राजस्थान में दिव्यांगजनों को पंचायतीराज एवं शहरी निकाय चुनावों में 4 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग अब और तेज हो गई है. भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया और राजेंद्र राठौड़ ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखा है. पत्र में अपील की गई है कि इस दिशा में जल्द ही फैसला लिया जाए. दोनों नेताओं द्वारा लिखे गए पत्रों में दिव्यांगजनों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में उचित प्रतिनिधित्व देने पर जोर दिया गया है. पत्रों में उल्लेख किया गया है कि नेशनल चेयरमैन दिव्यांग अधिकार महासंघ हेमंत भाई गोयल लंबे समय से इस मुद्दे को लगातार उठा रहे हैं. उनके प्रयासों से यह विषय सरकार के संज्ञान में बार-बार लाया जा रहा है.
राज्य में 15 लाख दिव्यांग
राज्य में करीब 15 लाख से अधिक दिव्यांगजन हैं. यह देशभर में यह संख्या कुल आबादी का लगभग 12 प्रतिशत है. पत्र में कहा गया कि ये वर्ग शिक्षा, प्रशासन और अन्य क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा साबित कर चुका है, लेकिन राजनीतिक भागीदारी में अभी भी पीछे है. ऐसे में सरकारी भर्तियों की तर्ज पर स्थानीय निकाय चुनावों में 4 प्रतिशत आरक्षण दिया जाना आवश्यक है, जिससे उन्हें भी प्रतिनिधित्व मिल सके.
वसुंधरा सरकार में इस वजह से अटका था मामला
यह मामला पहले भी उठ चुका है. पूर्व सीएम वसुंधरा राजे सरकार के दौरान तत्कालीन सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अरुण चतुर्वेदी ने निर्देश दिए थे. उन्होंने सैद्धांतिक सहमति देते हुए प्रस्ताव तैयार कर मंत्रिमंडल में रखने के निर्देश दिए थे. लेकिन उसी दौरान चुनाव आचार संहिता लागू होने के कारण यह प्रस्ताव पारित नहीं हो सका.
3 बार सिफारिश हुई, लेकिन भी लागू नहीं
हेमंत भाई गोयल ने संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 41 के साथ ही दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के प्रावधानों का हवाला दिया. उन्होंने दिव्यांगजनों को समान अवसर और राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग की है. गौरतलब है कि इस विषय पर वर्ष 2009, 2018 और 2021 में भी सिफारिश की जा चुकी हैं, लेकिन अब तक इन्हें लागू नहीं किया गया है. दोनों नेताओं ने पत्रों में इन सिफारिशों का भी हवाला दिया है.
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