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This Article is From Oct 02, 2025

राजस्थान में कफ सिरप से 3 की मौत: कायसन फार्मा की दवाई पर 2023 में लगा था बैन, समझें पूरा मामला

भरतपुर में डॉक्टरों ने वीयर अस्पताल की पर्ची देखी और परिवार से वह सिरप की तस्वीर भी मंगाई जो बच्चे को दी गई थी. तीरथराज को जेनाना अस्पताल में भर्ती किया गया, लेकिन जब हालत में सुधार नहीं हुआ तो उसे जयपुर रेफर कर दिया गया.

राजस्थान में कफ सिरप से 3 की मौत:  कायसन फार्मा की दवाई पर 2023 में लगा था बैन, समझें पूरा मामला
  • राजस्थान में डेक्सट्रोमेथॉर्फन हाइड्रोब्रोमाइड कफ सिरप से 3 बच्चों की मौत का मामला सामने आया है
  • कायसन फार्मा कंपनी के मालिक दोनों जगह से लापता हैं और कंपनी की दवा पर पहले भी प्रतिबंध लगाया गया था
  • दो वर्षीय तीरथराज को 23 सितंबर को कफ सिरप दिया गया था, जिसके बाद उसकी हालत बिगड़ गई और 27 सितंबर को मौत हो गई
भरतपुर:

खांसी की दवाई पीने से राजस्थान में एक और बच्चे की मौत हो गई है. परिजनों ने दावा किया कि लैब रिपोर्ट के बिना कुछ नहीं कहा जा सकता है. डेक्सट्रोमेथॉर्फन हाइड्रोब्रोमाइड सिरप से कथित तौर पर तीन बच्चों की मौत हो गई है. स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि इस दवा का पूरा बैच वापस मंगा लिया गया है लेकिन लैब टेस्ट से पहले कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी. एनडीटीवी की पड़ताल में सामने आया है कि खांसी की दवाई बनाने वाली कंपनी कायसन फार्मा के मालिक फैक्ट्री और घर दोनों जगह से गायब हो गए हैं. साथ ही यह भी पता चला है कि 2023 में ही कायसन फार्मा की एक दवाई पर प्रतिबंध लगा था और इसके बाद भी कायसन फार्मा को फ्री मेडिसिन स्कीम के तहत दवाइयां सप्लाई करने की इजाजत कैसे मिली?

बता दें कि राजस्थान में भी कफ सिरप डेक्सट्रोमेथॉर्फन हाइड्रोब्रोमाइड को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है. जानकारी के मुताबिक भरतपुर के वीयर से भी एक परिवार ने रिपोर्ट किया है कि उनके बच्ची की मौत भी एक सरकारी अस्पताल से दी गई इसी कफ सिरप के सेवन के बाद हुई है. मृत बच्चे में भी वही लक्षण थे जो पहले के दो पीड़ितों में पाए गए थे. 

2 साल के तीरथराज को 23 सितंबर को अस्पताल ले जाया गया था

दो वर्षीय तीरथराज और उसके चार वर्षीय भाई ललित को 23 सितंबर को सुबह 11 बजे सर्दी-खांसी की शिकायत के साथ वीयर के उप-जिला अस्पताल ले जाया गया था. डॉक्टर ने दोनों बच्चों को एक ही कफ सिरप डेक्सट्रोमेथॉर्फन हाइड्रोब्रोमाइड दिया था. तीरथराज को दोपहर 12 बजे घर लौटने के बाद यह सिरप दिया गया था. उसके पिता निहाल सिंह ने बताया कि दवा लेने के बाद बच्चा सो गया, लेकिन जब चार घंटे तक नहीं जागा तो परिवार उसे फिर से वीयर अस्पताल लेकर गया. वहां से उसे भरतपुर के जेनाना अस्पताल रेफर किया गया था.

हालत न सुधरने पर बच्चे को जयपुर रेफर किया गया

भरतपुर में डॉक्टरों ने वीयर अस्पताल की पर्ची देखी और परिवार से वह सिरप की तस्वीर भी मंगाई जो बच्चे को दी गई थी. तीरथराज को जेनाना अस्पताल में भर्ती किया गया, लेकिन जब हालत में सुधार नहीं हुआ तो उसे जयपुर रेफर कर दिया गया.

27 सितंबर को बच्चे की मौत हो गई

24 सितंबर की सुबह तीरथराज को जयपुर के जेके लोन अस्पताल भेजा गया, जहां 27 सितंबर को उसकी मौत हो गई. उसके चाचा बृजेंद्र सिंह का कहना है कि जब उन्होंने समाचारों में भरतपुर में सम्राट जाटव की मौत की खबर देखी और सुनी, तो उन्हें एहसास हुआ कि उनके बच्चे को भी वही कफ सिरप दिया गया था जो अब घातक साबित हो रहा है.

तीरथराज का इलाज कर रहे डॉक्टर ने कही ये बात

तीरथराज का इलाज करने वाले डॉक्टर बबलू मुद्गल ने कहा, "23 सितंबर को बच्चा मेरे पास ब्रोंकाइटिस की शिकायत के साथ आया था. मैंने कुछ इंजेक्शन, नेबुलाइज़ेशन और कफ सिरप लिखा. जब बच्चा वापस आया तो वह सुस्ती की शिकायत कर रहा था, इसलिए हमने ड्रिप दी और उसे बड़े अस्पताल रेफर कर दिया. कफ सिरप भी निर्धारित मात्रा 1.5 मिली में ही दिया गया था. अब हमने मेडिकल टीम को मरीज के घर भेजा है ताकि सही स्थिति का पता लगाया जा सके."

निजी डॉक्टरों ने कही ये बात

लेकिन निजी डॉक्टरों का कहना है कि यह कफ सिरप आमतौर पर इस्तेमाल में लाई जाती है और पिछले 20 सालों से बाजार में उपलब्ध है. जयपुर के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सुशील सांघी ने NDTV से बातचीत में कहा, "कोरेक्स और कोडीन के बैन होने के बाद डेक्सट्रोमेथॉर्फन हाइड्रोब्रोमाइड का व्यापक उपयोग होने लगा है. लेकिन यह दवा छोटे बच्चों को नहीं दी जानी चाहिए, खासकर दो साल से कम उम्र के बच्चों को तो बिल्कुल नहीं. यह एक सॉल्ट है जिसे कफ सप्रेसेंट के रूप में सिरप में इस्तेमाल किया जाता है ताकि लगातार खांसी के लक्षणों से राहत मिल सके. अधिक मात्रा में इसका सेवन जानलेवा हो सकता है क्योंकि यह दिमाग पर असर डालता है और कोमा जैसे लक्षण पैदा कर सकता है. लेकिन यह दवा आमतौर पर इस्तेमाल की जाती है, इसलिए यह कैसे जानलेवा हुई- इसकी जांच होनी चाहिए. शायद सिरप बनाने में इस्तेमाल किया गया सॉल्ट ही नकली हो."

राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा रिपोर्ट आने के बाद होगी आगे की कार्रवाई

अब सरकार भी इस घातक सिरप को लेकर बैकफुट पर है. राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा, "सिरप के सैंपल जांच के लिए लैब भेजे गए हैं. जब तक लैब टेस्ट नहीं हो जाता, यह कहना जल्दबाज़ी होगी कि कफ मिक्सचर में ज़हर है. रिपोर्ट आने में तीन दिन लगेंगे और हम एक से अधिक लैब से टेस्ट करवा रहे हैं. हमने सिरप को वापस ले लिया है और जब तक हमारे पास सबूत नहीं है, तब तक किसी पर दोष नहीं मढ़ा जा सकता. हम इससे ज्यादा कुछ नहीं कर सकते."

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