम की 174. भारत के खिलाड़ियों को करोड़ रुपये से ज़्यादा सालाना कमाई होती है। भारत की जनसंख्या सवा सौ करोड़ के क़रीब है, जबकि गुआम की आबादी डेढ़ लाख से थोड़ी ज़्यादा है। वह कहते हैं कि ऐसी टीम से भी जीत के लिए आपको और क्या चाहिए? नूवी 2001 में ब्रूनेई के खिलाफ हुए मैच की याद दिलाते हैं। वह कहते हैं कि उस वक्त भारत ने ब्रूनेई को बेंगलुरु में 5-0 और फिर ब्रूनेई में खेले गए मैच में 4-0 से जीत हासिल की थी।
नूवी कहते हैं कि सुनील छेत्री ने 50वां गोल (87 मैच) किया है या नहीं इससे फ़र्क नहीं पड़ता। ज़ाहिर है भारतीय फ़ुटबॉल टीम और कोच स्टीफ़न कॉन्सटेनटाइन को बहुत काम करने की और शायद पूरी रणनीति पर विचार करने की जरूरत होगी।
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