विजेंदर सिंह की फाइल फोटो
नई दिल्ली:
भिवाणी का छोरा अब लंदन रिटर्न है और प्रोफ़ेशनल बॉक्सिंग की दुनिया का उभरता सितारा बन गया है। विजेंदर सिंह ने प्रो. बॉक्सिंग से लौटने के बाद NDTV संवाददाता विमल मोहन से ख़ास बातचीत में बताया कि उन्हें यहां कामयाबी तो मिल रही है, लेकिन लंदन ओलिंपिक्स में हारने का मलाल हमेशा रहेगा। उन्होंने ये भी बताया कि आज उन्हें बॉलीवुड के सुपरस्टार भी सराहते हैं, लेकिन उन्होंने बॉक्सिंग की शुरुआत सरकारी नौकरी पाने के लिए ही की थी।
पढ़ें विजेंदर सिंह के खास बातचीत...
सवाल : आपको एमेच्योर (ग़ैर पेशेवर) से प्रोफ़ेशनल बनने के लिए बहुत कम वक्त मिला?
विजेंदर सिंह : जी, लेकिन ये एक शुरुआत भर है। अभी ख़िताबी फ़ाइट तक पहुंचने में काफ़ी वक्त लगेगा। अभी बहुत सी चीज़ें सीखनी हैं। हर रोज़ सीख रहा हूं, बहुत सीखना बाक़ी है। लोग 35-40 जीत की बात करते हैं, मैंने तो सिर्फ़ 2 फ़ाइटें जीती हैं।
सवाल : तकनीक में भी काफ़ी बदलाव करना पड़ा?
विजेंदर सिंह : बिल्कुल, लेकिन मैं जो 15-20 साल से करता आ रहा हूं... मैं नहीं कहूंगा कि मैं एकदम बदल गया। ऐसा कहना जल्दबाज़ी होगी। अभी भी चेंज कर रहा हूं। फटुटवर्क का स्टाइल, टेकनीक, डिफेंस... इन सबमें धीरे-धीरे बदलाव ला रहा हूं।
सवाल : मैंने भिवाणी में, आपके गांव में या फिर दूसरी जगहों पर भी देखा, भारत के पहले प्रोफ़ेशनल बॉक्सर माने जाने वाले धर्मेंद्र यादव (गोबी) जैसे कोच से बात की। ये सब कहते हैं कि वह प्रोफ़ेशनल बॉक्सिंग करना नहीं सिखाते, ग़ैर पेशेवर बॉक्सिंग के गुर सिखाते हैं। आपको लगता है आपकी कामयाबी से बदलाव आएगा?
विजेंदर सिंह : बॉक्सिंग करते वक्त आपकी सोच क्या होती है? आप किस लिए बॉक्सिंग करते हैं? सभी सरकारी नौकरी पाने के लिए ही बॉक्सिंग शुरू करते हैं। सरकारी नौकरी आपको प्रो-बॉक्सिंग करने से नहीं मिलती। सरकारी नौकरी मिलती है, अगर आप नेशनल चैम्पियन बनते हैं या फिर आप इंटरनेशनल चैंपियन हैं। कोई रईसज़ादा तो बॉक्सिंग करता नहीं, मिडिल क्लास या लोअर मिडिल क्लास के बच्चे बॉक्सिंग के लिए आते हैं। मैंने भी बॉक्सिंग इसलिए शुरू की, क्योंकि मैं सरकारी नौकरी हासिल करना चाहता था, जो मुझे मिल भी गई। लोग अभी एमेच्योर बॉक्सिंग पसंद करते हैं। लेकिन थोड़ा वक्त लगेगा और बदलाव आएगा।
सवाल : आपमें एक और बदलाव आया है कि आप तेज़ी से अंग्रेज़ी बोलने की कोशिश करते हैं...
विजेंदर सिंह : (हंसते हुए)..क्या करूं, ज़रूरत है... उनकी एक्सेंट (उच्चारण) इतनी अलग है। कई बार कोच कहते कुछ हैं और मैं करता कुछ और हूं।
सवाल : भिवाणी का छोरा अब लंडन रिटर्न जेंटलमैन बन गया है...
विजेंदर सिंह : मैंने (सोशल मीडिया पर) पोस्ट भी डाला था, भिवाणी टू बिग बेन... ब्रिटिश मिनिस्टर कीथ वाज़ से भी मिला... जब आपसे बात भी हुई थी। ये सब बहुत अच्छा चल रहा है।
सवाल : एक और बदलाव ये भी आया है कि पहले आपको बॉलीवुड में लोग फ़ॉलो करते थे, अब आपके पास हॉलीवुड के लोग भी आ रहे हैं।
विजेंदर सिंह : बिल्कुल। मेरी फ़ाइट देखने हॉलीवुड से कई लोग आए थे। कुछ ऑफ़र भी आए हैं। पहली फ़ाइट से पहले सलमान भाई का भी फ़ोन आया था। वो फ़िल्म सुल्तान के लिए मार्शल आर्ट सीख रहे हैं। उन्होंने कहा कि मैं लौट कर आऊंगा तो एक फ़ाइट होगी. मैं गौतम गंभीर, सुरेश रैना और सुशील कुमार का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं। कई एक्ट्रेस के भी फ़ोन आए हैं।
सवाल : एक्ट्रेस के बीच आप बहुत लोकप्रिय हैं..
विजेंदर सिंह : क्या करूं... लोग प्यार करते हैं तो पॉपुलर हो जाता हूं।
सवाल : लंदन ओलिंपिक्स में आप जीत नहीं हासिल कर पाए। अब प्रोफ़ेशनल मैच जीतकर उसकी भरपाई हो गई?
विजेंदर सिंह : बिल्कुल नहीं। लंदन ओलिंपिक्स में हारने का दुख हमेशा रहेगा। सब चीज़ें तय थीं। मैं लगातार दूसरी बार ओलिंपिक्स का मेडल जीतना चाहता था। मैंने उस बॉक्सर (उज़्बेकिस्तान के अब्बोस अतोएव) को पहले भी हराया था, लेकिन मैं उससे क्वार्टर फ़ाइनल में हार गया। कहते हैं कि तक़दीर से ज़्यादा किसी को नहीं मिलता। मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ।
सवाल : आपको लगता है अगले साल 2016 में भारत के कम से कम 5-10 बॉक्सर प्रोफ़ेशनल रिंग में दिखाई देंगे?
विजेंदर सिंह : बिल्कुल 100 फ़ीसदी। मुझे बॉक्सिंग करते देख कर प्रोफ़ेशनल बॉक्सिंग के लोग दूसरे भारतीय बॉक्सर्स के बारे में पूछते हैं। मैंने उन्हं कई नाम भी सुझाए हैं। कई बॉक्सर रियो ओलिंपिक्स की तैयारी कर रहे हैं। जो लोग रियो के लिए क्वालिफ़ाई नहीं करेंगे, उनमें से कई बॉक्सर्स प्रो-बॉक्सिंग के लिए ज़रूर आगे आएंगे, क्योंकि ओलिंपिक्स का इंतज़ार चार साल लंबा होता है। मुझे लगता है इनमें से कई बॉक्सर्स कामयाब भी होंगे।
सवाल: उम्मीद करता हूं और आपके फ़ैन्स दुआ करेंगे कि आपको और दूसरे भारतीय मुक्केबाज़ों को इसमें कामयाबी मिले..
विजेंदर सिंह: बहुत शुक्रिया। उम्मीद करता हूं कि हमें बड़ी कामयाबी मिलेगी।
पढ़ें विजेंदर सिंह के खास बातचीत...
सवाल : आपको एमेच्योर (ग़ैर पेशेवर) से प्रोफ़ेशनल बनने के लिए बहुत कम वक्त मिला?
विजेंदर सिंह : जी, लेकिन ये एक शुरुआत भर है। अभी ख़िताबी फ़ाइट तक पहुंचने में काफ़ी वक्त लगेगा। अभी बहुत सी चीज़ें सीखनी हैं। हर रोज़ सीख रहा हूं, बहुत सीखना बाक़ी है। लोग 35-40 जीत की बात करते हैं, मैंने तो सिर्फ़ 2 फ़ाइटें जीती हैं।
सवाल : तकनीक में भी काफ़ी बदलाव करना पड़ा?
विजेंदर सिंह : बिल्कुल, लेकिन मैं जो 15-20 साल से करता आ रहा हूं... मैं नहीं कहूंगा कि मैं एकदम बदल गया। ऐसा कहना जल्दबाज़ी होगी। अभी भी चेंज कर रहा हूं। फटुटवर्क का स्टाइल, टेकनीक, डिफेंस... इन सबमें धीरे-धीरे बदलाव ला रहा हूं।
सवाल : मैंने भिवाणी में, आपके गांव में या फिर दूसरी जगहों पर भी देखा, भारत के पहले प्रोफ़ेशनल बॉक्सर माने जाने वाले धर्मेंद्र यादव (गोबी) जैसे कोच से बात की। ये सब कहते हैं कि वह प्रोफ़ेशनल बॉक्सिंग करना नहीं सिखाते, ग़ैर पेशेवर बॉक्सिंग के गुर सिखाते हैं। आपको लगता है आपकी कामयाबी से बदलाव आएगा?
विजेंदर सिंह : बॉक्सिंग करते वक्त आपकी सोच क्या होती है? आप किस लिए बॉक्सिंग करते हैं? सभी सरकारी नौकरी पाने के लिए ही बॉक्सिंग शुरू करते हैं। सरकारी नौकरी आपको प्रो-बॉक्सिंग करने से नहीं मिलती। सरकारी नौकरी मिलती है, अगर आप नेशनल चैम्पियन बनते हैं या फिर आप इंटरनेशनल चैंपियन हैं। कोई रईसज़ादा तो बॉक्सिंग करता नहीं, मिडिल क्लास या लोअर मिडिल क्लास के बच्चे बॉक्सिंग के लिए आते हैं। मैंने भी बॉक्सिंग इसलिए शुरू की, क्योंकि मैं सरकारी नौकरी हासिल करना चाहता था, जो मुझे मिल भी गई। लोग अभी एमेच्योर बॉक्सिंग पसंद करते हैं। लेकिन थोड़ा वक्त लगेगा और बदलाव आएगा।
सवाल : आपमें एक और बदलाव आया है कि आप तेज़ी से अंग्रेज़ी बोलने की कोशिश करते हैं...
विजेंदर सिंह : (हंसते हुए)..क्या करूं, ज़रूरत है... उनकी एक्सेंट (उच्चारण) इतनी अलग है। कई बार कोच कहते कुछ हैं और मैं करता कुछ और हूं।
सवाल : भिवाणी का छोरा अब लंडन रिटर्न जेंटलमैन बन गया है...
विजेंदर सिंह : मैंने (सोशल मीडिया पर) पोस्ट भी डाला था, भिवाणी टू बिग बेन... ब्रिटिश मिनिस्टर कीथ वाज़ से भी मिला... जब आपसे बात भी हुई थी। ये सब बहुत अच्छा चल रहा है।
सवाल : एक और बदलाव ये भी आया है कि पहले आपको बॉलीवुड में लोग फ़ॉलो करते थे, अब आपके पास हॉलीवुड के लोग भी आ रहे हैं।
विजेंदर सिंह : बिल्कुल। मेरी फ़ाइट देखने हॉलीवुड से कई लोग आए थे। कुछ ऑफ़र भी आए हैं। पहली फ़ाइट से पहले सलमान भाई का भी फ़ोन आया था। वो फ़िल्म सुल्तान के लिए मार्शल आर्ट सीख रहे हैं। उन्होंने कहा कि मैं लौट कर आऊंगा तो एक फ़ाइट होगी. मैं गौतम गंभीर, सुरेश रैना और सुशील कुमार का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं। कई एक्ट्रेस के भी फ़ोन आए हैं।
सवाल : एक्ट्रेस के बीच आप बहुत लोकप्रिय हैं..
विजेंदर सिंह : क्या करूं... लोग प्यार करते हैं तो पॉपुलर हो जाता हूं।
सवाल : लंदन ओलिंपिक्स में आप जीत नहीं हासिल कर पाए। अब प्रोफ़ेशनल मैच जीतकर उसकी भरपाई हो गई?
विजेंदर सिंह : बिल्कुल नहीं। लंदन ओलिंपिक्स में हारने का दुख हमेशा रहेगा। सब चीज़ें तय थीं। मैं लगातार दूसरी बार ओलिंपिक्स का मेडल जीतना चाहता था। मैंने उस बॉक्सर (उज़्बेकिस्तान के अब्बोस अतोएव) को पहले भी हराया था, लेकिन मैं उससे क्वार्टर फ़ाइनल में हार गया। कहते हैं कि तक़दीर से ज़्यादा किसी को नहीं मिलता। मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ।
सवाल : आपको लगता है अगले साल 2016 में भारत के कम से कम 5-10 बॉक्सर प्रोफ़ेशनल रिंग में दिखाई देंगे?
विजेंदर सिंह : बिल्कुल 100 फ़ीसदी। मुझे बॉक्सिंग करते देख कर प्रोफ़ेशनल बॉक्सिंग के लोग दूसरे भारतीय बॉक्सर्स के बारे में पूछते हैं। मैंने उन्हं कई नाम भी सुझाए हैं। कई बॉक्सर रियो ओलिंपिक्स की तैयारी कर रहे हैं। जो लोग रियो के लिए क्वालिफ़ाई नहीं करेंगे, उनमें से कई बॉक्सर्स प्रो-बॉक्सिंग के लिए ज़रूर आगे आएंगे, क्योंकि ओलिंपिक्स का इंतज़ार चार साल लंबा होता है। मुझे लगता है इनमें से कई बॉक्सर्स कामयाब भी होंगे।
सवाल: उम्मीद करता हूं और आपके फ़ैन्स दुआ करेंगे कि आपको और दूसरे भारतीय मुक्केबाज़ों को इसमें कामयाबी मिले..
विजेंदर सिंह: बहुत शुक्रिया। उम्मीद करता हूं कि हमें बड़ी कामयाबी मिलेगी।
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं