मेडिकल कारणों से एशियाई खेलों की टीम से बाहर की गईं वुशु खिलाड़ी दिव्यांशी चौधरी ने शनिवार को नेशनल फेडरेशन पर शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया. उन्होंने दावा किया कि जापान में खेलने के लिए डॉक्टर से मंजूरी मिलने के बावजूद उन्हें टीम से हटा दिया गया. खेल मंत्रालय की ओर से 22 अगस्त को जारी लिस्ट में आइची-नागोया एशियाई खेलों के लिए सात सदस्यीय वुशु टीम में दिव्यांशी को शामिल किया गया था.
लेकिन शुक्रवार को, महिलाओं की 60 किग्रा सांडा कैटेगरी में उनकी जगह दो बार एशियाई खेलों की मेडलिस्ट नओरेम रोशिबिना देवी को शामिल कर लिया गया. इसकी वजह यह बताई गई कि दिव्यांशी को एसीएल टियर (घुटने की चोट) हुआ है. वुशु एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने दावा किया कि एथलीट की एमआरआई रिपोर्ट में आंशिक हाई-ग्रेड एसीएल टियर और काफी सूजन का पता चला, इसलिए उन्हें टीम से हटा दिया गया.
दिव्यांशी ने लगाया उत्पीड़न का आरोप
इससे, पहले दिव्यांशी ने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में रोते हुए भेदभाव और मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया. उन्होंने कहा,"मैं सच में बहुत परेशान हो चुकी हूं. जून-जुलाई से लेकर अब सितंबर तक मुझे बहुत मानसिक रूप से परेशान किया गया है, क्योंकि वह (रोशिबिना) जाना चाहती थी (एशियाई खेलों में)."
कोटा की रहने वाली और अभी एनआईएस पटियाला में ट्रेनिंग कर रही दिव्यांशी रोते हुए बोलीं, "वह किसी और को क्यों नहीं जाने दे रही है? मैंने उसे हराया है (सेलेक्शन ट्रायल में). एशियाई खेलों में जाने का हक मेरा है." एक समय तो उन्होंने आत्महत्या करने की धमकी भी दी; वह उस बिल्डिंग की छत के किनारे तक चली गईं जहां वह खड़ी थीं और नीचे जमीन की ओर इशारा किया.
चोट की वजह से बाहर- वुशु एसोसिएशन ऑफ इंडिया
वुशु एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने जोर देकर कहा कि दिव्यांशी को सिर्फ चोट की वजह से टीम से हटाया गया था. फेडरेशन ने दावा किया कि दिव्यांशी ने खुद फेडरेशन को बताया था कि उन्हें चीन के हुबेई में 24 से 29 जून तक हुई 2026 SCO वुशु सांडा चैंपियनशिप के दौरान चोट लगी थी. एक महीने घर पर रहने के बाद, दिव्यांशी 10 अगस्त को NIS पटियाला में नेशनल कैंप में वापस लौटी थीं.
WAI के बयान में कहा गया,"14 अगस्त 2026 को ट्रेनिंग के दौरान, उन्होंने हैमस्ट्रिंग की समस्या के कारण दर्द की शिकायत की और 14 व 15 अगस्त को ट्रेनिंग नहीं की. 17 अगस्त को ट्रेनिंग के दौरान, उन्होंने फिर से हैमस्ट्रिंग में दर्द की शिकायत की और उसके बाद अगले 2-3 दिनों तक हल्की ट्रेनिंग की." "बार-बार चोट लगने के कारण, कोच ने खिलाड़ी से पूछा और उन्होंने बताया कि उन्हें चीन में SCO इवेंट के दौरान चोट लगी थी और लौटने पर उन्होंने अपने माता-पिता को इसकी जानकारी दी थी. वह एक महीने घर पर रहीं और फिर पटियाला में ट्रेनिंग कैंप में शामिल हुईं."
नियमों के तहत रिप्लेसमेंट: खेल मंत्रालय
खेल मंत्रालय के एक सूत्र ने बताया कि वुशु टीम में बदलाव "स्थापित नियमों" के तहत किया गया, जब राष्ट्रीय महासंघ ने भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) को सूचित किया कि दिव्यांशी को टीम से हटाना होगा क्योंकि उन्हें चोट लगी है. खेल मंत्रालय के सूत्र ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया,"वुशु एसोसिएशन ने IOA को सूचित किया कि उन्हें चोट लगी है और 9 सितंबर को उन्हें टीम से हटाना होगा. इसके अनुसार अंतिम टीम में बदलाव किए गए. मंत्रालय ने चोट के कारण खिलाड़ी को बदलने के स्थापित नियमों के तहत इन बदलावों को मंजूरी दी."
WAI ने कहा कि माता-पिता की सहमति मिलने के बाद, 23 अगस्त को पटियाला के मणिपाल अस्पताल में दो फिजियो की देखरेख में उनका MRI किया गया. "MRI रिपोर्ट 24 अगस्त को SAI के स्पोर्ट्स मेडिसिन के HPD को दिखाई गई और उन्होंने एथलीट को आगे की सलाह के लिए मणिपाल अस्पताल में एक आर्थोपेडिक डॉक्टर के पास भेजा. आर्थोपेडिक डॉक्टर और मेडिकल ऑफिसर द्वारा आगे की क्लिनिकल जांच और MRI की समीक्षा के बाद, उनमें आंशिक हाई-ग्रेड ACL टियर और बड़े पैमाने पर सूजन (effusion) पाई गई."
"एथलीट की सेहत, सुरक्षा और लंबे समय के खेल करियर को सबसे ऊपर रखते हुए, WAI ने मेडिकल सलाह और उपलब्ध मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर भारतीय ओलंपिक संघ (IOA), युवा मामले और खेल मंत्रालय (MYAS) और भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) को ईमेल के जरिए सूचित किया कि एथलीट को चोट लगी है और उन्हें ठीक होने तक प्रतिस्पर्धी गतिविधियों और पूरी ट्रेनिंग से दूर रहने की मेडिकल सलाह दी गई है."
वहीं, परेशान दिव्यांशी ने आरोप लगाया कि अतीत में भी कुछ लोगों ने उन्हें शारीरिक रूप से परेशान किया है. "आपको पता है, जब श्रीनगर में हमारा 10 दिन का कैंप लगा था, तब ज़ोरदार तरीके से मेरे कंधे में चोट लग गई थी. इस वजह से मैंने 4-5 दिन तक प्रैक्टिस नहीं की. फिर, मैं ठीक हुई और SCO इवेंट (चीन में) खेलने गई. और मैंने यह सब सहा. देहरादून में हुए पहले ट्रायल में, मुझे ज़बरदस्ती हराया गया. मेरे यू-ट्यूब चैनल पर इसका वीडियो भी है."
उन्होंने दावा किया कि डॉक्टरों ने उनसे कहा था कि वह चोट के बावजूद खेल सकती हैं. "मुझे चोट लगी थी. मैंने डॉक्टर को दिखाया. डॉक्टर ने कहा, 'टेपिंग करके आप आसानी से खेल सकती हैं'. मैं खेलना चाहती थी. लेकिन मेरी MRI रिपोर्ट, जो यहां मेरे कोच और फ़ेडरेशन के पास थीं, वे उनके पास चली गईं. और वे रिपोर्ट उन्हीं के पास हैं. तो, क्यों? मेरी रिपोर्ट क्यों भेजी जा रही हैं?
"डॉक्टर खुद प्रिस्क्रिप्शन में लिख रहे हैं कि यह खिलाड़ी खेल सकती है. तो, इसे क्यों नहीं माना जा रहा है? और, जब आप इतना बड़ा फ़ैसला ले रहे हैं, तो कम से कम एथलीट को तो बताएं. अगर आप मेरा नाम हटा रहे हैं, तो क्या मुझे इन सब चीज़ों के बारे में एक बार भी पता नहीं होना चाहिए था? "मुझे भी अपनी बात कहनी थी. यह सही नहीं है. एशियन गेम्स में जाना और भारत के लिए जीतना मेरा बहुत बड़ा सपना है."
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