नई दिल्ली:
दुनिया के सबसे ताकतवर खेल प्रशासक सेप ब्लैटर को आख़िरकार इस्तीफ़ा देना पड़ा। माना जा रहा है कि भ्रष्टाचार के जांच की आंच फ़ुटबॉल को चलाने वाली संस्था फ़ीफ़ा अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंच गई है। 79 साल के ब्लैटर ने ज़्यूरिख़ में पद छोड़ने का ऐलान किया।
उन्होंने कहा, "मैं जल्द से जल्द बैठक बुलाकर अपने अधिकार छोड़ दूंगा। जब तक नए चुनाव नहीं होते तब तक मैं फ़ीफ़ा का अध्यक्ष बना रहूंगा।"
ब्लैटर 17 साल से दुनिया के सबसे लोकप्रिय खेल फ़ुटबॉल की गवर्निंग बॉडी फ़ीफ़ा के अध्यक्ष रहे। जॉर्डन के प्रिंस अली बिन अल हुसैन को हराकर ब्लैटर पिछले शुक्रवार को ही पांचवी बार फ़ीफ़ा के अध्यक्ष चुने गए थे। फ़ीफ़ा के चुनाव के ठीक पहले अमेरिका की जांच संस्था ने ज्यूरिख के एक होटल से फीफा के 7 अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया था इसमें फ़ीफ़ा के उपाध्यक्ष भी शामिल थे। इन पर 1991 से फ़ीफ़ा के प्रसारण अधिकार में धांधली और गबन के आरोप हैं। इन पर करीब 1000 करोड़ रुपये की घपलेबाज़ी का आरोप है।
पहले कहा गया कि ब्लैटर की जांच नहीं हो रही है। लेकिन अब वे भी जांच के दायरे में आ गए हैं। ब्लैटर पर चौतरफा दबाव था। यूरोप के तमाम फ़ुटबॉल खेलने वाले देशों की संस्था UEFA ने धमकी दी थी कि अगर भ्रष्टाचार के मामलों को सही सरीके से नहीं सुलझाया गया तो वो फ़ीफ़ा से अपना नाता तोड़ सकते हैं। डियोगो मैराडोना और मिशैल प्लातिनी जैसे पूर्व दिग्गज़ खिलाड़ियों ने सीधे ब्लैटर पर उंगली उठाते हुए कहा कि वे चुनाव में भले ही जीत गए हैं लेकिन फ़ुटबॉल की हार हो गई है।
पूर्व वर्ल्ड चैंपियन डिएगो मैराडोना ने पिछले हफ़्ते कहा था, "फ़ीफ़ा कह रही है कि उन्होंने जांच कराई है। ये सब झूठ बोल रहे हैं। ये सब फ़ुटबॉल से नफ़रत करते हैं। मैं इनसे कहना चाहता हूं कि खेल का व्यापार बंद करें और खेल में पैसा लगाएं।"
विवाद और लगातार गिरती साख के बीच कई प्रायोजक भी फ़ीफ़ा से रिश्ता तोड़ने की तैयारी में थे। इनमें कोकाकोला, एडिडास, नाइकी और मैकडॉनल्ड जैसे बड़े ब्रांड शामिल थे। अंत में सैप ब्लैटर को झुकना पड़ा। नए अध्यक्ष के लिए चुनाव दिसंबर से अगले मार्च के बीच होगा। तब तक ब्लैटर अध्यक्ष बने रहेंगे।
उन्होंने कहा, "मैं जल्द से जल्द बैठक बुलाकर अपने अधिकार छोड़ दूंगा। जब तक नए चुनाव नहीं होते तब तक मैं फ़ीफ़ा का अध्यक्ष बना रहूंगा।"
ब्लैटर 17 साल से दुनिया के सबसे लोकप्रिय खेल फ़ुटबॉल की गवर्निंग बॉडी फ़ीफ़ा के अध्यक्ष रहे। जॉर्डन के प्रिंस अली बिन अल हुसैन को हराकर ब्लैटर पिछले शुक्रवार को ही पांचवी बार फ़ीफ़ा के अध्यक्ष चुने गए थे। फ़ीफ़ा के चुनाव के ठीक पहले अमेरिका की जांच संस्था ने ज्यूरिख के एक होटल से फीफा के 7 अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया था इसमें फ़ीफ़ा के उपाध्यक्ष भी शामिल थे। इन पर 1991 से फ़ीफ़ा के प्रसारण अधिकार में धांधली और गबन के आरोप हैं। इन पर करीब 1000 करोड़ रुपये की घपलेबाज़ी का आरोप है।
पहले कहा गया कि ब्लैटर की जांच नहीं हो रही है। लेकिन अब वे भी जांच के दायरे में आ गए हैं। ब्लैटर पर चौतरफा दबाव था। यूरोप के तमाम फ़ुटबॉल खेलने वाले देशों की संस्था UEFA ने धमकी दी थी कि अगर भ्रष्टाचार के मामलों को सही सरीके से नहीं सुलझाया गया तो वो फ़ीफ़ा से अपना नाता तोड़ सकते हैं। डियोगो मैराडोना और मिशैल प्लातिनी जैसे पूर्व दिग्गज़ खिलाड़ियों ने सीधे ब्लैटर पर उंगली उठाते हुए कहा कि वे चुनाव में भले ही जीत गए हैं लेकिन फ़ुटबॉल की हार हो गई है।
पूर्व वर्ल्ड चैंपियन डिएगो मैराडोना ने पिछले हफ़्ते कहा था, "फ़ीफ़ा कह रही है कि उन्होंने जांच कराई है। ये सब झूठ बोल रहे हैं। ये सब फ़ुटबॉल से नफ़रत करते हैं। मैं इनसे कहना चाहता हूं कि खेल का व्यापार बंद करें और खेल में पैसा लगाएं।"
विवाद और लगातार गिरती साख के बीच कई प्रायोजक भी फ़ीफ़ा से रिश्ता तोड़ने की तैयारी में थे। इनमें कोकाकोला, एडिडास, नाइकी और मैकडॉनल्ड जैसे बड़े ब्रांड शामिल थे। अंत में सैप ब्लैटर को झुकना पड़ा। नए अध्यक्ष के लिए चुनाव दिसंबर से अगले मार्च के बीच होगा। तब तक ब्लैटर अध्यक्ष बने रहेंगे।
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