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हॉकी इंडिया में नारंगी जर्सी पर मचा घमासान, महानिदेशक श्रीवास्तव को भेजा कारण बताओ नोटिस, छीने सभी अधिकार

हॉकी इंडिया के डायरेक्टर जनरल कमांडर आर.के. श्रीवास्तव से उनके सभी अधिकार और जिम्मेदारियां वापस ले ली गईं, उन्हें तुरंत काम बंद करने का आदेश दिया गया है.

हॉकी इंडिया में नारंगी जर्सी पर मचा घमासान, महानिदेशक श्रीवास्तव को भेजा कारण बताओ नोटिस, छीने सभी अधिकार
आर.के. श्रीवास्तव
X (formerly Twitter)

हॉकी इंडिया में अंदरूनी विवाद ने शनिवार को नया मोड़ ले लिया, जब अध्यक्ष दिलीप तिर्की ने महानिदेशक (डीजी) कर्नल आरके श्रीवास्तव को कारण बताओ नोटिस भेजकर तत्काल प्रभाव से उनकी सभी शक्तियां वापस ले लीं. नोटिस भेजने के पीछे हॉकी इंडिया में 'अनुशासन, जवाबदेही और सुचारू कामकाज बनाए रखना' वजह बताई गई है. हालांकि, भारतीय हॉकी टीम की जर्सी के रंग में बदलाव का विवाद इस नोटिस में लगाए गए प्रमुख आरोपों में शामिल है.

तत्काल प्रभाव से सभी शक्तियां समाप्त

तिर्की ने अपने वकील के माध्यम से ईमेल पर भेजे नोटिस में कहा, 'मेरे मुवक्किल हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप तिर्की की ओर से हॉकी इंडिया में अनुशासन, जवाबदेही और सुचारू कामकाज बनाए रखने के हित में आपको सूचित किया जाता है कि तत्काल प्रभाव से हॉकी इंडिया के निदेशक महासचिव के तौर पर आपकी सभी शक्तियां समाप्त की जाती हैं.'

फैसला होने तक नहीं कर पाएंगे कोई काम

‘पीटीआई' के पास मौजूद इस पत्र में आगे कहा गया, 'हॉकी इंडिया के उपनियमों के तहत आगे कोई फैसला होने तक श्रीवास्तव संगठन की ओर से किसी भी तरह का अधिकार इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे और न ही उसकी तरफ से कोई काम कर सकेंगे.'

डीजी को हॉकी इंडिया का पूरा संचालन संबंधी प्रभार सौंपा

नोटिस में डीजी को हॉकी इंडिया का पूरा संचालन संबंधी प्रभार सौंपने का भी निर्देश दिया गया है. इसमें सभी आधिकारिक रिकॉर्ड, दस्तावेज, फाइलें, आधिकारिक एक्सेस संबंधी जानकारी, संपत्तियां और लंबित मामलों को अध्यक्ष कार्यालय की ओर से लिखित रूप से नामित पदाधिकारियों या व्यक्तियों को सौंपने को कहा गया है. इसका उद्देश्य संगठन के कामकाज में निरंतरता बनाए रखना और हॉकी इंडिया का सुचारू संचालन सुनिश्चित करना है.

श्रीवास्तव से नहीं मिली कोई प्रतिक्रिया

यह पत्र हॉकी इंडिया के पदाधिकारियों और कार्यकारी बोर्ड के सदस्यों को भी भेजा गया है. श्रीवास्तव से इस मामले में प्रतिक्रिया लेने के लिए कई बार संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका.

नीली जर्सी की जगह नारंगी जर्सी को लेकर विवाद

श्रीवास्तव के खिलाफ लगाए गए प्रमुख आरोपों में भारतीय राष्ट्रीय टीम की जर्सी का रंग बदलने का मामला शामिल है. नोटिस के अनुसार पारंपरिक नीली जर्सी की जगह नारंगी जर्सी लागू करने और उसे सार्वजनिक रूप से पेश करने से पहले हॉकी इंडिया के अध्यक्ष या कार्यकारी समिति से उचित परामर्श नहीं किया गया.

नोटिस में कहा गया, 'भारतीय राष्ट्रीय टीमों की खेल जर्सी में बदलाव अध्यक्ष या कार्यकारी समिति से पूर्व परामर्श के बिना लागू किया गया और सार्वजनिक रूप से पेश किया गया. जब विशेष रूप से इस निर्णय के अधिकार, मंजूरी, प्रत्यायोजन और खिलाड़ियों/कोचों से परामर्श का आधार बताने को कहा गया, तब बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद कार्यकारी समिति का कोई प्रस्ताव, अध्यक्ष की मंजूरी या पूरा दस्तावेजी आधार प्रस्तुत नहीं किया गया.'

भारतीय टीम की पारंपरिक नीली जर्सी को दृश्यता संबंधी कारणों का हवाला देते हुए नारंगी रंग में बदला गया था. इस फैसले के बाद हॉकी जगत में विवाद खड़ा हो गया था. नोटिस में श्रीवास्तव के विश्व कप के लिए नीदरलैंड और बेल्जियम जाने को भी गंभीर आरोप के रूप में शामिल किया गया है. उन्हें पहले भारत में रहकर हॉकी इंडिया लीग (एचआईएल) और अन्य प्राथमिक मामलों पर ध्यान देने का निर्देश दिया गया था.

नोटिस में कहा गया, 'जैसा कि पहले ही निर्देश दिया गया था, कमांडर आर के श्रीवास्तव विश्व कप की यात्रा नहीं करेंगे, क्योंकि उनका पूरा ध्यान हॉकी इंडिया लीग (एचआईएल) से जुड़े मामलों और तत्काल समाधान की आवश्यकता वाले अन्य प्राथमिक मुद्दों पर होना आवश्यक है.' नोटिस के मुताबिक, 30 जुलाई को भेजे गए एक ई-मेल में भी आगामी एचआईएल सत्र, फ्रेंचाइजी समन्वय, योजना और उससे जुड़े कार्यों के कारण श्रीवास्तव को भारत में रहने की सलाह दी गई थी.

श्रीवास्तव ने अध्यक्ष के निर्देश के बावजूद यात्रा की. नोटिस में इसे “हॉकी इंडिया के अध्यक्ष के पद का सीधा अपमान और आदेश की अवज्ञा” बताया गया है. विश्व कप प्रतिनिधिमंडल से जुड़े मामले में नोटिस में कहा गया, 'जब इन संस्थागत उद्देश्यों के लिए विशेष रूप से चिन्हित व्यक्तियों को नहीं भेजा गया, तब आपने स्वयं को उन व्यक्तियों से ऊपर रखते हुए खुद विश्व कप में जाने का निर्णय लिया.'

नोटिस में कहा गया कि ये सभी आठ मामले 'प्रथम दृष्टया कार्यकारी जवाबदेही को लेकर गंभीर और बार-बार उठने वाले सवाल' खड़े करते हैं. श्रीवास्तव के खिलाफ अन्य आरोपों में जर्सी विवाद के दौरान पीआर एजेंसी और मीडिया से संबंधित प्रतिबंध, दक्षिण अफ्रीका दौरे में खिलाड़ियों के कथित दुर्व्यवहार का मामला, मुख्य कोच क्रेग फुल्टन से जुड़ा स्पष्टीकरण, विक्रम पाल के आईसीसी/पीओएसएच रिकॉर्ड, सुमित मोहाइट से संबंधित विकास अंपायर मामला तथा एफआईएच, एएचएफ और राष्ट्रीय महासंघों के साथ बाहरी संवाद शामिल हैं.

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