दिल्ली हाई कोर्ट ने एक स्विस कम्पनी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने 2010 राष्ट्रमंडल खेलों से जुड़े एक भ्रष्टाचार के मामले में निचली अदालत के सामने पेश नहीं होने के बाद अपने खिलाफ कार्रवाई में रियायत की मांग की थी।
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नई दिल्ली:
दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को एक स्विस कम्पनी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने 2010 राष्ट्रमंडल खेलों से जुड़े एक भ्रष्टाचार के मामले में निचली अदालत के सामने पेश नहीं होने के बाद अपने खिलाफ कार्रवाई में रियायत की मांग की थी।
न्यायाधीश मुक्ता गुप्ता की एक सदस्यीय पीठ ने कहा, "याचिका खारिज की जाती है।"
स्विस टाइमिंग नाम की इस कम्पनी पर राष्ट्रमंडल खेलों से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में संलिप्त होने का आरोप है। इस कम्पनी पर अवैध रूप से करार हासिल करने का आरोप है, जिससे सरकार को 90 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
स्विस कम्पनी के खिलाफ निचली अदालत ने कार्रवाई के आदेश दिए थे और इसी पर रोक लगाने के लिए कम्पनी ने दिल्ली उच्च न्यायालय की शरण ली है।
कम्पनी का कहना है कि उसे पेशी के सम्बंध में किसी प्रकार का सम्मन नहीं मिला और इसी कारण वह सुनवाई के दौरान पेश नहीं हो सकी।
न्यायाधीश मुक्ता गुप्ता की एक सदस्यीय पीठ ने कहा, "याचिका खारिज की जाती है।"
स्विस टाइमिंग नाम की इस कम्पनी पर राष्ट्रमंडल खेलों से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में संलिप्त होने का आरोप है। इस कम्पनी पर अवैध रूप से करार हासिल करने का आरोप है, जिससे सरकार को 90 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
स्विस कम्पनी के खिलाफ निचली अदालत ने कार्रवाई के आदेश दिए थे और इसी पर रोक लगाने के लिए कम्पनी ने दिल्ली उच्च न्यायालय की शरण ली है।
कम्पनी का कहना है कि उसे पेशी के सम्बंध में किसी प्रकार का सम्मन नहीं मिला और इसी कारण वह सुनवाई के दौरान पेश नहीं हो सकी।
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