ज्वाला गुट्टा डबल्स में भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी हैं (फोटो : Facebook)
नई दिल्ली:
पद्म सम्मानों की घोषणा के बाद हमेशा ही कोई न कोई सवाल उठते रहे हैं. इस बार यह सवाल बैडमिंटन डबल्स की भारतीय स्टार ज्वाला गुट्टा ने उठाए हैं. देश के लिए डबल्स के कई खिताब जीत चुकीं ज्वाला ने न केवल सम्मान नहीं मिलने पर नाराजगी जताई है, बल्कि इसकी प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए हैं. ज्वाला इससे पहले अपनी टिप्प्णियों को लेकर भी विवादों में आ चुकी हैं. वह अपनी बात खुलकर रखने के लिए जानी जाती हैं, फिर चाहे उससे कोई नाराज ही क्यों न हो जाए. संभवतः इसका अहसास भी उन्हें है. तभी तो उन्होंने यह भी पूछा है कि क्या उन्हें सम्मान नहीं दिए जाने का बड़ा कारण उनका ज्यादा बोलना है. आइए जानते हैं कि ज्वाला गुट्टा ने फेसबुक पोस्ट में क्या मुद्दे उठाए हैं...
ज्वाला ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा है- मुझे इस बात पर हमेशा से आश्चर्य होता रहा है कि देश के सबसे प्रतिष्ठित पद्म सम्मानों के लिए आवेदन करना होता है... लेकिन जब एक प्रक्रिया बना ही दी गई है, तो मैंने भी आवेदन कर दिया. मैंने आवेदन इसलिए किया, क्योंकि मुझे लगता है कि मैंने अपने प्रदर्शन से देश को गौरवान्वित किया है और इसलिए मैं इसकी हकदार हूं. मैं अपने देश के लिए 15 वर्षों से खेलती आ रही हूं और कई बड़े टूर्नामेंट जीते हैं.
ज्वाला गुट्टा देश के लिए कई टूर्नामेंट जीते हैं (फोटो : Facebook)
ज्वाला ने उठाए यह सवाल
गुट्टा ने आगे लिखा, मुझे लगता है कि इसके लिए केवल आवेदन करना ही पर्याप्त नहीं होता. आपको सिफारिशों की जरूरत होती है. इसकी सिफारिश कि आप इस सम्मान के लिए योग्यता रखते हैं.... लंबी प्रक्रिया चलती है... लेकिन मेरा सवाल यह है कि इस सम्मान के लिए मुझे आवेदन करने और अनुसंशा के लिए अनुरोध करने की जरूरत क्यों है... क्या मेरी उपलब्धियां ही काफी नहीं हैं? मैं पूरे तंत्र के बारे में जानने के लिए उत्सुक हूं. दिल्ली और ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार दो पदक काफी नहीं हैं? वर्ल्ड चैंपियनशिप में मेरा मेडल इसके लिए पर्याप्त नहीं है? महिला डबल्स और मिश्रित डबल्स रैंकिंग में मैं शीर्ष-10 में रही, सुपरसीरीज और ग्रांप्री गोल्ड में मेरा प्रदर्शन क्या काफी नहीं है?
क्या ज्यादा बोलना है बड़ा कारण...
मैंने 15 बार राष्ट्रीय चैंपियनशिप जीती है. साथ ही मैं ओलिंपिक की दो स्पर्धाओं में क्वालिफाई करने वाली भारत की पहली खिलाड़ी रही हूं. वर्ल्ड चैंपियनशिप में प्रकाश पादुकोण के बाद पदक जीतने वाली मैं पहली खिलाड़ी हूं.
मैंने भारत में उस समय डबल्स बैडमिंटन की आधारशिला रखी थी, जब इसे कोई भी गंभीरता से नहीं लेता था. लेकिन क्या यह सब काफी नहीं है, क्योंकि मैं ज्यादा बोलती हूं. क्योंकि मैं अपने विचार खुलकर रख देती हूं. आखिर मुझे यह सम्मान नहीं दिए जाने के पीछे क्या कारण है?.... यदि मेरी इतनी सारी उपलब्धियां काफी नहीं हैं, तो फिर इसके लिए और क्या चाहिए?
ज्वाला ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा है- मुझे इस बात पर हमेशा से आश्चर्य होता रहा है कि देश के सबसे प्रतिष्ठित पद्म सम्मानों के लिए आवेदन करना होता है... लेकिन जब एक प्रक्रिया बना ही दी गई है, तो मैंने भी आवेदन कर दिया. मैंने आवेदन इसलिए किया, क्योंकि मुझे लगता है कि मैंने अपने प्रदर्शन से देश को गौरवान्वित किया है और इसलिए मैं इसकी हकदार हूं. मैं अपने देश के लिए 15 वर्षों से खेलती आ रही हूं और कई बड़े टूर्नामेंट जीते हैं.

ज्वाला ने उठाए यह सवाल
गुट्टा ने आगे लिखा, मुझे लगता है कि इसके लिए केवल आवेदन करना ही पर्याप्त नहीं होता. आपको सिफारिशों की जरूरत होती है. इसकी सिफारिश कि आप इस सम्मान के लिए योग्यता रखते हैं.... लंबी प्रक्रिया चलती है... लेकिन मेरा सवाल यह है कि इस सम्मान के लिए मुझे आवेदन करने और अनुसंशा के लिए अनुरोध करने की जरूरत क्यों है... क्या मेरी उपलब्धियां ही काफी नहीं हैं? मैं पूरे तंत्र के बारे में जानने के लिए उत्सुक हूं. दिल्ली और ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार दो पदक काफी नहीं हैं? वर्ल्ड चैंपियनशिप में मेरा मेडल इसके लिए पर्याप्त नहीं है? महिला डबल्स और मिश्रित डबल्स रैंकिंग में मैं शीर्ष-10 में रही, सुपरसीरीज और ग्रांप्री गोल्ड में मेरा प्रदर्शन क्या काफी नहीं है?
क्या ज्यादा बोलना है बड़ा कारण...
मैंने 15 बार राष्ट्रीय चैंपियनशिप जीती है. साथ ही मैं ओलिंपिक की दो स्पर्धाओं में क्वालिफाई करने वाली भारत की पहली खिलाड़ी रही हूं. वर्ल्ड चैंपियनशिप में प्रकाश पादुकोण के बाद पदक जीतने वाली मैं पहली खिलाड़ी हूं.
मैंने भारत में उस समय डबल्स बैडमिंटन की आधारशिला रखी थी, जब इसे कोई भी गंभीरता से नहीं लेता था. लेकिन क्या यह सब काफी नहीं है, क्योंकि मैं ज्यादा बोलती हूं. क्योंकि मैं अपने विचार खुलकर रख देती हूं. आखिर मुझे यह सम्मान नहीं दिए जाने के पीछे क्या कारण है?.... यदि मेरी इतनी सारी उपलब्धियां काफी नहीं हैं, तो फिर इसके लिए और क्या चाहिए?
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