देश की सीमाओं पर 3 जंग लड़ने वाले सेवानिवृत्त कैप्टन चुन्नीलाल अब अपनी ही जमीन बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं. रिटायर्ड कैप्टन ने 1962, 1965 और 1971 के युद्ध में दुश्मनों का सामना किया था. चुन्नीलाल मूल रूप से कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) के रहने वाले हैं, करीब 24 साल पहले जैसलमेर जिले के मोहनगढ़ क्षेत्र में कृषि भूमि आवंटित हुई थी. उनका आरोप है कि कृषि भूमि की फर्जी दस्तावेजों के आधार पर रजिस्ट्री कराकर म्यूटेशन भी करा दिया गया. बेटे हनुमान सिंह (मुल्तान सिंह) की शिकायत पर कोतवाली थाना पुलिस ने 4 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
पड़ोसी कर रहा था जमीन का निगरानी
सरकार ने 2002 मोहनगढ़ में 25 बीघा कृषि भूमि आवंटित की थी. तब पानी और अन्य सुविधाओं की कमी के कारण वे हिमाचल चले गए. उन्होंने जमीन की निगरानी का जिम्मा पड़ोस के ही एक किसान को सौंप दिया था. जमीन लंबे समय तक खाली पड़ी रही. हाल ही में उन्होंने अपनी जमीन की जानकारी लेने के लिए एक व्यक्ति को भेजा था. तब पता चला कि जमीन का कब्जा किसी अन्य व्यक्ति के नाम हो चुका है. जानकारी मिलने के बाद चुन्नीलाल खुद मौके पर पहुंचे और मामले की जानकारी जुटाई तो पूरा मामला खुल गया.
आरोप- नकली साइन और आधार कार्ड से हुआ खेल
मोहनलाल, धन्नाराम, करणाराम और ओमप्रकाश के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज की गई है. पुलिस में दर्ज शिकायत के मुताबिक, पिछले महीने 16 जून को किसी अन्य व्यक्ति को कैप्टन चुन्नीलाल बताकर उप-पंजीयक कार्यालय में पेश किया गया. आरोप है कि फर्जी फोटो, नकली हस्ताक्षर, आधार कार्ड सहित फर्जी दस्तावेज भी जमा कराए गए. इसके बाद 22 जून को मोहनगढ़ उपनिवेशन तहसील में जमीन का म्यूटेशन भी दर्ज हो गया.
कैप्टन चुन्नीलाल ने कहा कि उन्होंने तीन युद्धों में देश की सेवा की, लेकिन कभी नहीं सोचा था कि एक दिन अपनी ही जमीन बचाने के लिए सरकारी दफ्तरों और पुलिस के चक्कर लगाने पड़ेंगे. उनका कहना है कि अगर रजिस्ट्री के दौरान पहचान और दस्तावेजों का सही सत्यापन किया जाता तो कथित फर्जीवाड़ा संभव नहीं होता.
कई लोगों की जमीनें हड़पे जाने की आशंका
कोतवाली थाना अधिकारी ने बताया कि बीएनएस की धारा 318(4), 336(3), 338, 340 और 61(2) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है. पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि मोहनगढ़ क्षेत्र की कई कृषि जमीनों का रिकॉर्ड अब भी ऑफलाइन है. आशंका है कि कुछ सक्रिय लोग ऐसे भूखंडों को निशाना बना रहे हैं, जिनके मालिक लंबे समय से बाहर रह रहे हैं. ऐसे मामलों में कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है. अब पुलिस रजिस्ट्री, पहचान संबंधी दस्तावेजों और राजस्व रिकॉर्ड की जांच कर रही है. जांच के बाद ही साफ होगा कि कथित फर्जी रजिस्ट्री के पीछे कौन लोग हैं.
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