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नई दिल्ली:
भारतीय वेटलिफ़्टिंग संघ डोपिंग के ख़िलाफ़ लगातार सख्ती का रुख दिखा रही है। इसने उन 8 कोच पर भी 2 साल का प्रतिबंध लगाने का फ़ैसला किया है जिनके खिलाड़ी डोपिंग के दोषी पाए गये हैं।
यही नहीं इस खेल संघ ने दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और मणिपुर जैसे राज्यों पर भी एक साल का प्रतिबंध लगाने का फ़ैसला किया है। क्योंकि, इन राज्यों के खिलाड़ी सबसे ज़्यादा संख्या में डोपिंग के दोषी पाए गये हैं। लेकिन वो ये भी कहते हैं कि चाहे सभी राज्यों पर प्रतिबंध लगाना पड़े, वो डोपिंग के ख़िलाफ़ लगातार सख्त फ़ैसले लेते रहेंगे।
इस साल अबतक 26 वेटलिफ़्टर डोपिंग के दोषी पाये गये हैं। भारतीय वेटलिफ़्टिंग संघ के उपाध्यक्ष सहदेव यादव मानते हैं कि ये संख्या बड़ी है। लेकिन वो इसकी सज़ा को लेकर ये भी साफ़ करते हैं कि सज़ा की अवधि नाडा (नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी) ही तय करेगी।
सहदेव यादव ने इतना ज़रूर बताया कि जिन राज्यों को सस्पेंड किया गया है उन्हें डेढ़ लाख रुपये का जुर्माना देना पड़ेगा। इसके अलावा वेटलिफ़्टरों के दोषी पाये जाने पर राज्यों को खिलाड़ियों के लिए 50,000 रुपये का जुर्माना भरना होगा। उन्होंने ये भी साफ़ किया की कोच की सज़ा को लेकर कोई रियायत नहीं बरती जाएगी।
कोच को जुर्माने के तौर पर ज़रूर कोई रक़म अदा नहीं करनी होगी। दिल्ली के तीन कोच- वीरेन्द्र कुमार, रवि कुमार और एसके बख्शी को दो साल के लिए सस्पेंड किया गया है जबकि मणिपुर के 2 और मध्य प्रदेश, पंजाब और ओडिशा के एक-एक कोच को भी सस्पेंड किया गया है।
ये सभी खिलाड़ी घरेलू प्रतियोगिताओं और प्रतियोगिताओं के बाहर डोपिंग के दोषी पाए गये हैं। इन्हें नेशनल यूथ गेम्स, जूनियर चैंपियनशिप्स, विश्वविद्यालय, पुलिस गेम्स और रेलवे की प्रतियोगिताओं के दौरान डोपिंग का दोषी पाया गया।
भारतीय वेटलिफ़्टिंग संघ के उपाध्यक्ष सहदेव यादव बताते हैं कि इन दिनों ज़्यादा से ज़्यादा वेटलिफ़्टरों की जांच करवाई जा रही है, इसलिए कई वेटलिफ़्टर पकड़े जा रहे हैं।
वो कहते हैं कि इन दिनों वो क़रीब 500 सैम्पलिंग करवाते हैं। ये जांच स्कूल गेम्स से लेकर नेशनल गेम्स और प्रतियोगिताओं के बाहर भी करवाई जा रही है। वो ये भी कहते हैं कि कई कोच खिलाड़ियों को लालच देते हैं ताकि वो डोपिंग कर अपना प्रदर्शन बेहतर कर मेडल जीत सकें।
उनका कहना है कि मेडल की जीत के साथ बड़ी इनामी रक़म का ऐलान भी खिलाड़ियों का लालच बढ़ा देता है। उदाहरण के तौर पर वो कहते हैं कि अगर खिलाड़ी कॉमनवेल्थ खेलों में स्वर्ण पदक जीतते हैं तो उन्हें क़रीब 1करोड़ रुपये इनाम के तौर पर मिल जाते हैं।
रियो ओलिंपिक्स की तैयारियों को लेकर सहदेव यादव कहते हैं कि तैयारी की दिशा ठीक है। अगर कोई खिलाड़ी घायल नहीं हुआ तो टीम अच्छे नतीजे ला सकती है। ख़ासकर रवि (77 किलोग्राम), सतीश कुमार (77 किलोग्राम) और संजीता चान्हू (48 किलोग्राम) और मीरा बाई (48 किलोग्राम) और यूथ ओलिंपिक गेम्स के रजत पदक विजेता रेगाला वेंकट राहुल (77 किलोग्राम) जैसे खिलाड़ियों से ख़ास उम्मीद है।
यही नहीं इस खेल संघ ने दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और मणिपुर जैसे राज्यों पर भी एक साल का प्रतिबंध लगाने का फ़ैसला किया है। क्योंकि, इन राज्यों के खिलाड़ी सबसे ज़्यादा संख्या में डोपिंग के दोषी पाए गये हैं। लेकिन वो ये भी कहते हैं कि चाहे सभी राज्यों पर प्रतिबंध लगाना पड़े, वो डोपिंग के ख़िलाफ़ लगातार सख्त फ़ैसले लेते रहेंगे।
इस साल अबतक 26 वेटलिफ़्टर डोपिंग के दोषी पाये गये हैं। भारतीय वेटलिफ़्टिंग संघ के उपाध्यक्ष सहदेव यादव मानते हैं कि ये संख्या बड़ी है। लेकिन वो इसकी सज़ा को लेकर ये भी साफ़ करते हैं कि सज़ा की अवधि नाडा (नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी) ही तय करेगी।
सहदेव यादव ने इतना ज़रूर बताया कि जिन राज्यों को सस्पेंड किया गया है उन्हें डेढ़ लाख रुपये का जुर्माना देना पड़ेगा। इसके अलावा वेटलिफ़्टरों के दोषी पाये जाने पर राज्यों को खिलाड़ियों के लिए 50,000 रुपये का जुर्माना भरना होगा। उन्होंने ये भी साफ़ किया की कोच की सज़ा को लेकर कोई रियायत नहीं बरती जाएगी।
कोच को जुर्माने के तौर पर ज़रूर कोई रक़म अदा नहीं करनी होगी। दिल्ली के तीन कोच- वीरेन्द्र कुमार, रवि कुमार और एसके बख्शी को दो साल के लिए सस्पेंड किया गया है जबकि मणिपुर के 2 और मध्य प्रदेश, पंजाब और ओडिशा के एक-एक कोच को भी सस्पेंड किया गया है।
ये सभी खिलाड़ी घरेलू प्रतियोगिताओं और प्रतियोगिताओं के बाहर डोपिंग के दोषी पाए गये हैं। इन्हें नेशनल यूथ गेम्स, जूनियर चैंपियनशिप्स, विश्वविद्यालय, पुलिस गेम्स और रेलवे की प्रतियोगिताओं के दौरान डोपिंग का दोषी पाया गया।
भारतीय वेटलिफ़्टिंग संघ के उपाध्यक्ष सहदेव यादव बताते हैं कि इन दिनों ज़्यादा से ज़्यादा वेटलिफ़्टरों की जांच करवाई जा रही है, इसलिए कई वेटलिफ़्टर पकड़े जा रहे हैं।
वो कहते हैं कि इन दिनों वो क़रीब 500 सैम्पलिंग करवाते हैं। ये जांच स्कूल गेम्स से लेकर नेशनल गेम्स और प्रतियोगिताओं के बाहर भी करवाई जा रही है। वो ये भी कहते हैं कि कई कोच खिलाड़ियों को लालच देते हैं ताकि वो डोपिंग कर अपना प्रदर्शन बेहतर कर मेडल जीत सकें।
उनका कहना है कि मेडल की जीत के साथ बड़ी इनामी रक़म का ऐलान भी खिलाड़ियों का लालच बढ़ा देता है। उदाहरण के तौर पर वो कहते हैं कि अगर खिलाड़ी कॉमनवेल्थ खेलों में स्वर्ण पदक जीतते हैं तो उन्हें क़रीब 1करोड़ रुपये इनाम के तौर पर मिल जाते हैं।
रियो ओलिंपिक्स की तैयारियों को लेकर सहदेव यादव कहते हैं कि तैयारी की दिशा ठीक है। अगर कोई खिलाड़ी घायल नहीं हुआ तो टीम अच्छे नतीजे ला सकती है। ख़ासकर रवि (77 किलोग्राम), सतीश कुमार (77 किलोग्राम) और संजीता चान्हू (48 किलोग्राम) और मीरा बाई (48 किलोग्राम) और यूथ ओलिंपिक गेम्स के रजत पदक विजेता रेगाला वेंकट राहुल (77 किलोग्राम) जैसे खिलाड़ियों से ख़ास उम्मीद है।
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