प्रतीकात्मक चित्र
नई दिल्ली:
हाल में संपन्न वर्ल्ड यूनिवर्सिटी खेलों में कांस्य पदक के प्ले ऑफ मुकाबले के लिए तीन तीरंदाजों के समय पर नहीं पहुंचने के लिए भारतीय विश्वविद्यालय संघ (एआईयू) ने उन्हें और उनके कोच को तीन साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया है और साथ ही उन्हें उन पर खर्च किए पैसे लौटाने को कहा गया है।
एआईयू ने तीरंदाज गुरविंदर सिंह, कंवलप्रीत सिंह और अमन के अलावा अधिकारी जीवनजोत सिंह को 'बेहद लापरवाही' और 'नियमों का उल्लंघन' करके 'अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि को नुकसान पहुंचाने, बदनामी और शर्मसार करने' के लिए निलंबित किया है।
कंपाउंड टीम की यह तिकड़ी 3 से 14 जुलाई तक कोरिया के ग्ंवाग्जू में हुए विश्वविश्वविद्यालय खेलों के कांस्य पदक प्ले आफ मुकाबले में इटली के खिलाफ नहीं उतरी थी।
एयूआई ने सदस्यों विश्वविद्यालयों की खेल समितियों के सचिवों को लिखे पत्र में कहा, जांच रिपोर्ट का आकलन किया गया है। यह पाया गया है कि भारतीय दल के खिलाड़ी और अधिकारी इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में प्रतिनिधित्व के लिए पहुंचने में विफल रहे। यह खिलाड़ियों और अधिकारी द्वारा अपने आधिकारिक काम के प्रति बेहद लापरवाही और एफआईएययू नियमों की आचार संहिता के उल्लंघन दर्शाता है, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि को नुकसान पहुंचा, बदनामी हुई और शर्मसार होना पड़ा।
पत्र में एआईयू के संयुक्त सचिव खेल गुरदीप सिंह ने कहा, घटना को गंभीरता से लेते हुए, खिलाड़ियों (गुरविंदर सिंह-जीएनडीयू अमृतसर, कंवलप्रीत सिंह-पंजाब विश्वविद्यालय, अमन-राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर) को तीन साल के लिए निलंबित करने का फैसला किया है, जो मौजूदा वर्ष 2015-16 से 2017-18 के लिए प्रभावी होगा। इस दौरान ये अंतर विश्वविद्यालय टूर्नामेंट और अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय खेलों में हिस्सा नहीं ले पाएंगे।
इन तीरंदाजों को उनके चयन, ट्रेनिंग और प्रतिनिधित्व पर खर्च हुए पैसे भी लौटाने को कहा गया है, जिसमें विमान यात्रा का खर्चा भी शामिल हैं। यह खर्चा प्रति खिलाड़ी पांच लाख रुपये के आसपास आने की उम्मीद है। पटियाला के पंजाबी विश्वविद्यालय ने तीरंदाजी टीम को ग्वांग्जू भेजने का खर्चा उठाया था।
सामान्यत: कोई एक विश्वविद्यालय खिलाड़ियों का खर्चा उठाता है और बाद में खेल मंत्रालय इसका भुगतान करता है। एआईयू ने हालांकि खिलाड़ियों के समय पर प्रतियोगिता स्थल नहीं पहुंचने का कारण नहीं बताया। एआईयू ने आरके शर्मा से भी रिपोर्ट मांगी थी जो भारतीय दल के साथ कोरिया गए थे।
एआईयू ने तीरंदाज गुरविंदर सिंह, कंवलप्रीत सिंह और अमन के अलावा अधिकारी जीवनजोत सिंह को 'बेहद लापरवाही' और 'नियमों का उल्लंघन' करके 'अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि को नुकसान पहुंचाने, बदनामी और शर्मसार करने' के लिए निलंबित किया है।
कंपाउंड टीम की यह तिकड़ी 3 से 14 जुलाई तक कोरिया के ग्ंवाग्जू में हुए विश्वविश्वविद्यालय खेलों के कांस्य पदक प्ले आफ मुकाबले में इटली के खिलाफ नहीं उतरी थी।
एयूआई ने सदस्यों विश्वविद्यालयों की खेल समितियों के सचिवों को लिखे पत्र में कहा, जांच रिपोर्ट का आकलन किया गया है। यह पाया गया है कि भारतीय दल के खिलाड़ी और अधिकारी इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में प्रतिनिधित्व के लिए पहुंचने में विफल रहे। यह खिलाड़ियों और अधिकारी द्वारा अपने आधिकारिक काम के प्रति बेहद लापरवाही और एफआईएययू नियमों की आचार संहिता के उल्लंघन दर्शाता है, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि को नुकसान पहुंचा, बदनामी हुई और शर्मसार होना पड़ा।
पत्र में एआईयू के संयुक्त सचिव खेल गुरदीप सिंह ने कहा, घटना को गंभीरता से लेते हुए, खिलाड़ियों (गुरविंदर सिंह-जीएनडीयू अमृतसर, कंवलप्रीत सिंह-पंजाब विश्वविद्यालय, अमन-राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर) को तीन साल के लिए निलंबित करने का फैसला किया है, जो मौजूदा वर्ष 2015-16 से 2017-18 के लिए प्रभावी होगा। इस दौरान ये अंतर विश्वविद्यालय टूर्नामेंट और अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय खेलों में हिस्सा नहीं ले पाएंगे।
इन तीरंदाजों को उनके चयन, ट्रेनिंग और प्रतिनिधित्व पर खर्च हुए पैसे भी लौटाने को कहा गया है, जिसमें विमान यात्रा का खर्चा भी शामिल हैं। यह खर्चा प्रति खिलाड़ी पांच लाख रुपये के आसपास आने की उम्मीद है। पटियाला के पंजाबी विश्वविद्यालय ने तीरंदाजी टीम को ग्वांग्जू भेजने का खर्चा उठाया था।
सामान्यत: कोई एक विश्वविद्यालय खिलाड़ियों का खर्चा उठाता है और बाद में खेल मंत्रालय इसका भुगतान करता है। एआईयू ने हालांकि खिलाड़ियों के समय पर प्रतियोगिता स्थल नहीं पहुंचने का कारण नहीं बताया। एआईयू ने आरके शर्मा से भी रिपोर्ट मांगी थी जो भारतीय दल के साथ कोरिया गए थे।
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