- झुंझुनूं जिले में 1 करोड़ 13 लाख 95 हजार रुपए के ATM कैश गबन का मामला सामने आया है
- मुख्य आरोपी सुमेर सिंह 8 महीने पहले कंपनी में नौकरी पर आया और 3 महीने पहले दूसरे आरोपी को नौकरी दिलाई
- दोनों आरोपियों ने ड्राइवर और गनमैन को घर भेजा और खुद कैश वैन लेकर निकल गए
झुंझुनूं जिले में पिछले दिनों सामने आए 1 करोड़ 13 लाख 95 हजार रुपए के एटीएम कैश गबन मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ लगातार नए खुलासे हो रहे हैं. प्रारंभिक जांच और कंपनी की आंतरिक ऑडिट से संकेत मिले हैं कि दोनों आरोपियों ने वारदात को अचानक नहीं, बल्कि पूरी प्लानिंग और सिस्टम को समझने के बाद अंजाम दिया. यही वजह है कि अब सीएमएस कंपनी ने केवल झुंझुनूं ही नहीं, बल्कि पूरे सीकर रीजन के अंतर्गत आने वाले झुंझुनूं, चिड़ावा, खेतड़ी, नीमकाथाना और सीकर क्षेत्र के सभी एटीएम की विशेष ऑडिट शुरू करा दी है. फिलहाल कहीं से भी किसी अन्य गड़बड़ी की पुष्टि नहीं हुई है.
सिर्फ 3 महीने पहले नौकरी पर आया था आरोपी
गबन की राशि 1 करोड़ 13 लाख 95 हजार रुपए सामने आने के बाद सीएमएस कंपनी के रीजनल मैनेजर विनोद यादव झुंझुनूं पहुंचे और अधिकारियों के साथ पूरे मामले की समीक्षा की. कंपनी का मानना है कि दोनों कर्मचारियों ने पूरी रणनीति के साथ वारदात को अंजाम दिया. जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी सुमेर सिंह नवंबर 2025 में कंपनी से जुड़ा था. इसके बाद मार्च 2026 में उसने अपने गांव सुजडौला निवासी संदीप सिंह को भी कंपनी में नौकरी दिलवाई. संदीप कंपनी में महज तीन महीने पहले आया था.

ड्राइवर को 'काम नहीं है' कहकर खुद कैश वैन लेकर निकल पड़े
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ड्राइवर और गनमैन को दिया झांसा
शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि दोनों ने पहले एटीएम कैश लोडिंग सिस्टम, सुरक्षा प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था को बारीकी से समझा और फिर गबन की योजना बनाई. 25 जून को दोनों ने सबसे पहले कैश वैन के ड्राइवर और गनमैन को यह कहकर घर भेज दिया कि आज उनका कोई काम नहीं है. इसके बाद दोनों स्वयं कैश वैन लेकर एटीएम पर निकल गए. आठ एटीएम पर पहुंचने के बावजूद कई मशीनों में कैश नहीं डाला, कहीं कम कैश डाला और कहीं कैश डालने के बाद वापस निकाल लिया. लेकिन कंपनी के सिस्टम में फर्जी कैश लोडिंग रिपोर्ट अपलोड कर दी.
यही नहीं, जब ड्राइवर के घर जाने की सूचना कंपनी तक पहुंची और जीपीएस ट्रैकिंग में कैश वैन लगातार एटीएम लोकेशन पर चलती दिखाई दी तो कंपनी के जीपीएस मॉनिटरिंग सिस्टम ने दोनों कर्मचारियों से संपर्क किया. इस पर आरोपियों ने झूठी कहानी गढ़ते हुए बताया कि वे एटीएम में आए तकनीकी खराबी को ठीक करने के लिए मौके पर गए हैं. इस तरह उन्होंने ड्राइवर, गनमैन और जीपीएस मॉनिटरिंग सिस्टम - तीनों को भ्रम में रखकर करोड़ों रुपए के गबन को अंजाम दिया.
दोस्त से 22 हजार रुपये भी ठग लिए
वारदात के बाद संदीप सिंह अपने परिजनों को ट्रेनिंग पर बाहर जाने की बात कहकर गायब हो गया और अपना मोबाइल बंद कर लिया. वहीं सुमेर सिंह जयपुर पहुंचा. जहां उसने अपने पुराने परिचित से मोबाइल खराब होने का बहाना बनाकर 22 हजार रुपए भी उधार लिए और फिर वहां से फरार हो गया. चिड़ावा थाना पुलिस दोनों आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दे रही है. वहीं कंपनी की जांच अब इस बात पर भी केंद्रित है कि क्या इस पूरे गबन में केवल यही दो कर्मचारी शामिल थे या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क भी सक्रिय है.
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